शेयर बाजार में हाहाकार! पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल में उछाल से लुढ़के सेंसेक्स-निफ्टी, निवेशकों के डूबे करोड़ों रुपये

शेयर बाजार में हाहाकार! पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल में उछाल से लुढ़के सेंसेक्स-निफ्टी, निवेशकों के डूबे करोड़ों रुपये

 

शेयर बाजार में भारी गिरावट! पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल के बाद सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान पर खुले। जानिए आज के टॉप गेनर्स और लूजर्स।

भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को भारी बिकवाली का माहौल देखने को मिला। वैश्विक बाजारों (Global Markets) से मिले कमजोर संकेतों और पश्चिम एशिया (West Asia) में अचानक बढ़े भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) के चलते दोनों प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक— बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) और एनएसई निफ्टी 50 (NSE Nifty 50) गिरावट के साथ लाल निशान में खुले। खाड़ी क्षेत्र में बढ़े नए तनाव की वजह से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें एक महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं, जिसने एशियाई बाजारों के साथ-साथ भारतीय निवेशकों की धारणा (Investor Sentiment) को भी बुरी तरह प्रभावित किया।

शुरुआती कारोबार में सुबह लगभग 9:21 बजे, बीएसई का 30 शेयरों वाला सूचकांक सेंसेक्स 338.83 अंक यानी 0.44% की गिरावट के साथ 77,277.57 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं, एनएसई का प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 भी 97.55 अंक यानी 0.40% फिसलकर 24,113.45 के स्तर पर आ गया।

बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों पर सबसे ज्यादा मार, आईटी-फार्मा में बढ़त

बाजार में आई इस गिरावट का सबसे बड़ा असर वित्तीय और बैंकिंग सेक्टर (Financial & Banking Sector) पर देखने को मिला। व्यापक बाजार (Broader Markets) भी दबाव से अछूते नहीं रहे। निफ्टी नेक्स्ट 50 में 0.63%, निफ्टी बैंक में 0.81% और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में लगभग 1% की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। बाजार में उतार-चढ़ाव को दर्शाने वाला सूचकांक ‘इंडिया विक्स’ (India VIX) 2.69% बढ़कर ऊपर आ गया, जो निवेशकों के बीच बढ़ती घबराहट और अस्थिरता का स्पष्ट संकेत है।

सेक्टोरल इंडेक्स (Sectoral Indices) पर नजर डालें तो वित्तीय सेवाओं में सबसे ज्यादा बिकवाली हुई:

  • फाइनेंशियल सर्विसेज (Ex-Bank): 1.14% की गिरावट
  • फाइनेंशियल सर्विसेज (25/50): 1.01% की गिरावट
  • ऑटो और रियलिटी इंडेक्स: क्रमश: 0.87% और 0.84% की गिरावट
  • पीएसयू बैंक (PSU Bank): 0.86% की गिरावट

इसके विपरीत, आईटी और फार्मा सेक्टर ने बाजार को संभालने की कोशिश की। निफ्टी आईटी (Nifty IT) 0.61% की बढ़त के साथ सबसे आगे रहा, जिसके बाद फार्मा (+0.50%), मेटल (+0.40%) और एफएमसीजी (+0.19%) में खरीदारी देखने को मिली। सेंसेक्स के शेयरों में टीसीएस, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, टाटा स्टील और अडानी पोर्ट्स बढ़त बनाने वाले प्रमुख शेयर रहे, जबकि इंडसइंड बैंक, बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और महिंद्रा एंड महिंद्रा को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

ईरान पर अमेरिकी नाकेबंदी से उबला क्रूड ऑयल, एशियाई बाजारों में हड़कंप

वैश्विक मोर्चे पर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एक बड़े बयान ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में खलबली मचा दी है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने घोषणा की कि वाशिंगटन खाड़ी क्षेत्र में ईरानी शिपिंग (Iranian Shipping) पर फिर से नाकेबंदी (Blockade) लागू कर रहा है। इसके साथ ही, उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले कार्गो पर 20% शुल्क लगाने का भी ऐलान किया। इस फैसले ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति (Global Energy Supplies) को लेकर चिंताएं बेहद बढ़ा दी हैं, जिसके कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) वायदा 1.7% उछलकर 84.72 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान यह 85.64 डॉलर के स्तर को भी छू गया, जो मध्य जून के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है।

इस तनाव का सीधा असर एशियाई बाजारों पर पड़ा। जापान के बाहर एशिया-प्रशांत शेयरों के एमएससीआई (MSCI) के सबसे बड़े सूचकांक में 1.7% की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसमें ताइवान और दक्षिण कोरिया के बाजारों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। जापान का निक्केई 225 भी 0.8% फिसल गया। हालांकि, जून के बेहतर आयात-निर्यात आंकड़ों के दम पर चीनी बाजार थोड़े संभले नजर आए और सीएसआई 300 केवल 0.4% ही नीचे गिरा।

बाजार विशेषज्ञों की राय: निवेशकों को बरतनी होगी सावधानी

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड (Geojit Investments) के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने भारतीय बाजार की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भू-राजनीतिक तनाव ने घरेलू बाजार के सामने नई मुश्किलें (Headwinds) खड़ी कर दी हैं। उनके अनुसार:

“अमेरिका-ईरान संघर्ष में आई तेजी ने ब्रेंट क्रूड को $84 के पार पहुंचा दिया है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी जारी रहती है, तो इसका असर भारत के व्यापक आर्थिक आंकड़ों (Macro Indicators) पर पड़ेगा। इसके चलते भुगतान संतुलन (BoP) की संवेदनशीलता और भारतीय रुपये पर दबाव जैसी समस्याएं दोबारा सामने आ सकती हैं, जो बाजार को नकारात्मक रूप से प्रभावित करेंगी।”

विजयकुमार ने आगे सचेत किया कि अमेरिका में 10 साल के ट्रेजरी यील्ड (Treasury Yield) के बढ़कर 4.61% पर पहुंचने से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के फंड फ्लो पर असर पड़ सकता है। साथ ही, जून महीने की खुदरा महंगाई (CPI Inflation) भी बढ़कर 4.38% हो गई है, जिसमें आगे और बढ़ोतरी की आशंका है। ऐसे में निवेशकों को बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। मौजूदा अनिश्चित माहौल में निवेश से जुड़े फैसले लेना काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है, इसलिए निवेशकों को जल्दबाजी से बचते हुए कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक घटनाक्रमों पर करीब से नजर रखनी चाहिए।

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