पंजाब में शिक्षा क्रांति: मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुरू किया भारत का सबसे बड़ा ‘मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा’ कार्यक्रम

पंजाब में शिक्षा क्रांति: मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुरू किया भारत का सबसे बड़ा 'मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा' कार्यक्रम

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सरकारी स्कूलों के लिए भारत का सबसे बड़ा मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा कार्यक्रम शुरू किया। 3.6 लाख छात्राओं को मिलेगा लाभ।

चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य की स्कूली छात्राओं के स्वास्थ्य और आत्मविश्वास को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। ‘मासिक धर्म स्वच्छता दिवस’ (Menstrual Hygiene Day – 28 मई) के अवसर पर, पंजाब सरकार ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली किशोरियों के लिए भारत के सबसे बड़े ‘मासिक धर्म स्वास्थ्य शिक्षा कार्यक्रम’ (Menstrual Health Education Programme) का शुभारंभ किया है।

3.6 लाख छात्राओं को मिलेगा सीधा लाभ

इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का विस्तार करते हुए, सरकार ने पंजाब के सभी 23 जिलों के सरकारी स्कूलों में कक्षा 6 से 10 तक की 3.6 लाख से अधिक छात्राओं को इसके दायरे में लिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार का मानना है कि स्वास्थ्य शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह जीवन कौशल का हिस्सा होनी चाहिए।

बड़े पैमाने पर तैयारी: 7,200 से अधिक शिक्षक प्रशिक्षित

इस कार्यक्रम को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सरकार ने व्यापक प्रशिक्षण अभियान चलाया है। अब तक 7,200 से अधिक शिक्षकों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है। इसके अलावा, राज्य भर में लगभग 100 ‘मास्टर ट्रेनर्स’ तैयार किए गए हैं, जो स्कूलों में इस पाठ्यक्रम को सही ढंग से क्रियान्वित करने के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगे।

पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद विस्तार

यह निर्णय राज्य के सभी 23 जिलों के 100 से अधिक सरकारी स्कूलों में चलाए गए एक सफल ‘पायलट प्रोजेक्ट’ के बाद लिया गया है। इस दौरान किए गए सर्वेक्षण में यह पाया गया कि मासिक धर्म स्वास्थ्य के बारे में सही जानकारी मिलने से छात्राओं के आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, साथ ही स्कूलों में उनकी भागीदारी भी बढ़ी है।

‘स्वस्थ पंजाब-शिक्षित पंजाब’ का संकल्प

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस पहल पर जोर देते हुए कहा कि पंजाब सरकार ‘स्वस्थ पंजाब-शिक्षित पंजाब’ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा:

“हमारी बेटियों को सही जानकारी प्रदान करना और उन्हें समाज में व्याप्त झिझक से बाहर निकालना हमारी प्राथमिकता है। मासिक धर्म के बारे में जागरूकता न केवल उनके स्वास्थ्य के लिए जरूरी है, बल्कि उनकी शिक्षा की निरंतरता के लिए भी आवश्यक है।”

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