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तमिलनाडु वेत्री कड़गम (TVK) ने NEET को पूरी तरह खत्म करने और शिक्षा को समवर्ती सूची से हटाकर राज्य सूची में शामिल करने की मांग की है। जानिए विजय की पार्टी के अंतरिम प्रस्ताव और DMK पर किए गए हमले के बारे में पूरी जानकारी।
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) को लेकर देशभर में जारी विवादों और विरोध प्रदर्शनों के बीच तमिलनाडु की राजनीति में नई गर्माहट देखने को मिल रही है। अभिनेता से नेता बने विजय के नेतृत्व वाली पार्टी तमिलनाडु वेत्री कड़गम (TVK) ने इस पूरे मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए एक कड़ा बयान जारी किया है। TVK का कहना है कि वे केवल NEET परीक्षा में होने वाली धांधलियों, पेपर लीक या अनियमितताओं के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उनका स्पष्ट मानना है कि इस राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाना चाहिए।
पार्टी ने जोर देकर कहा है कि जब तक राज्यों को अपनी चिकित्सा शिक्षा नीति खुद तय करने का अधिकार नहीं मिलेगा, तब तक छात्रों के हितों की रक्षा संभव नहीं है। TVK का यह रुख ऐसे समय में सामने आया है जब दिल्ली से लेकर चेन्नई तक NEET परीक्षा के प्रारूप और इसके निष्पक्ष संचालन को लेकर छात्र सड़कों पर हैं।
शिक्षा को राज्य सूची में वापस शामिल करने की मांग
TVK ने केंद्र और राज्य के बीच अधिकारों के संतुलन को लेकर एक बड़ा संवैधानिक मुद्दा उठाया है। पार्टी के अनुसार, NEET जैसी समस्याओं का एक ही स्थायी समाधान है—शिक्षा को संविधान की समवर्ती सूची (Concurrent List) से हटाकर पुनः राज्य सूची (State List) में शामिल किया जाए।
गौरतलब है कि 1976 के 42वें संविधान संशोधन से पहले शिक्षा राज्य सूची का हिस्सा थी, जिसे बाद में समवर्ती सूची में डाल दिया गया था। TVK का मानना है कि शिक्षा को राज्य सूची में वापस लाने से राज्यों को अपने स्थानीय पाठ्यक्रम, भाषाई जरूरतों और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार चिकित्सा शिक्षा और प्रवेश प्रक्रियाओं को तैयार करने का पूर्ण संवैधानिक अधिकार मिल जाएगा। इससे केंद्रीय परीक्षाओं का वर्चस्व खत्म होगा और क्षेत्रीय छात्रों को न्याय मिल सकेगा।
‘विशेष समवर्ती सूची’ का अंतरिम समाधान
संविधान संशोधन और वैधानिक प्रक्रियाओं में लगने वाले समय को ध्यान में रखते हुए TVK ने एक व्यावहारिक और अंतरिम (Interim) प्रस्ताव भी पेश किया है। पार्टी का कहना है कि यदि शिक्षा को पूरी तरह से राज्य सूची में स्थानांतरित करने में कोई कानूनी या प्रक्रियात्मक बाधाएं आ रही हैं, तो तत्काल प्रभाव से एक ‘विशेष समवर्ती सूची’ (Special Concurrent List) बनाई जानी चाहिए।
इस विशेष व्यवस्था के तहत राज्य सरकारों को अपने राज्य के भीतर सामान्य शिक्षा और विशेष रूप से मेडिकल शिक्षा पर पूर्ण अधिकार दिए जाने चाहिए। जब तक स्थायी समाधान नहीं निकलता, तब तक यह अंतरिम उपाय राज्यों को अपनी प्रवेश नीतियां लागू करने और NEET से छूट पाने की आजादी देगा। TVK ने साफ किया कि उनके नेता विजय पहले ही इस नीतिगत दृष्टिकोण की वकालत कर चुके हैं।
सत्ताधारी DMK पर बिना नाम लिए तीखा हमला
अपने बयान में TVK ने तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) पर भी बिना नाम लिए जोरदार हमला बोला। TVK ने DMK की कार्यशैली को “धोखाधड़ी वाली राजनीति” करार दिया। पार्टी ने कहा कि वे वोट पाने के लिए जनता से झूठे वादे करने या यह दावा करने में विश्वास नहीं रखते कि वे रातों-रात “खुद NEET को खत्म कर देंगे”।
यह हमला सीधे तौर पर DMK के 2021 के चुनावी वादों से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने सत्ता में आने पर राज्य में NEET को समाप्त करने का आश्वासन दिया था। TVK का कहना है कि खोखले दावों के बजाय नीतिगत और संवैधानिक बदलावों के लिए ईमानदारी से संघर्ष करने की जरूरत है।
राजनीतिक बयानबाजी और ‘क्रेडिट’ लेने की होड़ पर सलाह
TVK ने विपक्षी नेताओं और प्रतिद्वंद्वी पार्टियों द्वारा दूसरों के आंदोलनों का श्रेय लेने की होड़ पर भी नाराजगी जताई। पार्टी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो लोग दूसरों की मेहनत, विचारों और संघर्षों पर “अपना लेबल चिपकाने” की अनैतिक राजनीति कर रहे हैं, उन्हें तुरंत TVK को निशाना बनाना बंद कर देना चाहिए।
यह बयान तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन द्वारा की गई उन आलोचनाओं के संदर्भ में आया है, जो रैप सिंगर ‘थेरुक्कुरल’ अरिवु पर हुई पुलिस कार्रवाई के बाद शुरू हुई थीं। गौरतलब है कि गायक अरिवु ने NEET का कड़ा विरोध करते हुए चेन्नई में तमिलनाडु सचिवालय (फोर्ट सेंट जॉर्ज) के बाहर प्रदर्शन किया था, जिसके बाद पुलिस उन्हें ले गई थी। TVK ने स्पष्ट किया कि NEET विरोधी संघर्ष किसी एक पार्टी का पेटेंट नहीं है और इस पर सस्ती राजनीति बंद होनी चाहिए।
निष्कर्ष: शिक्षा पर राज्यों के पूर्ण नियंत्रण की वकालत
कुल मिलाकर, तमिलनाडु वेत्री कड़गम (TVK) ने नीट विवाद के जरिए तमिलनाडु की राजनीति में अपना एक मजबूत और अलग एजेंडा सेट कर दिया है। पार्टी ने न केवल NEET को रद्द करने की मांग दोहराई है, बल्कि चिकित्सा शिक्षा और स्कूली शिक्षा पर राज्यों के पूर्ण नियंत्रण का मुद्दा उठाकर क्षेत्रीय स्वायत्तता (Regional Autonomy) की बहस को फिर से जिंदा कर दिया है। TVK का मानना है कि जब तक राज्यों के पास अपने बच्चों के भविष्य का फैसला करने की पूरी शक्ति नहीं होगी, तब तक छात्रों के साथ न्याय नहीं हो सकता।