तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। उन्होंने कावेरी जल विवाद, मछुआरों की रिहाई और बुनियादी ढांचा विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को केंद्र के समक्ष उठाया।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने हाल ही में नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। अप्रैल में हुए विधानसभा चुनावों में अपनी पार्टी टीवीके (TVK) की ऐतिहासिक जीत के बाद मुख्यमंत्री के रूप में यह उनकी पहली आधिकारिक दिल्ली यात्रा थी। इस बैठक में तमिलनाडु से जुड़े कई संवेदनशील और विकासात्मक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई, जिसमें कावेरी जल विवाद, मछुआरों की गिरफ्तारी और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े विषय प्रमुख रहे।
‘तमिल थाई वाजथु’ का सम्मान और सांस्कृतिक परंपरा
मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री को एक पत्र सौंपकर सरकारी कार्यक्रमों में ‘तमिल थाई वाजथु’ (तमिल मातृ वंदना) के गायन क्रम को लेकर उत्पन्न विवाद पर चिंता व्यक्त की। राज्य में यह चर्चा तब शुरू हुई जब शपथ ग्रहण समारोहों के दौरान इस गीत को राष्ट्रगान और ‘वंदे मातरम’ के बाद बजाया गया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु हमेशा राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत का सर्वोच्च सम्मान करता है, लेकिन राज्य में दशकों से आधिकारिक कार्यक्रमों की शुरुआत ‘तमिल थाई वाजथु’ से करने की परंपरा रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि वे गृह मंत्रालय के पुराने आदेश में स्पष्टीकरण जारी करें, ताकि राज्यों को उनके गौरवशाली सांस्कृतिक प्रतीक—’तमिल थाई वाजथु’ को कार्यक्रमों के प्रारंभ में गाने की अनुमति बनी रहे।
कावेरी जल विवाद और मेकेदातु बांध परियोजना
बैठक का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा कावेरी नदी पर कर्नाटक द्वारा प्रस्तावित ‘मेकेदातु’ बांध परियोजना का विरोध था। मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री के समक्ष कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह परियोजना कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के फैसले और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन है। उन्होंने केंद्र से मांग की कि जल शक्ति मंत्रालय और केंद्रीय जल आयोग को निर्देश दिया जाए कि जब तक कावेरी बेसिन के सभी हितधारक राज्यों—तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी—की सहमति न हो, तब तक इस परियोजना को मंजूरी न दी जाए। यह मुद्दा तमिलनाडु के किसानों की आजीविका और जल सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिस पर राज्य सरकार कोई समझौता करने के मूड में नहीं है।
मछुआरों की सुरक्षा और राजनयिक हस्तक्षेप
मुख्यमंत्री ने श्रीलंका द्वारा तमिलनाडु के मछुआरों की लगातार गिरफ्तारी का मुद्दा भी पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अब तक 12 बार गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, और वर्तमान में 58 मछुआरे श्रीलंकाई जेलों में बंद हैं, जबकि उनकी 266 नौकाएं भी जब्त कर ली गई हैं। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि केंद्र सरकार राजनयिक स्तर पर हस्तक्षेप करे ताकि मछुआरों की रिहाई सुनिश्चित हो सके और उनकी आजीविका का साधन बनी नौकाएं वापस मिल सकें।
बुनियादी ढांचा विकास और वित्त मंत्री के साथ बैठक
अपनी दिल्ली यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी मुलाकात की। इस बैठक का मुख्य केंद्र तमिलनाडु में बुनियादी ढांचे को गति प्रदान करना था। मुख्यमंत्री ने राज्य के बंदरगाहों, रेलवे परियोजनाओं, राष्ट्रीय राजमार्गों और औद्योगिक गलियारों के लिए प्राथमिकता के आधार पर केंद्रीय निधि की मांग की। उन्होंने कोयंबटूर, मदुरै और इरोड जैसे प्रमुख आर्थिक केंद्रों में मेट्रो रेल विस्तार के लिए वित्तीय सहायता पर जोर दिया। इन शहरों को राज्य के विकास इंजन बताते हुए उन्होंने कहा कि शहरी परिवहन के आधुनिकीकरण से औद्योगिक विकास को नई रफ्तार मिलेगी।
रक्षा और अनुसंधान क्षेत्र में तमिलनाडु की भूमिका
विकासात्मक प्राथमिकताओं के अलावा, मुख्यमंत्री ने रक्षा क्षेत्र में भी राज्य की भागीदारी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने ‘सेंटर फॉर एयरबॉर्न सिस्टम्स’ (CABS) को तमिलनाडु में स्थापित करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस संबंध में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के साथ प्रारंभिक चर्चा हो चुकी है, जिसमें ‘एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट’ (AMCA) के डिजाइन और विकास केंद्र को भी तमिलनाडु में स्थापित करने की बात शामिल है।
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की यह यात्रा केंद्र और राज्य के बीच एक रचनात्मक संवाद की शुरुआत मानी जा रही है। उन्होंने एक ओर जहां राज्य की सांस्कृतिक पहचान और किसानों के अधिकारों (कावेरी जल) के लिए अपनी प्रतिबद्धता दिखाई, वहीं दूसरी ओर तमिलनाडु के भविष्य को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए केंद्र के साथ मिलकर काम करने की इच्छा भी स्पष्ट की। प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के साथ हुई यह सकारात्मक बैठक तमिलनाडु के लिए विकास के एक नए युग का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।