दिल्ली के शास्त्री पार्क में भीषण आग, प्रशासन पर भड़की AAP—”लापरवाही की हद पार, कब जागेगी सरकार?”

दिल्ली के शास्त्री पार्क में भीषण आग, प्रशासन पर भड़की AAP—"लापरवाही की हद पार, कब जागेगी सरकार?"

दिल्ली के शास्त्री पार्क फर्नीचर मार्केट में भीषण आग। समय पर मदद न मिलने से भड़के स्थानीय लोग, AAP ने भाजपा सरकार की लापरवाही पर उठाए सवाल। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

दिल्ली के शास्त्री पार्क फर्नीचर मार्केट में शुक्रवार देर रात लगी भीषण आग ने एक बार फिर दिल्ली प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस अग्निकांड में व्यापारियों का लाखों का सामान जलकर राख हो गया है। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है, क्योंकि फायर ब्रिगेड की गाड़ियों के समय पर न पहुँचने के कारण आग ने विकराल रूप ले लिया। स्थिति तब और बिगड़ गई जब आक्रोशित भीड़ ने फायर ब्रिगेड की गाड़ियों पर पथराव कर दिया।

“आग से ज्यादा प्रशासन की लापरवाही खतरनाक”

आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस घटना को भाजपा सरकार की घोर लापरवाही करार दिया है। पार्टी का कहना है कि दिल्ली में लगातार हो रही आग की घटनाएं यह साबित करती हैं कि प्रशासन पूरी तरह विफल है। AAP नेताओं ने तंज कसते हुए कहा, “आखिर कब तक दिल्लीवाले भाजपा के इस निकम्मेपन और लापरवाही की कीमत अपनी जान और माल से चुकाते रहेंगे? प्रशासन की सुस्ती ने इस छोटी सी घटना को एक बड़ी आपदा में बदल दिया।”

स्थानीय लोगों का फूटा गुस्सा

प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि फायर ब्रिगेड को सूचना मिलने के काफी देर बाद गाड़ियाँ पहुँचीं, जिसके चलते आग पास की अन्य दुकानों तक फैल गई। आक्रोशित लोगों का आरोप है कि शुरुआत में केवल दो गाड़ियाँ भेजी गईं, जो इस बड़े मार्केट की आग को काबू करने के लिए नाकाफी थीं। हालांकि, दिल्ली फायर सर्विस (DFS) ने देरी के आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि दमकल की 25-30 गाड़ियों ने मौके पर पहुँचकर आग पर काबू पाया।

लगातार बढ़ते अग्निकांडों पर सवाल

आम आदमी पार्टी ने याद दिलाया कि दिल्ली में हाल के महीनों में यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले पालम अग्निकांड में भी प्रशासन की इसी तरह की ढिलाई और हाइड्रोलिक लिफ्ट के खराब होने के कारण कई लोगों की जान गई थी। AAP का आरोप है कि दिल्ली का फायर विभाग बुनियादी सुविधाओं और संसाधनों की कमी से जूझ रहा है, और भाजपा सरकार केवल दावे करने में व्यस्त है।

पार्टी ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की जानलेवा लापरवाही को रोका जा सके।

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