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दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक महाबलीपुरम में अमित शाह की अध्यक्षता में होगी। जल बंटवारे, आंध्र प्रदेश पुनर्गठन, PMAY-ग्रामीण, शिक्षा और FTSCs पर चर्चा होगी।
दक्षिण भारत से जुड़े राज्यों के बीच आपसी सहयोग और क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान को लेकर दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक 20 अगस्त को तमिलनाडु के महाबलीपुरम में आयोजित की जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे। बैठक में आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, जल बंटवारे से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण और नागरिक उड्डयन समेत कई अहम क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा महिलाओं और बच्चों के खिलाफ दुष्कर्म के मामलों की तेज जांच और जल्द निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट्स यानी FTSCs के प्रभावी क्रियान्वयन, शिक्षा और राष्ट्रीय महत्व से जुड़े अन्य विषय भी बैठक के एजेंडे में शामिल हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार, यह बैठक राज्यों और केंद्र के बीच संवाद के माध्यम से समस्याओं के समाधान और आपसी सहयोग को मजबूत करने का महत्वपूर्ण मंच है।
अमित शाह करेंगे बैठक की अध्यक्षता
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 20 अगस्त की शाम तमिलनाडु के लिए रवाना होंगे और अगले दिन दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। बैठक में क्षेत्र के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा। बैठक समाप्त होने के बाद गृह मंत्री महाबलीपुरम स्थित प्रसिद्ध शोर मंदिर में पूजा-अर्चना भी करेंगे। दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद के अध्यक्ष केंद्रीय गृह मंत्री होते हैं, जबकि सदस्य राज्यों के मुख्यमंत्री बारी-बारी से परिषद के उपाध्यक्ष की भूमिका निभाते हैं। इस समय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय परिषद के उपाध्यक्ष हैं।
कौन-कौन से राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हैं शामिल?
दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना शामिल हैं। इसके अलावा पुडुचेरी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा लक्षद्वीप भी परिषद के सदस्य केंद्र शासित प्रदेश हैं। बैठक में इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, उपराज्यपाल तथा प्रशासक हिस्सा लेंगे। प्रत्येक राज्य से दो वरिष्ठ मंत्री भी बैठक में शामिल होंगे। इसके अलावा राज्यों के मुख्य सचिव, सलाहकार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में भाग लेकर संबंधित विषयों पर अपना पक्ष रखेंगे।
आंध्र प्रदेश पुनर्गठन और जल बंटवारे के मुद्दे अहम
बैठक में आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम से जुड़े मुद्दे विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहेंगे। दक्षिण भारत के कई राज्यों के बीच जल संसाधनों के बंटवारे और उनसे संबंधित परियोजनाओं को लेकर लंबे समय से विभिन्न विषय चर्चा में रहे हैं। ऐसे में क्षेत्रीय परिषद की बैठक राज्यों को आपसी संवाद के जरिए समाधान तलाशने का अवसर प्रदान करेगी। जल संसाधनों से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं, राज्यों के बीच सहयोग और विकास योजनाओं को लेकर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। परिषद का उद्देश्य विवादों को बढ़ाने के बजाय बातचीत और सहमति के माध्यम से समाधान की दिशा में आगे बढ़ना है।
प्रधानमंत्री आवास योजना और नागरिक उड्डयन पर भी चर्चा
दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण से जुड़े विषय भी उठाए जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में आवास सुविधाओं को बढ़ावा देने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े मुद्दों पर राज्यों और केंद्र के बीच चर्चा होने की संभावना है। इसके साथ ही नागरिक उड्डयन क्षेत्र से जुड़े मुद्दे भी एजेंडे में शामिल हैं। दक्षिणी राज्यों में हवाई संपर्क, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और विमानन क्षेत्र के विकास को लेकर राज्यों की जरूरतों और प्रस्तावों पर विचार किया जा सकता है। इससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों, पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर विशेष जोर
राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ दुष्कर्म के मामलों की तेज जांच और शीघ्र न्याय सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट्स के क्रियान्वयन का विषय भी शामिल है। FTSCs का उद्देश्य गंभीर आपराधिक मामलों की सुनवाई में तेजी लाना और लंबित मामलों को जल्द निपटाना है। बैठक में इन विशेष अदालतों के प्रभावी संचालन, राज्यों में इनके क्रियान्वयन और न्याय प्रक्रिया को तेज करने से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की जाएगी। शिक्षा से संबंधित मुद्दे भी राष्ट्रीय महत्व के विषयों के तहत बैठक में उठाए जाएंगे।
मुख्य सचिवों की स्थायी समिति करती है प्रारंभिक समीक्षा
दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद ने राज्यों के मुख्य सचिवों के स्तर पर एक स्थायी समिति भी गठित की है। राज्यों द्वारा प्रस्तावित मुद्दों को पहले इस स्थायी समिति के समक्ष चर्चा के लिए रखा जाता है। समिति में विस्तृत विचार-विमर्श के बाद जिन विषयों का समाधान नहीं हो पाता या जिन पर परिषद के स्तर पर निर्णय की आवश्यकता होती है, उन्हें मुख्य बैठक में विचार के लिए प्रस्तुत किया जाता है। इस व्यवस्था से परिषद की बैठकों में महत्वपूर्ण और प्राथमिकता वाले मुद्दों पर केंद्रित चर्चा संभव होती है।
1956 के कानून के तहत बनी क्षेत्रीय परिषदें
दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद सहित पांच क्षेत्रीय परिषदों की स्थापना राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 15 से 22 के तहत की गई थी। इन परिषदों का उद्देश्य राज्यों के बीच सहयोग बढ़ाना और ऐसे मामलों पर संवाद के लिए मंच उपलब्ध कराना है जो दो या अधिक राज्यों या केंद्र और राज्यों से संबंधित हों। इन परिषदों की भूमिका सलाहकारी है, लेकिन पिछले वर्षों में उन्होंने विभिन्न क्षेत्रीय मुद्दों के समाधान और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
संवाद से समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण मंच
क्षेत्रीय परिषदों की मूल भावना यह है कि मजबूत राज्य मिलकर मजबूत राष्ट्र का निर्माण करते हैं। परिषदें राज्यों के बीच मतभेदों और विवादों को बातचीत के माध्यम से सुलझाने का अवसर देती हैं। जून 2014 से अब तक केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों के सहयोग से अलग-अलग क्षेत्रीय परिषदों और उनकी स्थायी समितियों की कुल 69 बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इन बैठकों के माध्यम से राज्यों और केंद्र के बीच संवाद बढ़ा है और कई साझा मुद्दों पर समाधान की दिशा में प्रगति हुई है।
दक्षिण भारत में सहयोग को मिलेगी नई गति
महाबलीपुरम में होने वाली दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दक्षिणी राज्यों के बीच जल, बुनियादी ढांचे, आवास, शिक्षा, परिवहन और सुरक्षा जैसे कई साझा विषय महत्वपूर्ण हैं। बैठक में राज्यों की प्राथमिकताओं को केंद्र के समक्ष रखने और आपसी सहयोग के जरिए समाधान तलाशने का अवसर मिलेगा। परिषद का यह मंच क्षेत्रीय विकास को गति देने के साथ राज्यों और केंद्र के बीच आपसी समझ को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभा सकता है। अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाली बैठक से उम्मीद है कि कई लंबित मुद्दों पर ठोस चर्चा होगी और संवाद के माध्यम से आगे बढ़ने का रास्ता तैयार होगा।