शेयर बाजार धड़ाम! 14 जुलाई को सेंसेक्स 561 अंक टूटा, निफ्टी 24,100 के नीचे फिसला; जानें गिरावट के 5 बड़े कारण

शेयर बाजार धड़ाम! 14 जुलाई को सेंसेक्स 561 अंक टूटा, निफ्टी 24,100 के नीचे फिसला; जानें गिरावट के 5 बड़े कारण

 

सेंसेक्स 561 अंक टूटकर बंद हुआ। अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और रुपये में बड़ी गिरावट से बाजार क्यों क्रैश हुआ? जानिए 5 बड़े कारण।

भारतीय शेयर बाजार के लिए मंगलवार, 14 जुलाई का दिन बेहद निराशाजनक रहा। घरेलू शेयर बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक—सेंसेक्स और निफ्टी—भारी बिकवाली के दबाव में आकर लाल निशान पर बंद हुए। पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल (Crude Oil) की आसमान छूती कीमतों और बैंकिंग व वित्तीय (Financial) शेयरों में लगातार कमजोरी ने निवेशकों को बाजार से दूरी बनाने पर मजबूर कर दिया। शानदार तिमाही नतीजों (Earnings Season) के बावजूद बाजार इस वैश्विक दबाव को झेल नहीं पाया।

कारोबार के अंत में, बीएसई का 30 शेयरों वाला सूचकांक सेंसेक्स 561.46 अंक यानी 0.72% की भारी गिरावट के साथ 77,054.94 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई का निफ्टी 50 भी 158.95 अंक यानी 0.66% फिसलकर 24,052.05 के स्तर पर आ गया।

1. अमेरिका-ईरान में नया टकराव और हवाई हमले

बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच गहराता भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिकी सेना द्वारा ईरान पर लगातार तीसरी रात हवाई हमले (US Strikes) किए जाने के बाद निवेशकों की धारणा को गहरा झटका लगा। इसके साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरानी शिपिंग पर फिर से पूर्ण नाकेबंदी (Blockade) लागू करने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा के लिए 20% शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है। इस कदम ने दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति की आशंका को फिर से हवा दे दी है।

2. कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में लगी आग

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का सीधा और तत्काल असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दिया। वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें तेजी से बढ़ती हुई 85 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गईं। 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष को समाप्त करने के लिए हुए समझौते (MoU) के बाद से कच्चे तेल का यह सबसे उच्चतम स्तर है। होर्मुज जलडमरूमध्य में नए हमलों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में बड़ी बाधा आने की आशंका बढ़ा दी है, जो भारत जैसी तेल-आयातक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है।

3. भारतीय रुपये में 49 पैसे की ऐतिहासिक गिरावट

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक अनिश्चितता के कारण भारतीय रुपये (Indian Rupee) में मंगलवार को भारी गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में ही रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 49 पैसे टूटकर 96.17 प्रति डॉलर के स्तर पर आ गया। अमेरिकी हमलों के कारण संघर्ष विराम समझौते (Ceasefire) के पूरी तरह टूटने की आशंका ने विदेशी निवेशकों को सतर्क कर दिया, जिसके चलते घरेलू बाजार से डॉलर बाहर जाने लगे और रुपये पर दबाव बढ़ गया।

4. इंडिया विक्स (India VIX) में उछाल और बढ़ती अस्थिरता

बाजार में व्याप्त घबराहट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भय को मापने वाला सूचकांक इंडिया विक्स (India VIX) 3.84% बढ़कर 13.79 के स्तर पर पहुंच गया। विक्स में आया यह उछाल साफ तौर पर दिखाता है कि निवेशक आने वाले दिनों में बाजार में और अधिक उतार-चढ़ाव की आशंका जता रहे हैं। भू-राजनीतिक जोखिमों को देखते हुए व्यापारियों ने अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित करने के लिए बिकवाली का सहारा लिया।

5. कमजोर वैश्विक संकेत और एशियाई बाजारों में मंदी

वैश्विक स्तर पर भी मंदी की लहर देखने को मिली। ईरान पर अमेरिकी नाकेबंदी की खबरों से एशियाई बाजारों में हड़कंप मच गया।

  • MSCI एशिया-पैसिफिक सूचकांक: जापान के बाहर एशिया-प्रशांत शेयरों के इस सूचकांक में 1.7% की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसमें ताइवान और दक्षिण कोरिया के बाजार सबसे आगे रहे।
  • निक्केई 225: जापान का प्रमुख सूचकांक निक्केई 225 भी 0.8% नीचे लुढ़क गया।
  • चीनी बाजार (CSI 300): बेहतर जून आयात-निर्यात आंकड़ों के सहारे चीनी बाजार थोड़े लचीले रहे, फिर भी सीएसआई 300 में 0.4% की गिरावट देखी गई।

बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों पर सबसे ज्यादा मार

इस चौतरफा गिरावट का सबसे बड़ा नुकसान बैंकिंग और वित्तीय सेक्टर को उठाना पड़ा। निफ्टी बैंक सूचकांक (Nifty Bank) 1.15% की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 1.12% की गिरावट आई। ब्रॉडर मार्केट भी इस बिकवाली से खुद को बचा नहीं पाए; निफ्टी मिडकैप सेलेक्ट 0.86%, निफ्टी स्मॉलकैप 100 1.01% और निफ्टी मिडस्मॉलकैप 400 सूचकांक 0.70% की मंदी के साथ बंद हुए। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के राजनीतिक घटनाक्रमों पर स्थिति साफ नहीं हो जाती, तब तक बाजार में ऐसी अस्थिरता बनी रह सकती है।

 

 

Related posts

कोफॉर्ज को यूरोप से मिला $230M का बड़ा AI प्रोजेक्ट, शेयरों में आई तेजी

ऐक्सिस एएमसी ने ऐक्सिस सिक्योरिटीज के पीएमएस कारोबार का किया अधिग्रहण, एचएनआई सेगमेंट में स्थिति होगी मजबूत

शेयर बाजार समाचार: 24 जुलाई को बाजार में गहराया बिकवाली का दबाव, सेंसेक्स और निफ्टी पस्त

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Read More