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नासा ने सौर तूफान की चेतावनी दी है। क्या भारत में आज रात लद्दाख के आसमान में ऑरोरा (नॉरदर्न लाइट्स) दिखाई देंगे? यहाँ पूरी जानकारी पढ़ें।
आज, 8 जून 2026, पूरी दुनिया के खगोल विज्ञान प्रेमियों की निगाहें आसमान पर टिकी हैं। एक शक्तिशाली सौर तूफान (Solar Storm) के पृथ्वी से टकराने की खबर ने एक बार फिर से उन दुर्लभ ‘नॉरदर्न लाइट्स’ या ‘ऑरोरा बोरेलिस’ (Aurora Borealis) को देखने की उम्मीद जगा दी है। नासा (NASA) ने G3 स्तर के भू-चुंबकीय तूफान (Geomagnetic Storm) की चेतावनी जारी की है, जिसका अर्थ है कि आने वाले 24 से 48 घंटों में पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र काफी हलचल भरे दौर से गुजरेगा। यह सौर घटना इतनी तीव्र बताई जा रही है कि इसके प्रभाव स्वरूप उत्तरी भारत, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया जैसे क्षेत्रों में ऑरोरा का अद्भुत नजारा दिखाई देने की संभावना है।
ऑरोरा बोरेलिस क्या है?
ऑरोरा बोरेलिस, जिसे आम भाषा में ‘नॉरदर्न लाइट्स’ कहा जाता है, प्रकृति का सबसे जादुई लाइट शो है। ये रंगीन रोशनी के रिबन जैसे दिखते हैं जो रात के अंधेरे आसमान में लहराते और नाचते हुए प्रतीत होते हैं। सामान्यतः ये नजारे आर्कटिक सर्कल के पास के उत्तरी ध्रुवीय क्षेत्रों में देखे जाते हैं, जहाँ आसमान में हरे, गुलाबी, बैंगनी, पीले और लाल रंगों की चादरें सी बिछ जाती हैं। यह घटना पृथ्वी के चुंबकीय ध्रुवों के चारों ओर स्थित ‘ऑरोरल ओवल’ (Auroral Oval) नामक क्षेत्र में होती है। हालांकि, सौर गतिविधि के अत्यधिक तीव्र होने पर, ये रोशनियाँ अपनी सामान्य सीमाओं से बाहर निकलकर कम अक्षांशों (lower latitudes) तक भी देखी जा सकती हैं।
ये जादुई रोशनी आखिर बनती कैसे है?
ऑरोरा का निर्माण एक बेहद रोचक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। सूर्य से लगातार आवेशित कण (charged particles) निकलते रहते हैं, जिन्हें सौर हवा कहा जाता है। जब सौर फ्लेयर्स (solar flares) के जरिए ये कण बड़ी मात्रा में अंतरिक्ष में छोड़े जाते हैं और पृथ्वी तक पहुँचते हैं, तो हमारा चुंबकीय क्षेत्र हमें उनसे बचाता है। लेकिन, ध्रुवीय क्षेत्रों में ये कण वायुमंडल में प्रवेश कर जाते हैं। यहाँ ये पृथ्वी के वायुमंडल में मौजूद ऑक्सीजन और नाइट्रोजन के परमाणुओं से 20 से 200 मील की ऊँचाई पर टकराते हैं। इस टकराव से ऊर्जा रिलीज होती है, जो फोटॉन (प्रकाश) के रूप में दिखाई देती है। ऑक्सीजन के कण टकराने पर हरा और लाल रंग पैदा करते हैं, जबकि नाइट्रोजन के कण नीले और बैंगनी रंग की आभा बिखेरते हैं।
भारत में कहाँ दिखेगा यह दुर्लभ नजारा?
क्या भारत में ऑरोरा देखना संभव है? जनवरी 2026 की उस ठंडी रात को याद करें, जब लद्दाख के आसमान में रहस्यमयी रोशनी ने सबको हैरान कर दिया था। उस समय ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स’ के वैज्ञानिकों ने पुष्टि की थी कि उनके कैमरों ने लद्दाख के ‘हानले’ (Hanle) में ऑरोरा की तस्वीरें कैद की थीं। इस बार भी, हानले, लद्दाख के लोगों की उम्मीदें आसमान पर हैं।
भारतीय खगोलीय वेधशाला (Indian Astronomical Observatory) समुद्र तल से 4,500 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यह स्थान दुनिया के सबसे ऊंचे और अंधेरे खगोलीय केंद्रों में से एक माना जाता है। यहाँ की हवा बेहद पतली और साफ है, और रातें इतनी गहरी काली होती हैं कि ब्रह्मांड के सबसे छोटे पिंड भी नंगी आँखों से देखे जा सकते हैं। इस कारण लद्दाख का यह हिस्सा ऑरोरा को देखने के लिए दुनिया की सबसे बेहतरीन जगहों में से एक बन जाता है।
क्यों खास है यह सौर तूफान?
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह कोरोनल मास इजेक्शन (CME) पिछले कुछ दिनों में दर्ज की गई सौर घटनाओं की तुलना में कहीं अधिक तीव्र है। CME का अर्थ है सूर्य से निकलने वाला प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्र का एक विशाल गुबार। जब यह पृथ्वी के वायुमंडल से टकराता है, तो यह हमारे ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र को कंपित कर देता है, जिससे ऑरोरा की तीव्रता बढ़ जाती है। यदि यह तूफान उम्मीद के मुताबिक असर दिखाता है, तो यह न केवल लद्दाख, बल्कि अन्य ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में भी रोशनी का अनूठा अनुभव प्रदान कर सकता है।
सावधानी और उत्साह का संगम
सौर तूफान के दौरान ऑरोरा का दिखना जितना सुखद है, उतना ही यह तकनीकी प्रणालियों के लिए चुनौतीपूर्ण भी हो सकता है। रेडियो संचार, जीपीएस और पावर ग्रिड पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, खगोल प्रेमियों के लिए यह एक जीवन में मिलने वाला अवसर है। यदि आप आज रात लद्दाख या किसी ऊंचे और अंधेरे वाले इलाके में हैं, तो आसमान की ओर देखना न भूलें। प्रकति का यह अद्भुत ‘लाइट शो’ आपको ब्रह्मांड की विशालता और उसकी खूबसूरती का अहसास कराएगा। क्या आज रात हानले का आसमान फिर से रंगीन हो उठेगा? वैज्ञानिक डेटा और प्रकृति के इस अनूठे संयोग का पूरा विश्व बेसब्री से इंतजार कर रहा है।