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श्रीनगर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर जुलाई से अक्टूबर 2026 तक रनवे रखरखाव के कारण उड़ानों के समय में बदलाव होगा। हज यात्रियों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी।
श्रीनगर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, जो कश्मीर घाटी के लिए हवाई संपर्क का मुख्य केंद्र है, आगामी महीनों में महत्वपूर्ण परिचालन बदलावों से गुजरने की तैयारी कर रहा है। भारतीय वायु सेना (IAF) द्वारा प्रस्तावित रनवे रखरखाव कार्य के कारण हवाई यात्राओं के समय में बदलाव की संभावना है। यह रखरखाव कार्य न केवल नियमित परिचालन को प्रभावित करेगा, बल्कि विशेष रूप से हज यात्रियों की वापसी यात्रा पर भी इसका सीधा असर पड़ने वाला है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और संबंधित विभागों ने यात्रियों को असुविधा से बचाने के लिए पहले से ही सतर्क और सूचित रहने की सलाह दी है।
रनवे रखरखाव का प्रस्तावित कार्यक्रम
प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्रीनगर हवाई अड्डे ने एक प्रस्तावित रखरखाव कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की है। इस योजना के तहत, 01 जुलाई 2026 से 30 सितंबर 2026 तक प्रत्येक सोमवार और मंगलवार को रनवे की उपलब्धता प्रभावित रहेगी। इन दो दिनों में उड़ानें संचालित नहीं हो सकेंगी। इसके अतिरिक्त, एक और महत्वपूर्ण चरण प्रस्तावित है, जिसमें 01 अक्टूबर 2026 से 16 अक्टूबर 2026 तक रनवे को परिचालन के लिए पूरी तरह से बंद रखा जाएगा।
हवाई अड्डा प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह पूरा कार्यक्रम अभी योजना के चरण (Planning Phase) में है। जैसे ही इसे सक्षम अधिकारियों से औपचारिक स्वीकृति मिलेगी, विस्तृत जानकारी आधिकारिक माध्यमों से सार्वजनिक कर दी जाएगी। प्रशासन ने यात्रियों से आग्रह किया है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह या असत्यापित सूचनाओं पर भरोसा न करें और नवीनतम अपडेट के लिए केवल हवाई अड्डे के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल (जैसे ‘X’) और अपनी संबंधित एयरलाइनों के संपर्क में रहें।
हज यात्रियों की यात्रा पर प्रभाव और सुरक्षात्मक उपाय
श्रीनगर हवाई अड्डे के लिए जारी किए गए NOTAM (नोटिस टू एयरमेन) और रनवे रखरखाव के कारण विमानों की लंबाई और वजन क्षमता (Payload) पर कुछ प्रतिबंध लगाए गए हैं। इन परिचालन बाधाओं का सबसे सीधा असर हज से लौटने वाले तीर्थयात्रियों पर पड़ रहा है। तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देते हुए, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने एक विशेष वैकल्पिक व्यवस्था लागू की है।
अकासा एयरलाइंस द्वारा संचालित होने वाली हज वापसी उड़ानों के लिए यह तय किया गया है कि यात्रियों को पहले अहमदाबाद के रास्ते श्रीनगर लाया जाएगा। इस दौरान, यात्रियों की सुविधा के लिए चेक-इन बैगेज (सामान) को दो भागों में विभाजित किया गया है। अहमदाबाद तक की यात्रा में यात्री 35 किलोग्राम तक का सामान ले जा सकेंगे। इसके बाद, अहमदाबाद से श्रीनगर के लिए उड़ान भरने वाले विमानों में प्रति यात्री केवल 5 किलोग्राम चेक-इन सामान ही ले जाने की अनुमति होगी। शेष 30 किलोग्राम सामान को सड़क मार्ग से सुरक्षित रूप से श्रीनगर पहुँचाया जाएगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि केबिन बैगेज (हाथ में ले जाने वाले सामान) की अनुमति में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
समन्वय और प्रशासनिक प्रतिबद्धता
यह पूरी व्यवस्था हवाई अड्डा परिचालन की सीमाओं और विमानन सुरक्षा (Aviation Safety) की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए की गई है। अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, हज कमेटी ऑफ इंडिया और जम्मू-कश्मीर राज्य हज समिति इस प्रक्रिया की निरंतर निगरानी कर रहे हैं। इन सभी विभागों के बीच उच्च स्तरीय समन्वय स्थापित किया गया है ताकि तीर्थयात्रियों की वापसी की यात्रा सुरक्षित, सुगम और गरिमापूर्ण बनी रहे।
प्रशासन ने जोर देकर कहा है कि “सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है।” रनवे के रखरखाव का निर्णय केवल तकनीकी आवश्यकतओं को पूरा करने और भविष्य में हवाई संचालन को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए लिया गया है। यात्रियों और तीर्थयात्रियों को होने वाली अस्थायी असुविधा के लिए प्रशासन ने समझदारी और धैर्य की अपेक्षा की है।
अतः श्रीनगर हवाई अड्डे से यात्रा करने वाले सभी यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे जुलाई 2026 से अक्टूबर 2026 के बीच अपनी यात्रा की योजना बनाने से पहले एयरलाइन के साथ अपने टिकटों की स्थिति की पुष्टि अवश्य कर लें। किसी भी अंतिम क्षण की परेशानी से बचने के लिए लगातार आधिकारिक अपडेट पर नजर बनाए रखना ही सबसे उचित समाधान है। श्रीनगर हवाई अड्डा प्रशासन और सरकार का लक्ष्य इस चुनौतीपूर्ण अवधि के दौरान यात्रियों को न्यूनतम कठिनाई हो, इसके लिए सभी तकनीकी पहलुओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है।