AAP नेता सोमनाथ भारती ने 2002 की मतदाता सूची में नाम खोजने में कठिनाई का दावा करते हुए चुनाव आयोग से सवाल किए। उन्होंने अन्य पहचान संबंधी दस्तावेजों को भी मान्यता देने की मांग उठाई।
आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक सोमनाथ भारती ने मतदाता सूची सत्यापन प्रक्रिया को लेकर भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी अपने बयान में उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2002 की मतदाता सूची में अपना नाम तलाशने में उन्हें स्वयं कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल किया कि यदि उनके जैसे व्यक्ति को ऐसी परेशानी हो रही है, तो आम नागरिकों के लिए यह प्रक्रिया कितनी कठिन होगी।
‘आम आदमी की स्थिति क्या होगी?’
मेरा भाजपा के चुनाव आयोग से सवाल है कि अगर मेरे जैसे व्यक्ति को 2002 की लिस्ट में अपना नाम ढूंढ पाने में समस्या हो रही है तो आम इंसान की क्या हालत होगी?
क्या अन्य प्रमाणों पर विचार नहीं किया जाएगा?@attorneybharti pic.twitter.com/Sok3O0pOJw
— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) August 3, 2026
सोमनाथ भारती ने कहा कि यदि मतदाता सूची में नाम खोजने जैसी प्रक्रिया ही जटिल होगी, तो लाखों आम मतदाताओं को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने चुनाव आयोग से सवाल किया कि क्या केवल पुरानी मतदाता सूची के आधार पर ही पहचान तय की जाएगी या फिर अन्य वैध दस्तावेजों को भी स्वीकार किया जाएगा।
उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि “यदि मुझे 2002 की सूची में अपना नाम ढूंढने में परेशानी हो रही है, तो आम आदमी की स्थिति क्या होगी? क्या दूसरे साक्ष्यों (एविडेंस) पर भी विचार नहीं किया जाएगा?”
अन्य दस्तावेजों को भी मान्यता देने की मांग
AAP नेता ने निर्वाचन प्रक्रिया में अधिक व्यावहारिक और नागरिक हितैषी दृष्टिकोण अपनाने की मांग की। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति का नाम पुरानी मतदाता सूची में आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाता, तो उसके पास मौजूद अन्य सरकारी दस्तावेजों और पहचान संबंधी प्रमाणों को भी महत्व दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिससे पात्र मतदाताओं को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े और किसी का मतदान का अधिकार प्रभावित न हो।
चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया का इंतजार
खबर लिखे जाने तक भारत निर्वाचन आयोग की ओर से सोमनाथ भारती के बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस विषय पर और बहस देखने को मिल सकती है।