वंदे मातरम पर कांग्रेस का बड़ा फैसला, पार्टी कार्यक्रमों में गाए जाएंगे सिर्फ 2 पैरा; BJP ने साधा निशाना

वंदे मातरम पर कांग्रेस का बड़ा फैसला, पार्टी कार्यक्रमों में गाए जाएंगे सिर्फ 2 पैरा; BJP ने साधा निशाना

 

वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस ने बड़ा फैसला लिया है। पार्टी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के सिर्फ दो पैरा गाए जाएंगे। BJP ने कांग्रेस के फैसले पर सवाल उठाए हैं।

वंदे मातरम को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि कांग्रेस शासित राज्यों और पार्टी के कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के केवल दो पैरा ही गाए जाएंगे। पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकारी कार्यक्रमों में केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए नियमों का पालन किया जाएगा, लेकिन कांग्रेस के अपने कार्यक्रमों में करीब 90 वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार वंदे मातरम के दो ही पैरा गाए जाएंगे। कांग्रेस के इस फैसले के बाद भारतीय जनता पार्टी ने इसे राजनीतिक मुद्दा बना दिया है और पार्टी पर राष्ट्रगीत के कथित अपमान का आरोप लगाया है।

गोवा में खरगे के कार्यक्रम से शुरू हुआ विवाद

विवाद उस समय और बढ़ गया जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मौजूदगी में गोवा में आयोजित पार्टी के एक कार्यक्रम में वंदे मातरम के छह पैरा में से केवल दो पैरा गाए गए। कार्यक्रम में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं की मौजूदगी थी। इसके बाद बीजेपी नेताओं ने सवाल उठाया कि जब देश में वंदे मातरम को लेकर नए नियमों की चर्चा हो रही है, तब कांग्रेस अपने कार्यक्रम में पूरा राष्ट्रगीत क्यों नहीं गा रही है। बीजेपी ने इसे कांग्रेस की राजनीतिक सोच और राष्ट्रगीत के प्रति उसके रवैये से जोड़ते हुए हमला बोला।

कांग्रेस ने साफ किया अपना रुख

बीजेपी के हमलों के बाद कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद ने पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकारी कार्यक्रमों में कांग्रेस कानून और सरकार के नियमों का पालन करेगी। अगर किसी सरकारी कार्यक्रम में पूरा वंदे मातरम गाना अनिवार्य है तो कांग्रेस नेता वहां उसका पालन करेंगे। हालांकि पार्टी के अपने कार्यक्रमों में केवल दो स्टैंजा यानी दो पैरा ही गाए जाएंगे। कांग्रेस का तर्क है कि यही परंपरा लंबे समय से चली आ रही है और पार्टी इसे अपने कार्यक्रमों में जारी रखेगी। कांग्रेस नेताओं ने यह भी संकेत दिया कि केवल कानून बनाने से उनकी पार्टी की राजनीतिक और संगठनात्मक परंपरा नहीं बदलेगी।

कानून को लेकर भी राजनीतिक बहस

इस पूरे विवाद का एक अहम हिस्सा संसद से जुड़े उस कानून को लेकर है, जिसके बारे में कांग्रेस और बीजेपी के बीच अलग-अलग राजनीतिक दावे सामने आ रहे हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी सरकारी कार्यक्रमों में लागू नियमों का पालन करेगी, लेकिन अपने कार्यक्रमों में दो पैरा की परंपरा को जारी रखेगी। दूसरी तरफ बीजेपी नेताओं का तर्क है कि राष्ट्रगीत के सम्मान और उसके निर्धारित स्वरूप को लेकर किसी तरह की राजनीतिक पसंद या नापसंद नहीं होनी चाहिए। बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस से सवाल किया है कि अगर पूरा वंदे मातरम गाना जरूरी है तो पार्टी कार्यक्रमों में इसे अधूरा क्यों रखा जा रहा है।

खरगे ने बीजेपी पर साधा निशाना

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बीजेपी पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस को देशभक्ति का पाठ पढ़ाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौर का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि महात्मा गांधी, सरदार पटेल और दूसरे स्वतंत्रता सेनानियों के समय वंदे मातरम के जिन हिस्सों का इस्तेमाल किया जाता था, क्या उन्हें भी देशभक्ति पर सवालों के घेरे में रखा जाएगा। कांग्रेस का कहना है कि वंदे मातरम का सम्मान केवल इसे पूरा गाने से तय नहीं किया जा सकता, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन में इसके ऐतिहासिक योगदान और देश की आजादी के संघर्ष में इसकी भूमिका को भी समझना जरूरी है।

बीजेपी ने कांग्रेस पर लगाया मुस्लिम लीग के दबाव का आरोप

बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस के मौजूदा फैसले को करीब 90 साल पुरानी राजनीतिक गलती से जोड़ दिया। उनका आरोप है कि कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के दबाव में वंदे मातरम के केवल कुछ हिस्सों को स्वीकार किया था और अब राजनीतिक कारणों से उसी परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस को इसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। बीजेपी के अन्य नेताओं ने भी कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति करने और राष्ट्रगीत को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है।

नाना पटोले ने कहा- बीजेपी देशभक्ति न सिखाए

महाराष्ट्र कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नाना पटोले ने भी बीजेपी के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी को कांग्रेस को देशभक्ति सिखाने की जरूरत नहीं है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी अपने कार्यक्रमों में वही करेगी जो उसका केंद्रीय नेतृत्व तय करेगा। उनके अनुसार, केवल कानून बना देने से कांग्रेस की राजनीतिक परंपरा और कार्यक्रमों की प्रक्रिया नहीं बदली जाएगी। इस बयान ने विवाद को और राजनीतिक बना दिया है और आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच इस मुद्दे पर बयानबाजी बढ़ने की संभावना है।

वंदे मातरम का ऐतिहासिक महत्व

वंदे मातरम की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया था। यह गीत भारत माता की वंदना और देश के प्रति समर्पण की भावना को व्यक्त करता है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इसके इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियां भी सामने आईं। समय के साथ इसके कुछ हिस्सों का सार्वजनिक कार्यक्रमों में अधिक इस्तेमाल होने लगा। कांग्रेस इसी ऐतिहासिक परंपरा का हवाला देते हुए दो पैरा गाने के अपने फैसले को उचित ठहरा रही है।

विवाद आगे भी जारी रहने के आसार

वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच शुरू हुआ विवाद केवल गीत के कितने पैरा गाए जाएं, तक सीमित नहीं है। इसके साथ देशभक्ति, इतिहास, राजनीतिक परंपरा और कानून की व्याख्या जैसे मुद्दे भी जुड़ गए हैं। कांग्रेस जहां अपने पार्टी कार्यक्रमों में दो पैरा की परंपरा जारी रखने की बात कह रही है, वहीं बीजेपी इसे राष्ट्रगीत के सम्मान से जोड़ रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद, राजनीतिक मंचों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में यह मुद्दा और जोर पकड़ सकता है। फिलहाल कांग्रेस ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी कार्यक्रमों में वह लागू नियमों का पालन करेगी, लेकिन पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल दो पैरा ही गाए जाएंगे।

 

 

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