SIPRI रिपोर्ट 2026: दुनिया में परमाणु हथियारों का भंडार 12,187, जानें भारत के पास कितने परमाणु बम

SIPRI रिपोर्ट 2026: दुनिया में परमाणु हथियारों का भंडार 12,187, जानें भारत के पास कितने परमाणु बम

 

SIPRI की नई रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में भारत का परमाणु भंडार 180 से बढ़कर 190 वॉरहेड्स हो गया है। जानिए वैश्विक परमाणु हथियारों की स्थिति और चीन-पाकिस्तान के साथ भारत की रणनीतिक तुलना।

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रीसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट ‘ईयरबुक 2026’ जारी कर दी है, जो दुनिया भर में सुरक्षा और परमाणु हथियारों की स्थिति पर एक गंभीर प्रकाश डालती है। इस रिपोर्ट के अनुसार, 8 जून 2026 को जारी आंकड़ों में वैश्विक स्तर पर परमाणु हथियारों के भंडारण में मामूली बदलाव देखने को मिले हैं। हालांकि दुनिया के कुल परमाणु भंडार में संख्यात्मक रूप से गिरावट आई है, लेकिन विशेषज्ञों ने दुनिया के एक ‘खतरनाक नए परमाणु युग’ में प्रवेश करने की चेतावनी दी है।

वैश्विक परिदृश्य: क्या घट रही है परमाणु हथियारों की संख्या?

SIPRI की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2026 तक दुनिया के नौ परमाणु-सशस्त्र देशों—अमेरिका, रूस, यूके, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इज़राइल—के पास कुल मिलाकर लगभग 12,187 परमाणु वॉरहेड्स हैं। यदि इसकी तुलना पिछले वर्ष (2025) से की जाए, तो यह संख्या 12,241 थी।

रिपोर्ट बताती है कि हालांकि कुल संख्या में मामूली गिरावट दिख रही है, लेकिन यह प्रवृत्ति भ्रामक है। दुनिया की दो प्रमुख परमाणु शक्तियां—अमेरिका और रूस—के पास अभी भी दुनिया के लगभग 83 प्रतिशत परमाणु वॉरहेड्स मौजूद हैं। दुनिया भर में लगभग 9,745 वॉरहेड्स ऐसे हैं जो सैन्य भंडारों में संभावित उपयोग के लिए तैयार हैं, जिनमें से करीब 4,012 वॉरहेड्स सीधे मिसाइलों और विमानों के साथ तैनात हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु हथियारों को नष्ट करने की धीमी गति और नई प्रणालियों के तेज विकास के कारण आने वाले वर्षों में यह गिरावट रुक सकती है और संख्या में बढ़ोतरी शुरू हो सकती है।

भारत का परमाणु विस्तार: 180 से बढ़कर 190 वॉरहेड्स

SIPRI की 2026 की रिपोर्ट में भारत के संबंध में महत्वपूर्ण आकलन किया गया है। भारत के परमाणु शस्त्रागार में लगातार वृद्धि देखी गई है। साल 2025 में भारत के पास लगभग 180 वॉरहेड्स थे, जो 2026 की शुरुआत तक बढ़कर 190 हो गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत का आधुनिकीकरण कार्यक्रम अब मुख्य रूप से चीन के बढ़ते सैन्य प्रभाव को ध्यान में रखते हुए लंबी दूरी के हथियारों के विकास पर केंद्रित है, जबकि पाकिस्तान के साथ जारी रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता भी उसकी सुरक्षा योजनाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।

भारत अपनी ‘न्यूनतम विश्वसनीय निवारण’ (Minimum Credible Deterrence) और ‘नो फर्स्ट यूज़’ (No First Use) की नीति पर कायम है, लेकिन अपनी प्रतिरोधक क्षमता (Deterrence) को अधिक सक्षम बनाने के लिए भारत अब सतह, हवा और समुद्र—तीनों क्षेत्रों में अपनी त्रिकोणीय परमाणु क्षमता को मजबूत कर रहा है।

पड़ोसी देशों की स्थिति: चीन और पाकिस्तान

चीन के संबंध में रिपोर्ट सबसे अधिक चिंताजनक आंकड़े पेश करती है। चीन का परमाणु शस्त्रागार दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रहा है, जो 600 से बढ़कर 620 वॉरहेड्स तक पहुंच गया है। चीन न केवल अपने परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ा रहा है, बल्कि बड़ी संख्या में मिसाइल साइलो (Silos) का निर्माण भी कर रहा है। वहीं, पाकिस्तान का परमाणु शस्त्रागार 170 वॉरहेड्स पर स्थिर माना गया है। पाकिस्तान अभी भी नए डिलीवरी सिस्टम के विकास और विखंडनीय सामग्री (fissile material) के संचय पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

एक अस्थिर भविष्य की आहट

SIPRI की रिपोर्ट एक ऐसे समय में आई है जब दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है। रिपोर्ट में विशेष रूप से मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य तनाव का उल्लेख किया गया है, जिसने परमाणु प्रतिरोध के पारंपरिक तर्क को चुनौती दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे देश परमाणु हथियारों पर अपनी निर्भरता बढ़ा रहे हैं, वैसे-वैसे गलतफहमी और ‘न्यूक्लियर एस्केलेशन’ का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। हथियारों के आधुनिकीकरण की यह अंधी दौड़ वैश्विक शांति के लिए एक नई और गंभीर चुनौती बन गई है।

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