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सुप्रीम कोर्ट ने तीस्ता सीतलवाड़ की पासपोर्ट रिलीज की याचिका का निपटारा कर दिया है। अदालत ने कहा कि विदेश यात्रा का कार्यक्रम तय होने पर ही पासपोर्ट वापसी के लिए नई अर्जी दी जा सकती है।
पासपोर्ट वापसी की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने की डिस्पोज
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ की उस याचिका का निपटारा (Dispose) कर दिया, जिसमें उन्होंने अपना पासपोर्ट वापस मांगे जाने की गुहार लगाई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि सीतलवाड़ का पासपोर्ट फिलहाल वापस नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता, न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता तब नई अर्जी दाखिल कर सकती हैं जब उनकी विदेश यात्रा का पूरा कार्यक्रम (Itinerary) तय हो जाए। अदालत ने साफ तौर पर कहा कि बिना किसी ठोस यात्रा कार्यक्रम के पासपोर्ट इस तरह वापस नहीं लौटाया जा सकता।
अदालत की सख्त टिप्पणी: “पासपोर्ट वापस लेने के लिए आधार बताना जरूरी”
सुनवाई के दौरान जब तीस्ता सीतलवाड़ की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल पेश हुए, तो पीठ ने उनसे सवाल किया, “क्या आपकी जल्द ही कहीं बाहर जाने की योजना है? जैसे ही आप अपना यात्रा कार्यक्रम तय कर लें, हमें बताएं।” पीठ ने आगे कहा कि विदेश यात्रा के लिए पासपोर्ट वापस पाने हेतु एक ठोस आधार बनाना होगा। अदालत को यह बताना होगा कि आप किस देश की यात्रा करना चाहती हैं और कब। कपिल सिब्बल ने दलील दी कि सीतलवाड़ को विदेश यात्रा के लिए पहले ही अदालत की अनुमति की आवश्यकता होती है, जिस पर पीठ ने दोहराया कि आवश्यकता पड़ने पर वह फिर से आवेदन करने के लिए स्वतंत्र हैं।
2002 दंगा मामलों में दस्तावेजों की कथित जालसाजी का मामला
यह मामला 2002 के गोधरा कांड के बाद हुए दंगों में निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए दस्तावेजों की कथित जालसाजी से जुड़ा है। तीस्ता सीतलवाड़ को 19 जुलाई, 2023 को शीर्ष अदालत ने नियमित जमानत दी थी। उस समय जमानत की शर्तों में से एक शर्त यह थी कि उनका पासपोर्ट सत्र न्यायालय की कस्टडी में रहेगा। पिछले साल गुजरात हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने “विकृत” और “विरोधाभासी” बताते हुए रद्द कर दिया था। शीर्ष अदालत ने तब माना था कि चूंकि चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और अधिकांश सबूत दस्तावेजी हैं, इसलिए उन्हें हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है।
पृष्ठभूमि: जाकिया जाफरी और एसआईटी जांच
तीस्ता सीतलवाड़ के खिलाफ एफआईआर 24 जून, 2022 को सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद दर्ज की गई थी। यह फैसला जाकिया जाफरी की याचिका पर आया था, जिन्होंने 2002 के दंगों के पीछे एक बड़ी साजिश का आरोप लगाया था। जाकिया जाफरी पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी की विधवा हैं, जिनकी गुलबर्ग हाउसिंग सोसाइटी दंगों के दौरान हत्या कर दी गई थी। जाफरी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल (SIT) की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था। इसी के बाद सीतलवाड़ और अन्य पर कानूनी कार्रवाई शुरू हुई थी।