मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उद्योगों के लिए फ्रेट सब्सिडी और प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों पर सब्सिडी की घोषणा की। पढ़ें हरियाणा सरकार के उद्योग-हितैषी फैसलों की विस्तृत जानकारी।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मिडिल ईस्ट संकट के कारण वैश्विक स्तर पर प्रभावित हो रहे उद्योगों को राहत देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। दिल्ली में NCR के इंडस्ट्री एवं ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान, मुख्यमंत्री ने राज्य के उद्योग जगत को हरसंभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया।
“कठिन समय में सरकार उद्योग जगत के साथ मजबूती से खड़ी”
बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का असर हरियाणा के उद्योगों पर भी पड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया, “यह समय चुनौतियों का है, लेकिन हरियाणा सरकार अपने उद्यमियों और व्यापारियों के साथ मजबूती से खड़ी है। हम उद्योगों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें नई गति देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
मुख्यमंत्री द्वारा की गई प्रमुख घोषणाएं:
नई दिल्ली में मुख्यमंत्री श्री @NayabSainiBJP ने NCR के इंडस्ट्री एवं ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर मिडिल ईस्ट संकट से उद्योगों पर पड़ रहे प्रभाव पर विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कठिन समय में हरियाणा सरकार उद्योग जगत के साथ मजबूती से खड़ी है।
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— DPR Haryana (@DiprHaryana) May 22, 2026
उद्योग प्रतिनिधियों के सुझावों को ध्यान में रखते हुए, मुख्यमंत्री ने प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए निम्नलिखित घोषणाएं कीं:
- फ्रेट सब्सिडी में बढ़ोत्तरी: लॉजिस्टिक खर्च को कम करने के लिए फ्रेट सब्सिडी को बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
- टेस्टिंग इक्विपमेंट पर सब्सिडी: उद्योगों में तकनीकी गुणवत्ता सुधारने के लिए नई मशीनरी और टेस्टिंग उपकरणों पर सब्सिडी प्रदान की जाएगी।
- IMT क्षेत्रों में प्रोत्साहन: औद्योगिक मॉडल टाउनशिप (IMT) क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक बसों (EV Buses) और प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों पर विशेष सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी।
- इलेक्ट्रिक स्कूल बसों पर विचार: व्यापारियों द्वारा दिए गए सुझाव पर सरकार ने इलेक्ट्रिक स्कूल बसों के उपयोग को प्रोत्साहित करने की दिशा में गंभीरता से कार्य शुरू कर दिया है।
बैठक में दिखी प्रशासनिक सक्रियता
इस महत्वपूर्ण बैठक में कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इन घोषणाओं को जल्द से जल्द धरातल पर उतारा जाए ताकि प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र में सुगमता बढ़ सके।
उद्योग प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इन निर्णयों से न केवल उद्योगों की लागत कम होगी, बल्कि हरियाणा में निवेश का माहौल और अधिक बेहतर होगा।