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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अपनी कैबिनेट का विस्तार किया। राजेश कुमार और पी. विश्वनाथन ने मंत्री पद की शपथ ली। जानिए सरकार की नई संरचना के बारे में।
तमिलनाडु की राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ गया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने अपनी कैबिनेट का विस्तार करते हुए दो नए मंत्रियों—राजेश कुमार और पी. विश्वनाथन को शपथ दिलाई। चेन्नई के लोक भवन में आयोजित इस गरिमापूर्ण समारोह में तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस विस्तार के साथ ही मुख्यमंत्री विजय की मंत्रिपरिषद की कुल संख्या 33 तक पहुंच गई है, जबकि कैबिनेट की कुल क्षमता 35 निर्धारित है।
कैबिनेट विस्तार और गठबंधन की मजबूती
यह विस्तार मुख्यमंत्री विजय द्वारा राज्यपाल को सौंपी गई उस सिफारिश के बाद हुआ है, जिसमें 23 विधायकों को मंत्रिपरिषद में शामिल करने का प्रस्ताव था। मौजूदा संरचना पर नजर डालें तो मंत्रिपरिषद में तमिलनाडु वेत्री कजगम (TVK) के 21 विधायक और कांग्रेस के दो विधायक शामिल हैं। मुख्यमंत्री विजय और उनके नौ सहयोगियों ने 10 मई को जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में शपथ ली थी।
यह कैबिनेट विस्तार न केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि राजनीतिक रूप से भी यह गठबंधन की स्थिरता को दर्शाता है। कांग्रेस नेताओं ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे एक “धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील सरकार” के गठन की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि यह जनादेश एक गठबंधन सरकार के लिए है, जहाँ सभी सहयोगी दलों को उचित प्रतिनिधित्व मिले। तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के. सेल्वापेरुंथगाई ने इस मौके पर राजीव गांधी को याद करते हुए पार्टी के गठबंधन धर्म को निभाने की प्रतिबद्धता जताई।
‘एक परिवार’ की तरह काम करने का विजन
कैबिनेट विस्तार के पीछे की सोच को स्पष्ट करते हुए तमिलनाडु के मंत्री आदाव अर्जुन ने कहा कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय का स्पष्ट विजन है कि राज्य मंत्रिमंडल “एक परिवार” की तरह कार्य करे। मुख्यमंत्री का मानना है कि सरकार को समर्थन देने वाले सभी सहयोगी दलों को कैबिनेट में उचित भागीदारी मिलनी चाहिए, ताकि राज्य के विकास कार्यों में सभी की सहभागिता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में कैबिनेट का और विस्तार किया जा सकता है, ताकि गठबंधन के अन्य साथियों को भी जगह मिल सके।
2026 के चुनावी इतिहास और विजय का उदय
2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव राज्य के राजनीतिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुए। अपनी पहली ही राजनीतिक पारी में ‘थलापति’ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके (TVK) ने 234 में से 108 सीटें जीतकर शानदार प्रदर्शन किया। यह पहली बार था जब राज्य में दशकों से कायम दोनों प्रमुख ‘द्रविड़’ दलों को सत्ता से बाहर का रास्ता देखना पड़ा।
हालाँकि, टीवीके अपने दम पर बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुँच सकी थी। ऐसे में कांग्रेस (5), सीपीआई-एम (2), सीपीआई (2), वीसीके (2) और आईयूएमएल (2) जैसे दलों ने विजय को समर्थन देने का फैसला किया। यह वे दल थे जो पहले द्रमुक (DMK) के नेतृत्व वाले ‘सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस’ का हिस्सा थे। विजय की जीत को राजनीतिक विश्लेषक एम.जी. रामचंद्रन (MGR) के दौर से तुलना कर रहे हैं, जो अभिनय से राजनीति में आए थे और जिन्होंने जनसमर्थन के नए रिकॉर्ड बनाए थे।
सामाजिक कार्यकर्ता से राजनेता तक का सफर
विजय का राजनीति में आना अचानक नहीं था। भले ही उन्होंने 2024 में औपचारिक रूप से टीवीके पार्टी लॉन्च की, लेकिन वर्षों से वे एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय थे। उनकी फिल्मों ने भी परोक्ष रूप से उन्हें एक राजनेता की छवि दी, क्योंकि उनकी पटकथाओं में भ्रष्टाचार, नशीली दवाओं का खतरा और सामाजिक कुरीतियों जैसे ज्वलंत मुद्दे प्रमुखता से शामिल होते थे। 2009 से ही उनके राजनीति में प्रवेश को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन उन्होंने अपनी जमीनी पकड़ मजबूत करने के लिए सामाजिक कार्यों को प्राथमिकता दी।
भविष्य की राह और चुनौतियां
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपने “एक परिवार” वाले विजन को धरातल पर उतारने की है। गठबंधन की सरकारें अक्सर समन्वय के अभाव में संकट में आती हैं, लेकिन जिस तरह से उन्होंने शुरुआत में ही सभी प्रमुख सहयोगियों को शामिल करने की पहल की है, वह उनकी परिपक्वता को दर्शाता है।
आने वाले समय में, राज्य की अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे और जनकल्याणकारी योजनाओं को गति देना उनकी प्राथमिकता होगी। तमिलनाडु की जनता ने उन्हें जो भारी जनादेश दिया है, वह बदलाव की चाहत का प्रतीक है। ‘थलापति’ विजय के लिए यह सरकार केवल सत्ता का केंद्र नहीं, बल्कि राज्य के खोए हुए गौरव को पुनः प्राप्त करने और एक नया “रंगला तमिलनाडु” (सभ्य और विकसित तमिलनाडु) बनाने का मिशन है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कैसे वे अपनी इन शुरुआती सफलताओं को लंबे समय तक टिकाऊ और प्रभावशाली प्रशासनिक मॉडल में बदलते हैं।