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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में जोसेफ विजय ने संभाला कार्यभार। 200 यूनिट मुफ्त बिजली और महिला सुरक्षा बल का ऐलान किया, लेकिन 10 लाख करोड़ के कर्ज ने बढ़ाई सरकार की मुश्किलें।
अभिनेता से राजनेता बने सी. जोसेफ विजय, जिन्हें उनके प्रशंसक प्यार से ‘थलापति’ कहते हैं, ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर भारतीय राजनीति में एक नई पारी की शुरुआत की है। फिल्मों के सुनहरे पर्दे से सत्ता के गलियारों तक का उनका सफर जितना रोमांचक रहा है, मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठकर चुनावी वादों को धरातल पर उतारने की चुनौती उतनी ही जटिल नजर आ रही है। विजय के सामने न केवल अपनी छवि को बनाए रखने की चुनौती है, बल्कि राज्य की जर्जर आर्थिक स्थिति के बीच जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने का भारी दबाव भी है।
मुफ्त बिजली योजना और शर्तों का विवाद
पदभार संभालते ही मुख्यमंत्री विजय ने अपना पहला बड़ा फैसला 200 यूनिट मुफ्त बिजली को लेकर लिया। हालांकि, इस घोषणा के साथ जुड़ी ‘शर्त’ ने राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। सरकार के आदेश के अनुसार, मुफ्त बिजली का लाभ केवल उन्हीं घरेलू उपभोक्ताओं को मिलेगा जिनका दो महीने का कुल बिलिंग चक्र 500 यूनिट से कम है। आलोचकों का तर्क है कि चुनाव प्रचार के दौरान विजय ने बिना किसी शर्त के सभी को मुफ्त बिजली देने का वादा किया था, लेकिन अब आर्थिक तंगी के कारण सरकार को पीछे हटना पड़ रहा है।
महिला सुरक्षा और नशा मुक्ति पर कड़ा प्रहार
मुख्यमंत्री ने राज्य में कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता बताया है। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा के लिए ‘सिंगा पेन सिरप्पु अथिराडी पदाई’ (शेरनी विशेष त्वरित बल) नामक एक विशेष टास्क फोर्स के गठन का आदेश दिया है। यह बल विशेष रूप से महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर त्वरित कार्रवाई करेगा। इसके साथ ही, तमिलनाडु को नशा मुक्त बनाने के उद्देश्य से 65 मादक पदार्थ रोधी कार्य बल (Anti-Drug Task Force) इकाइयों की स्थापना का ऐलान किया गया है, जो युवाओं को नशे के जाल से बचाने की दिशा में काम करेंगी।
आर्थिक संकट: 10 लाख करोड़ का कर्ज और खाली खजाना
विजय की राह में सबसे बड़ा रोड़ा तमिलनाडु की वर्तमान वित्तीय स्थिति है। मुख्यमंत्री ने स्वयं स्वीकार किया है कि राज्य सरकार इस समय 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज के नीचे दबी हुई है और सरकारी खजाना लगभग खाली है। ऐसी स्थिति में, लोकलुभावन वादों को लागू करना किसी वित्तीय जादूगरी से कम नहीं होगा। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि राज्य को अपनी आय बढ़ाने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे, अन्यथा कल्याणकारी योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह सकती हैं।
महत्वाकांक्षी योजनाएं: सोना, नकद और मुफ्त सिलेंडर
विजय के घोषणापत्र में कुछ ऐसी योजनाएं शामिल हैं जिनका सीधा वित्तीय प्रभाव राज्य के बजट पर पड़ेगा। इनमें से प्रमुख हैं:
- मासिक सहायता: 60 वर्ष से कम आयु की महिलाओं को 2,500 रुपये की मासिक वित्तीय सहायता।
- विवाह सहायता: गरीब दुल्हनों के लिए 8 ग्राम सोना (लगभग 1.13 लाख रुपये मूल्य) और उच्च गुणवत्ता वाली रेशमी साड़ियाँ।
- रसोई गैस: प्रति परिवार प्रति वर्ष छह मुफ्त गैस सिलेंडर।
- स्वयं सहायता समूह: महिलाओं द्वारा संचालित समूहों के लिए 5 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण।
नवजात शिशुओं के लिए ‘मामा का आशीर्वाद’
तमिलनाडु की सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ते हुए विजय ने ‘थाई ममन थंगा मोथिरम थिट्टम’ (मामा की सोने की अंगूठी योजना) शुरू करने का वादा किया है। इसके तहत राज्य में जन्म लेने वाले हर बच्चे को सरकार की ओर से सोने की एक अंगूठी और एक ‘बेबी वेलकम किट’ दी जाएगी, जिसमें शिशुओं के कपड़े और पोषण संबंधी सामग्री होगी। यह योजना भावनात्मक रूप से जनता को जोड़ने की एक बड़ी कोशिश मानी जा रही है।
वादे बनाम हकीकत
मुख्यमंत्री विजय के लिए ‘थलापति’ की रील लाइफ इमेज से निकलकर रियल लाइफ में एक कुशल प्रशासक साबित होना अब उनकी सबसे बड़ी परीक्षा है। एक तरफ जनता की बढ़ती उम्मीदें हैं और दूसरी तरफ खाली खजाना। यदि वह इन वित्तीय बाधाओं को पार करते हुए अपने वादे पूरे करने में सफल रहते हैं, तो वह तमिलनाडु की राजनीति में एक अमिट छाप छोड़ सकते हैं। हालांकि, आने वाले समय में उनकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह राज्य के राजस्व और जनकल्याणकारी योजनाओं के बीच संतुलन कैसे बैठाते हैं।