महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रुति चौधरी ने आंगनवाड़ी और बाल देखभाल केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। सुरक्षा और स्वच्छता में लापरवाही पर अधिकारियों को दी कड़ी चेतावनी।
चंडीगढ़: महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रुति चौधरी ने राज्य में संचालित आंगनवाड़ी केंद्रों, क्रेच और बाल देखभाल संस्थानों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के लिए एक सख्त रुख अपना लिया है। हाल ही में किए गए अपने औचक निरीक्षण के दौरान, मंत्री ने केंद्रों की जमीनी हकीकत को परखा और व्यवस्थाओं में पाई गई खामियों पर संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई।
“बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं”
महिला एवं बाल विकास मंत्री @Shruti4Progress ने आंगनवाड़ी केंद्रों, क्रेच, बाल देखभाल संस्थानों एवं शिशु निकेतन केंद्रों का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने बच्चों से सीधे संवाद कर उन्हें उपलब्ध करवाई जा रही सुविधाओं, खान-पान एवं देखभाल संबंधी… pic.twitter.com/m1Rv4XIQdG
— DPR Haryana (@DiprHaryana) May 23, 2026
निरीक्षण के दौरान मंत्री श्रुति चौधरी ने सीधे बच्चों से संवाद किया और उन्हें मिल रहे खान-पान, स्वास्थ्य सुविधाओं और देखभाल की स्थिति का जायजा लिया। कई केंद्रों पर अव्यवस्थाएं देखकर उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि बच्चों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और स्वच्छता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को साफ तौर पर निर्देश दिए कि बच्चों की बेहतर देखभाल उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
सुधार और नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश
मंत्री ने निरीक्षण के बाद अधिकारियों को निम्नलिखित दिशा-निर्देश जारी किए:
- नियमित निरीक्षण: सभी बाल देखभाल संस्थानों और आंगनवाड़ी केंद्रों का नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करें ताकि व्यवस्था बनी रहे।
- गुणवत्ता में सुधार: बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और केंद्रों में साफ-सफाई के मानकों को और अधिक बेहतर बनाया जाए।
- जवाबदेही: लापरवाही पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए।
सुशासन का ‘बाल-कल्याण’ मॉडल
मंत्री श्रुति चौधरी का यह कदम सरकार की ‘बच्चों के प्रति जवाबदेही’ की नीति को दर्शाता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही मायने में अंतिम लाभार्थी तक पहुँचना चाहिए। मंत्री द्वारा किए गए इस औचक निरीक्षण ने प्रशासनिक महकमे में हलचल पैदा कर दी है, जिससे उम्मीद है कि आगामी समय में आंगनवाड़ी और शिशु निकेतन केंद्रों की कार्यप्रणाली में सुधार देखने को मिलेगा।