शिवसेना (UBT) में संभावित टूट से उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका। 7 बागी सांसद शिंदे गुट से मुलाकात की तैयारी में।
शिवसेना के स्थापना दिवस (19 जून) से ठीक पहले महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आता दिख रहा है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) में टूट की खबरें जोरों पर हैं। दिल्ली में जारी राजनीतिक गतिविधियों ने ठाकरे खेमे की नींद उड़ा दी है। खबरों के अनुसार, पार्टी के 7 सांसद एक नया गुट बनाने की तैयारी में हैं और आज उनकी मुलाकात लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से होने की संभावना है। यह घटनाक्रम न केवल ठाकरे परिवार के लिए एक बड़ा झटका है, बल्कि राज्य की राजनीति के बदलते समीकरणों को भी दर्शाता है।
बागियों का दिल्ली दरबार और शिंदे गुट से नजदीकी
आज सुबह की राजनीतिक हलचल के केंद्र में दिल्ली है। उद्धव गुट के 7 बागी सांसद एक नया गुट बनाने के उद्देश्य से लोकसभा अध्यक्ष के सरकारी आवास पर उनसे मुलाकात करेंगे। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे और सांसद श्रीकांत शिंदे की भूमिका मानी जा रही है। प्राप्त सूचनाओं के अनुसार, ये बागी सांसद दिल्ली में श्रीकांत शिंदे के आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक करेंगे, जिसमें स्वयं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के भी शामिल होने की चर्चा है। यह बैठक स्पष्ट संकेत देती है कि ये सांसद अब अपनी राहें जुदा कर सीधे ‘बालासाहेबंची शिवसेना’ (शिंदे गुट) की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
संभावित बागी: ठाकरे खेमे को बड़ा झटका
जिन सांसदों के नाम इस बगावत की सूची में प्रमुखता से लिए जा रहे हैं, उनमें संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, नागेश पाटिल आष्टीकर, ओमप्रकाश राजे निंबालकर, भानुसाहेब वाकचौरे और संजय जाधव शामिल हैं। इनके अलावा नासिक सीट से सांसद राजाभाउ वाजे का नाम भी इस सूची में जुड़ गया है। यदि ये सभी सांसद अलग गुट बनाने में सफल होते हैं, तो लोकसभा में उद्धव ठाकरे की ताकत काफी कम हो जाएगी। यह उन नेताओं की सूची है जिन्हें उद्धव ठाकरे का वफादार माना जाता था, लेकिन मौजूदा राजनीतिक समीकरणों ने उन्हें पाला बदलने के लिए मजबूर कर दिया है।
उद्धव गुट की जवाबी कार्रवाई: स्पीकर को चिट्ठी और व्हिप का दांव
अपनी पार्टी को बिखरने से बचाने के लिए उद्धव ठाकरे खेमा पूरी तरह सक्रिय हो गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा स्पीकर को एक औपचारिक पत्र लिखकर मांग की है कि किसी भी नए गुट को मान्यता न दी जाए। ठाकरे गुट का तर्क है कि ये सांसद पार्टी के साथ विश्वासघात कर रहे हैं और उन्हें अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए।
इसके साथ ही, उद्धव ठाकरे ने दिल्ली में पार्टी के सभी सांसदों की एक आपातकालीन बैठक बुलाई है। इस बैठक के लिए आधिकारिक रूप से ‘व्हिप’ जारी किया गया है, जिसका अर्थ है कि सभी सांसदों की उपस्थिति अनिवार्य है। यदि कोई सांसद इस बैठक से अनुपस्थित रहता है, तो उस पर दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
मातोश्री की शक्ति और कार्यकर्ताओं का समर्थन
दिल्ली में जहां दलबदल का खेल चल रहा है, वहीं मुंबई में मातोश्री के बाहर का माहौल पूरी तरह अलग है। वफादार शिवसैनिकों ने मातोश्री के बाहर पोस्टर लगाकर उद्धव ठाकरे के प्रति अपना अटूट समर्थन जाहिर किया है। पोस्टरों पर बालासाहेब ठाकरे, उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे की तस्वीरें लगाई गई हैं, जिन पर बड़े अक्षरों में लिखा है—”हम सदैव ठाकरे के साथ हैं।” यह पोस्टर इस बात का मनोवैज्ञानिक संदेश है कि भले ही नेता सत्ता के लालच में दल बदल लें, लेकिन असली शिवसेना की पहचान अभी भी ठाकरे परिवार से ही है।
क्या खत्म हो जाएगा ठाकरे का प्रभाव?
यह राजनीतिक घटनाक्रम 19 जून को होने वाले शिवसेना स्थापना दिवस के ठीक पहले हो रहा है, जिससे इसकी गंभीरता और बढ़ जाती है। यदि यह टूट होती है, तो यह उद्धव ठाकरे के लिए एक बड़ी चुनौती होगी कि वे पार्टी के शेष कैडर को कैसे एकजुट रखते हैं। एक तरफ जहां एकनाथ शिंदे गुट पूरी ताकत के साथ ठाकरे की जड़ों को कमजोर करने में लगा है, वहीं उद्धव ठाकरे के लिए अब अपनी पार्टी का अस्तित्व और विचारधारा बचाना एक बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होगी। आने वाले कुछ घंटे महाराष्ट्र की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं।