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सुनील गावस्कर ने पुरुष टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में एसोसिएट देशों के रिकॉर्ड्स पर सवाल उठाए हैं। जानें उन्होंने अलग श्रेणियां बनाने और न्यूनतम मानक तय करने का सुझाव क्यों दिया।
क्रिकेट में रिकॉर्ड बनाना हर खिलाड़ी और टीम का सपना होता है, लेकिन क्या सभी रिकॉर्ड को एक ही नजरिए से देखा जाना चाहिए? भारतीय क्रिकेट के दिग्गज सुनील गावस्कर ने पुरुष टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में बनाए जा रहे कुछ रिकॉर्ड्स पर सवाल उठाकर इस बहस को फिर से हवा दे दी है। उनका मानना है कि एसोसिएट देशों के बीच खेले जाने वाले मुकाबलों में बने रिकॉर्ड और पूर्ण सदस्य देशों के बीच हुए मैचों के आंकड़ों को एक ही श्रेणी में रखना उचित नहीं हो सकता। गावस्कर ने सुझाव दिया है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी आईसीसी को इन रिकॉर्ड्स के लिए कुछ न्यूनतम मानक तय करने या अलग-अलग श्रेणियां बनाने पर विचार करना चाहिए।
टी20 इंटरनेशनल में रिकॉर्ड्स की हो रही है चर्चा
पुरुष टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में कई ऐसे रिकॉर्ड दर्ज हैं, जो पहली नजर में हैरान कर देते हैं। जिम्बाब्वे ने गाम्बिया के खिलाफ 344 रन का विशाल स्कोर बनाया था। इसी मुकाबले में जिम्बाब्वे ने 290 रन से जीत दर्ज की, जो पुरुष टी20 इंटरनेशनल में रनों के अंतर से सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड है। दूसरी ओर, आइवरी कोस्ट की टीम एक मुकाबले में सिर्फ 7 रन पर ऑलआउट हो गई थी। यह पुरुष टी20 इंटरनेशनल इतिहास का सबसे कम स्कोर है।
इसी तरह, स्पेन की टीम ने फरवरी 2023 से अगस्त 2026 के बीच लगातार 24 टी20 इंटरनेशनल मुकाबले जीतकर रिकॉर्ड बनाया। भूटान के सोनम येशे ने म्यांमार के खिलाफ सिर्फ 7 रन देकर 8 विकेट हासिल किए, जो इस प्रारूप के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शनों में शामिल है। इन उपलब्धियों ने छोटे क्रिकेटिंग देशों को सुर्खियों में ला दिया है, लेकिन गावस्कर का सवाल है कि क्या इन रिकॉर्ड्स की तुलना उन मुकाबलों से की जानी चाहिए, जिनमें भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड या अन्य मजबूत क्रिकेटिंग देशों के खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं।
सुनील गावस्कर ने क्या कहा?
सुनील गावस्कर ने अपने कॉलम में स्पष्ट किया कि वह एसोसिएट देशों के बीच होने वाले मुकाबलों को अंतरराष्ट्रीय मैच कहे जाने के खिलाफ नहीं हैं। उनकी चिंता यह है कि जब टीमों के बीच खेल के स्तर में काफी अंतर होता है, तो ऐसे मैचों में बनाए गए रिकॉर्ड को सभी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के रिकॉर्ड के बराबर दर्ज करना कितना उचित है।
गावस्कर के मुताबिक, आईसीसी को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और रिकॉर्ड दर्ज करने के लिए कुछ न्यूनतम मानक तय करने चाहिए। उनका मानना है कि ऐसा करने से रिकॉर्ड्स की अहमियत और उनके संदर्भ को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जब कोई टीम बेहद कम स्कोर पर आउट होती है, तो गेंदबाज के आंकड़े असाधारण नजर आ सकते हैं। लेकिन यदि मुकाबला कमजोर टीम के खिलाफ खेला गया हो, तो उन आंकड़ों की तुलना शीर्ष अंतरराष्ट्रीय टीमों के बीच हुए मुकाबलों से करना सवाल खड़े कर सकता है।
फुटबॉल की तरह अलग-अलग डिवीजन बनाने का सुझाव
गावस्कर ने इस समस्या के समाधान के लिए फुटबॉल लीग का उदाहरण दिया। फुटबॉल में अलग-अलग डिवीजन होते हैं और टीमों के प्रदर्शन के आधार पर उनका प्रमोशन या रेलिगेशन हो सकता है। वहां रिकॉर्ड भी उस डिवीजन के संदर्भ में देखे जाते हैं, जिसमें वे बनाए गए हों।
इसी तरह गावस्कर ने सुझाव दिया कि क्रिकेट में भी एसोसिएट देशों के लिए अलग-अलग श्रेणियों पर विचार किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर, कुछ मुकाबलों को डिवीजन ए इंटरनेशनल और कुछ को डिवीजन बी इंटरनेशनल जैसी श्रेणियों में रखा जा सकता है। इससे रिकॉर्ड देखने वाले दर्शकों को यह समझने में आसानी होगी कि कोई उपलब्धि किस स्तर के मुकाबले में हासिल की गई थी।
उनके अनुसार, पूर्ण सदस्य देशों और विश्व कप के लिए क्वालिफाई करने वाले एसोसिएट देशों के बीच खेले गए मैचों को अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के रूप में दर्ज किया जा सकता है, जबकि अन्य मुकाबलों के लिए अलग वर्गीकरण पर विचार किया जा सकता है।
युवराज सिंह और दीपेंद्र सिंह ऐरी का रिकॉर्ड भी चर्चा में
इस बहस के केंद्र में पुरुष टी20 इंटरनेशनल में सबसे तेज अर्धशतक का रिकॉर्ड भी है। भारत के पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह ने 2007 टी20 विश्व कप में इंग्लैंड के खिलाफ सिर्फ 12 गेंदों में अर्धशतक लगाकर इतिहास रचा था। उनके इस रिकॉर्ड को नेपाल के दीपेंद्र सिंह ऐरी ने तोड़ा, जिन्होंने मंगोलिया के खिलाफ महज 9 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया।
दीपेंद्र का यह प्रदर्शन टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट के सबसे तेज अर्धशतकों में दर्ज हुआ। हालांकि, गावस्कर का सवाल है कि क्या इस उपलब्धि को युवराज सिंह के रिकॉर्ड के समान संदर्भ में देखा जाना चाहिए, जबकि दोनों मुकाबलों में विपक्षी टीमों का स्तर अलग था।
गावस्कर ने नेपाल की प्रगति की तारीफ भी की। उन्होंने माना कि नेपाल क्रिकेट में तेजी से आगे बढ़ रहा है और टी20 विश्व कप में इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम को चुनौती देना उसकी क्षमता का उदाहरण है। लेकिन उनका तर्क है कि जब नेपाल जैसी टीम अन्य एसोसिएट देशों के खिलाफ बड़े अंतर से जीत दर्ज करती है, तो ऐसे मुकाबलों में बने रिकॉर्ड की तुलना मजबूत टीमों के खिलाफ प्रदर्शन से करने पर विचार होना चाहिए।
क्या आईसीसी रिकॉर्ड्स के नियम बदलेगा?
गावस्कर के बयान ने क्रिकेट जगत में एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा किया है। एक तरफ एसोसिएट देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मौके और पहचान बढ़ाना जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ रिकॉर्ड्स की तुलना करते समय मुकाबले के स्तर और परिस्थितियों को समझना भी अहम है।
फिलहाल, पुरुष टी20 इंटरनेशनल के इन रिकॉर्ड्स को लेकर अलग श्रेणियां बनाने का सुझाव एक बहस के रूप में सामने आया है। आईसीसी की ओर से इस संबंध में किसी बदलाव की घोषणा का उल्लेख नहीं है। अब देखना होगा कि क्रिकेट प्रशासन इस सुझाव को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या भविष्य में अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड्स को दर्ज करने के नियमों में कोई बदलाव किया जाता है।