मनोज सोरथिया : सूरत में AAP का सूपड़ा साफ: वार्ड नंबर 4 में भाजपा का परचम, दिग्गज नेता मनोज सोरथिया को मिली करारी शिकस्त

मनोज सोरथिया : सूरत में AAP का सूपड़ा साफ: वार्ड नंबर 4 में भाजपा का परचम, दिग्गज नेता मनोज सोरथिया को मिली करारी शिकस्त

मनोज सोरथिया : सूरत नगर निगम चुनाव 2026 में भाजपा की बड़ी जीत! वार्ड नंबर 4 में आम आदमी पार्टी का सफाया, दिग्गज नेता मनोज सोरथिया हारे। जानें सूरत निकाय चुनाव के पूरे नतीजे

गुजरात स्थानीय निकाय चुनाव 2026 के नतीजों ने सूरत में बड़ा राजनीतिक उलटफेर कर दिया है। पिछले नगर निगम चुनाव में ‘किंगमेकर’ बनकर उभरी आम आदमी पार्टी (AAP) को इस बार मतदाताओं ने पूरी तरह नकार दिया है। सूरत नगर निगम के 120 वार्डों में से सबसे अधिक चर्चा वार्ड नंबर 4 की हो रही है, जहाँ भाजपा ने क्लीन स्वीप करते हुए आम आदमी पार्टी के गढ़ को ढहा दिया है। इस वार्ड से ‘आप’ के दिग्गज नेता और प्रदेश संगठन महामंत्री मनोज सोरथिया को भी हार का सामना करना पड़ा है।

वार्ड नंबर 4 में भाजपा का दबदबा, AAP का सफाया

मतगणना के शुरुआती रुझानों से ही सूरत में भाजपा की बढ़त दिखाई देने लगी थी, लेकिन वार्ड नंबर 4 के नतीजों ने सभी को चौंका दिया। इस वार्ड की सभी चार सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों ने भारी बहुमत से जीत दर्ज की है। पिछली बार इस क्षेत्र में आम आदमी पार्टी का जबरदस्त प्रभाव था, लेकिन इस बार ‘आप’ के उम्मीदवार अपनी साख बचाने में भी नाकाम रहे। वार्ड नंबर 4 में भाजपा की इस प्रचंड जीत ने निगम में पार्टी की स्थिति को और अधिक मजबूत कर दिया है।

मनोज सोरथिया की हार: ‘आप’ के लिए बड़ा झटका

आम आदमी पार्टी के लिए सबसे बड़ा झटका उनके स्टार उम्मीदवार मनोज सोरथिया की हार है। मनोज सोरथिया न केवल सूरत में बल्कि पूरे गुजरात में पार्टी का एक प्रमुख चेहरा माने जाते हैं। वार्ड नंबर 4 से उनकी हार यह दर्शाती है कि सूरत के मतदाताओं का मूड इस बार पूरी तरह बदल चुका है। मतदान के बाद से ही उम्मीदवारों के बीच जीत-हार को लेकर जो चिंता देखी जा रही थी, वह नतीजों के बाद ‘आप’ खेमे में मायूसी में बदल गई है।

सूरत में सत्ता समीकरण का बदलाव

सूरत नगर निगम, जिसे कभी आम आदमी पार्टी के गुजरात मॉडल की प्रयोगशाला कहा जाता था, वहां अब भाजपा ने एकतरफा कब्जा कर लिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछली बार की तुलना में इस बार भाजपा की संगठनात्मक शक्ति और स्थानीय मुद्दों पर पकड़ ने ‘आप’ के वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाई है। जहाँ पिछली बार ‘आप’ ने कांग्रेस को शून्य पर समेटते हुए मुख्य विपक्षी दल की जगह ली थी, वहीं इस बार भाजपा की लहर में वह खुद भी सिमटती नजर आ रही है।

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