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केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ओडिशा के संबलपुर में ‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य’ थीम के साथ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2025 में योगाभ्यास किया। योग दिवस की शुरुआत और इसकी वैश्विक लोकप्रियता पर एक नजर।
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 21 जून को ओडिशा के संबलपुर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के 11वें संस्करण में हिस्सा लिया। उन्होंने मां समलेश्वरी पीठ और महानदी के किनारे स्थानीय लोगों, छात्रों और विभिन्न संगठनों के साथ योगाभ्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने योग की महत्ता पर जोर देते हुए ‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य’ थीम को वैश्विक स्तर पर फैलाने का संदेश दिया।
संबलपुर में आयोजित योग कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का विशेष योगदान
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि संबलपुर जिला प्रशासन द्वारा इस आयोजन का सफलतापूर्वक आयोजन किया जाना प्रशंसनीय है। उन्होंने स्कूलों, विश्वविद्यालयों, सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवकों के सहयोग को विशेष रूप से सराहा। मंत्री ने सभी को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं, मानसिक शांति और सामाजिक एकता का भी माध्यम है।
योग दिवस की शुरुआत और प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत 2015 में भारत के राजपथ से हुई थी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार इस पहल को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया था। उस वर्ष 84 देशों के लगभग 35,985 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था, और दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाए गए थे — दुनिया की सबसे बड़ी योग कक्षा और सबसे ज्यादा देशों की सहभागिता।
वैश्विक स्तर पर योग दिवस की बढ़ती लोकप्रियता
2015 की सफलता के बाद से योग दिवस की लोकप्रियता दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। 2023 में विश्वभर से लगभग 23.4 करोड़ लोग इस आयोजन में शामिल हुए, जो योग की वैश्विक स्वीकृति और उसकी बढ़ती मान्यता को दर्शाता है। गुजरात के सूरत में भी इस वर्ष बड़ा योग आयोजन हुआ था, जिसमें 1.47 लाख से अधिक लोग शामिल हुए।
योग के माध्यम से स्वास्थ्य और जीवनशैली में सुधार
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस मौके पर सभी से आग्रह किया कि वे योग को अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाएं, क्योंकि योग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है बल्कि मानसिक और भावनात्मक संतुलन भी प्रदान करता है। उन्होंने कहा, “एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य” की यह थीम हमें यह याद दिलाती है कि मानवता और प्रकृति का स्वास्थ्य एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है।
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