Table of Contents
सोनू निगम ने कोमल नाहटा के पॉडकास्ट में पिता के सख्त अनुशासन को याद किया। उन्होंने बताया कि पिता ने उन्हें मुंबई में शो करने से क्यों रोका था।
भारत के लोकप्रिय और बहुमुखी प्लेबैक सिंगर्स में शुमार सोनू निगम ने अपने करियर के शुरुआती दौर से जुड़ा एक दिलचस्प और मजेदार किस्सा साझा किया है। दशकों से अपनी आवाज के जरिए लोगों के दिलों पर राज करने वाले सोनू निगम ने हाल ही में एक पॉडकास्ट बातचीत के दौरान अपने पिता के सख्त अनुशासन और उनके साथ अपने रिश्ते के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि उनके पिता काफी अनुशासित और सख्त स्वभाव के व्यक्ति थे और इसी वजह से उन्होंने एक समय सोनू को मुंबई में शो करने तक की इजाजत नहीं दी थी।
पिता ने मुंबई में शो करने से क्यों रोका?
Sonu Nigam ने कोमल नाहटा के पॉडकास्ट ‘Game Changers’ में अपने शुरुआती करियर के दिनों को याद किया। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि उनके पिता नहीं चाहते थे कि वह मुंबई में जाकर लगातार शो करें। इसके पीछे उनके पिता की सोच बेहद दिलचस्प थी।
सोनू के मुताबिक, उनके पिता को लगता था कि मुंबई में रहकर उनके बेटे का ध्यान संगीत से भटक सकता है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में बताया कि उनके पिता ने उनसे कहा था कि वह मुंबई में शो नहीं करेंगे, क्योंकि वह अच्छे दिखते हैं और अच्छी आवाज में गाते हैं, ऐसे में उनकी कोई गर्लफ्रेंड बन सकती है।
यह बात सुनने में भले ही मजेदार लगे, लेकिन सोनू के पिता की चिंता के पीछे अपने बेटे के करियर और अनुशासन को लेकर उनकी सोच थी। वह चाहते थे कि सोनू अपने लक्ष्य पर पूरी तरह केंद्रित रहें और किसी ऐसी चीज में न उलझें जिससे उनका ध्यान अपने करियर से हट जाए।
‘गर्लफ्रेंड बन जाएगी’ वाली पिता की चिंता
सोनू निगम ने बताया कि उनके पिता को डर था कि अगर वह मुंबई में ज्यादा समय बिताएंगे तो वहां किसी मशहूर सिंगर या डांसर के साथ उनका अफेयर हो सकता है। इसके अलावा उनके पिता को यह भी आशंका थी कि मुंबई में रहने के दौरान सोनू की दोस्ती कई संगीतकारों और साथी गायकों से हो जाएगी और वह वहीं बस जाएंगे।
सोनू ने पिता की कही बातों को याद करते हुए बताया कि उनका मानना था कि अगर वह दिल्ली में रहेंगे तो अपने पिता के साथ रहकर अपने काम पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर पाएंगे। वहीं मुंबई जाने का उद्देश्य सिर्फ काम के अवसर तलाशना होना चाहिए, न कि वहां जाकर स्थायी रूप से बस जाना।
पिता की बात मान गए थे सोनू
इस पूरे किस्से का सबसे खास हिस्सा यह है कि सोनू निगम ने अपने पिता की बात का विरोध नहीं किया। उन्होंने बताया कि वह अपने पिता की बात मानते थे और उनके फैसले का सम्मान करते थे। सोनू ने खुद को उस समय का ‘अच्छा बच्चा’ बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने पिता के सामने विद्रोह नहीं किया और उनकी बात मान ली।
उनके मुताबिक, पिता के साथ उनके रिश्ते में सम्मान की भावना बहुत महत्वपूर्ण थी। वह अपने पिता की सोच को समझते थे और उनके अनुशासन का पालन करते थे। यही वजह थी कि उन्होंने मुंबई में शो नहीं करने के उनके फैसले को स्वीकार किया।
अनुशासन ने करियर में निभाई अहम भूमिका
सोनू निगम की यह कहानी उनके शुरुआती जीवन में परिवार के प्रभाव को भी दिखाती है। आज वह भारतीय संगीत जगत के सबसे चर्चित गायकों में शामिल हैं, लेकिन उनके करियर की शुरुआत में परिवार और खासकर उनके पिता का अनुशासन काफी महत्वपूर्ण रहा।
मुंबई भारतीय फिल्म और संगीत उद्योग का प्रमुख केंद्र रहा है। ऐसे में किसी युवा गायक के लिए वहां लगातार काम करने और बड़े कलाकारों के संपर्क में आने के अवसर बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इसके बावजूद सोनू के पिता चाहते थे कि उनका बेटा अपने लक्ष्य से न भटके और करियर के शुरुआती दौर में अनुशासन को प्राथमिकता दे।
पिता की चिंता आज बन गई मजेदार याद
समय बीतने के साथ सोनू निगम के पिता की वह चिंता आज एक मजेदार और यादगार किस्से में बदल गई है। जिस समय उनके पिता को डर था कि मुंबई में जाकर उनका बेटा रिश्तों और दोस्तों के चक्कर में पड़ सकता है, उसी सोनू ने आगे चलकर भारतीय संगीत जगत में अपनी अलग पहचान बनाई।
उनकी आवाज ने न सिर्फ बॉलीवुड बल्कि अलग-अलग भाषाओं के संगीत में भी अपनी जगह बनाई। उन्होंने कई यादगार गाने गाए और अपनी गायकी की विविधता के लिए पहचान हासिल की।
सोनू ने नहीं चुना विद्रोह का रास्ता
सोनू निगम ने इस बातचीत में यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने पिता की बात को चुनौती देने के बजाय उसका सम्मान किया। उनके लिए पिता का अनुशासन और अनुभव महत्वपूर्ण था। उन्होंने बताया कि वह उस समय अपने पिता को समझने और उनकी बात मानने को प्राथमिकता देते थे।
यह किस्सा सोनू निगम के करियर के एक ऐसे दौर की झलक देता है, जब वह एक युवा कलाकार थे और उनके सामने मनोरंजन जगत में आगे बढ़ने के कई रास्ते खुल रहे थे। पिता की सख्ती के बावजूद उन्होंने अपने संगीत के प्रति समर्पण बनाए रखा और धीरे-धीरे अपनी पहचान मजबूत की।
आज भी पिता की बातें याद हैं सोनू को
सोनू निगम का यह किस्सा यह बताता है कि बड़े कलाकारों की सफलता के पीछे केवल उनकी प्रतिभा ही नहीं, बल्कि परिवार का मार्गदर्शन और शुरुआती दौर का अनुशासन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। मुंबई में शो करने से रोकने की पिता की वजह आज भले ही सोनू के लिए एक मजेदार याद हो, लेकिन उस समय यह उनके पिता की अपने बेटे के भविष्य को लेकर चिंता और सुरक्षा की भावना को दर्शाती थी।
सोनू ने जिस सहजता से इस घटना को साझा किया, उससे उनके और उनके पिता के रिश्ते की एक अलग तस्वीर सामने आती है। एक तरफ पिता का सख्त अनुशासन था, तो दूसरी ओर बेटे का सम्मान और भरोसा। यही रिश्ता सोनू निगम की शुरुआती यात्रा की उन यादों में शामिल है, जिन्हें वह आज भी मुस्कुराते हुए याद करते हैं।