सशस्त्र बल न्यायाधिकरण में रिक्तियों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; केंद्र से पूछा- क्यों खाली हैं 11 में से 8 बेंच?

सशस्त्र बल न्यायाधिकरण में रिक्तियों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; केंद्र से पूछा- क्यों खाली हैं 11 में से 8 बेंच?

सुप्रीम कोर्ट ने सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) में खाली पदों को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में दावा किया गया है कि नियुक्तियां न होने से साल के अंत तक 11 में से केवल 3 बेंच ही काम कर पाएंगी।

न्यायाधिकरण में बढ़ता संकट: ठप हो सकते हैं 11 में से 8 बेंच

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (Armed Forces Tribunal – AFT) में खाली पड़े पदों को समय पर भरने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की। याचिकाकर्ता ‘आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल बार एसोसिएशन (रीजनल बेंच)’ ने अदालत को अवगत कराया कि यदि रिक्तियों को जल्द नहीं भरा गया, तो साल के अंत तक न्यायाधिकरण की 11 में से केवल तीन बेंच ही कार्यात्मक रह पाएंगी। यह स्थिति सैन्य कर्मियों और दिग्गजों के लिए न्याय की प्रक्रिया को पूरी तरह से बाधित कर सकती है, जो पहले से ही अपने मामलों के निपटारे के लिए लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं।

कानूनी प्रक्रिया और अटॉर्नी जनरल से सहयोग की अपील

सुनवाई के दौरान, पीठ ने भारत के महान्यायवादी (Attorney General) आर. वेंकटरमणी से इस मामले में अदालत की सहायता करने का अनुरोध किया है। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील को निर्देश दिया कि वे याचिका की एक प्रति महान्यायवादी के कार्यालय को सौंपें ताकि सरकार इस पर अपना रुख स्पष्ट कर सके। याचिका में मुख्य रूप से सशस्त्र बल न्यायाधिकरण अधिनियम, 2007 की धारा 5 का हवाला दिया गया है, जो न्यायाधिकरण की संरचना और इसके बेंचों के गठन को नियंत्रित करती है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि सरकार को चयन प्रक्रिया को पूरा करने और सभी रिक्त पदों को समयबद्ध तरीके से भरने के लिए निर्देश दिया जाना चाहिए ताकि न्यायिक व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके।

न्याय में देरी और भविष्य की चुनौतियां

सशस्त्र बल न्यायाधिकरण सैन्य कर्मियों के सेवा संबंधी मामलों और कोर्ट-मार्शल अपीलों के निपटारे के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है। बेंचों के कार्यात्मक न रहने का सीधा अर्थ है कि हजारों लंबित मामलों का बोझ और बढ़ जाएगा। याचिका में कहा गया है कि न्यायाधिकरण की दक्षता बनाए रखने के लिए सदस्यों की तत्काल नियुक्ति अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट ने अब इस मामले को दो सप्ताह बाद अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। उम्मीद की जा रही है कि अगली सुनवाई तक केंद्र सरकार रिक्तियों को भरने की अपनी कार्ययोजना अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेगी, जिससे देश की सुरक्षा सेवा से जुड़े लोगों को त्वरित न्याय मिलने की उम्मीद जगेगी।

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