वाइस एडमिरल कोचड़ ने संभाला वाइस चीफ ऑफ नेवल स्टाफ का कार्यभार: राष्ट्र सेवा में समर्पित एक गौरवशाली सफर

वाइस एडमिरल कोचड़ ने संभाला वाइस चीफ ऑफ नेवल स्टाफ का कार्यभार: राष्ट्र सेवा में समर्पित एक गौरवशाली सफर

वाइस एडमिरल कोचड़ ने वाइस चीफ ऑफ नेवल स्टाफ (VCNS) के रूप में पदभार संभाला। जानिए उनके करियर, उपलब्धियों और विशिष्ट सेवा पदकों के बारे में।

भारतीय नौसेना के इतिहास में एक महत्वपूर्ण बदलाव के साथ, वाइस एडमिरल कोचड़ ने वाइस चीफ ऑफ नेवल स्टाफ (VCNS) का पदभार ग्रहण कर लिया है। इस गरिमामयी पद को संभालने के तुरंत बाद, उन्होंने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (National War Memorial) पर जाकर उन वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति दी। उनके साथ निवर्तमान वीसीएनएस, वाइस एडमिरल वत्सयन भी उपस्थित थे, जिन्होंने स्मारक पर पुष्प अर्पित कर शहीदों को नमन किया। यह अवसर न केवल एक नए नेतृत्व के आगमन का प्रतीक है, बल्कि भारतीय नौसेना की परंपराओं और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण को भी दर्शाता है।

एक शानदार सैन्य करियर की शुरुआत

पुणे के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के पूर्व छात्र रहे वाइस एडमिरल कोचड़ का करियर उपलब्धियों से भरा रहा है। 1 जुलाई 1988 को भारतीय नौसेना में कमीशन प्राप्त करने वाले एडमिरल कोचड़ ‘गनरी’ और ‘मिसाइल सिस्टम’ के विशेषज्ञ माने जाते हैं। अपने 37 वर्षों से अधिक के लंबे और गौरवशाली करियर में, उन्होंने कई चुनौतीपूर्ण परिचालन, कमांड और स्टाफ नियुक्तियों को बखूबी निभाया है।

युद्धपोतों की कमान और तकनीकी दक्षता

वाइस एडमिरल कोचड़ का नौसैनिक करियर कई महत्वपूर्ण युद्धपोतों की कमान संभालने के कारण उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने आईएनएस नाशक, आईएनएस विभूति और आईएनएस कृपाण जैसे युद्धपोतों का नेतृत्व किया है। उनकी कमान संभालने की क्षमता का सबसे बड़ा प्रमाण तब मिला जब उन्होंने फ्रिगेट आईएनएस त्रिकंद के कमीशनिंग कमांडिंग ऑफिसर के रूप में कार्यभार संभाला। इसके अलावा, उन्होंने भारत के विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य की कमान संभाली, जहाँ उन्होंने इसके एयर विंग के सफल एकीकरण और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

शिक्षा और रणनीतिक अनुभव

नौसेना में रणनीतिक दक्षता बढ़ाने के लिए वाइस एडमिरल कोचड़ ने दुनिया के सर्वश्रेष्ठ रक्षा संस्थानों से शिक्षा प्राप्त की है। वे डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, नेवल वॉर कॉलेज और रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज के स्नातक हैं। इन संस्थानों में प्राप्त उनके ज्ञान और अनुभव ने उन्हें नौसेना मुख्यालय में महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले लेने में सक्षम बनाया। उन्होंने नौसेना योजना निदेशालय में संयुक्त निदेशक, स्टाफ आवश्यकताओं के निदेशक और प्रिंसिपल डायरेक्टर डीएसटी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहकर नौसेना की रणनीतिक नींव को मजबूत किया है।

‘फ्लैग रैंक’ के बाद की उपलब्धियां

वर्ष 2018 में फ्लैग रैंक पर पदोन्नत होने के बाद, वाइस एडमिरल कोचड़ की जिम्मेदारियां और अधिक व्यापक हो गईं। उन्होंने ‘कैरियर प्रोजेक्ट्स’ और ‘युद्धपोत उत्पादन एवं अधिग्रहण’ के सहायक नियंत्रक के रूप में कार्य करते हुए नौसेना के आधुनिकीकरण में योगदान दिया। वर्ष 2021 में उन्होंने पश्चिमी बेड़े की कमान संभाली, जो उनके करियर का एक अत्यंत सक्रिय दौर रहा। इसके बाद, उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के कमांडेंट के रूप में भविष्य के सैन्य अधिकारियों को प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई।

समुद्री सुरक्षा में नेतृत्व

25 मई 2024 को, जब समुद्री सुरक्षा का माहौल काफी चुनौतीपूर्ण था, उन्होंने पश्चिमी नौसेना कमान के चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में कार्यभार संभाला। इस दौरान उन्होंने पश्चिमी तट पर पारंपरिक और गैर-पारंपरिक दोनों तरह के खतरों का डटकर मुकाबला किया। विशेष रूप से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उनके नेतृत्व की सराहना की गई, जिसने समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में नौसेना की मजबूती को सिद्ध किया।

वीरता और विशिष्ट सेवा का सम्मान

वाइस एडमिरल कोचड़ को उनकी निस्वार्थ सेवा और असाधारण नेतृत्व के लिए देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मानों से नवाजा गया है। उन्हें 2022 में अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) और वर्ष 2026 में परम विशिष्ट सेवा पदक (PVSM) प्रदान किया गया। यह सम्मान उनकी कर्तव्यनिष्ठा और देश के प्रति उनके समर्पण का प्रमाण है।

वाइस चीफ ऑफ नेवल स्टाफ के रूप में उनका कार्यभार ग्रहण करना भारतीय नौसेना के लिए एक नए युग की शुरुआत है। अपनी दूरदर्शिता, युद्ध कौशल और रणनीतिक अनुभव के साथ, वाइस एडमिरल कोचड़ भारतीय नौसेना को भविष्य की चुनौतियों के लिए और अधिक सक्षम बनाने की दिशा में निरंतर अग्रसर रहेंगे। राष्ट्र का हर नागरिक उनके नेतृत्व में नौसेना की सुरक्षा और शक्ति को लेकर आश्वस्त है।

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