शेयर बाजार में सोमवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स 500 अंक से ज्यादा टूटा और निफ्टी 24,250 के नीचे आ गया। जानिए बाजार गिरने की बड़ी वजहें।
घरेलू शेयर बाजार में सोमवार, 17 अगस्त को शुरुआती कारोबार के बाद बिकवाली का दबाव लगातार बढ़ता गया। सुबह के कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक कमजोरी के साथ कारोबार करते नजर आए। देर सुबह तक सेंसेक्स 500 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी भी 24,250 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। निवेशकों के बीच कमजोर वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को लेकर चिंता दिखाई दी। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, एफएमसीजी और रियल्टी शेयरों में जोरदार बिकवाली ने बाजार की गिरावट को और गहरा कर दिया। हालांकि, ऑटो और धातु क्षेत्र के कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार की गिरावट कुछ हद तक नियंत्रित रही। सुबह 11:02 बजे तक बीएसई सेंसेक्स 512.76 अंक यानी 0.66 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,496.49 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं, एनएसई निफ्टी 129.95 अंक यानी 0.53 प्रतिशत फिसलकर 24,236.05 पर पहुंच गया।
आईटी और पीएसयू बैंक शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव
सोमवार के कारोबार में कई प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली, लेकिन सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र सबसे ज्यादा दबाव में रहा। निफ्टी आईटी सूचकांक 1.37 प्रतिशत की गिरावट के साथ दिन का सबसे कमजोर प्रमुख सेक्टर बना हुआ था। आईटी शेयरों में कमजोरी का असर व्यापक बाजार की धारणा पर भी पड़ा। इसके अलावा निफ्टी पीएसयू बैंक में 1.17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप से जुड़े वित्तीय सेवा शेयर भी दबाव में रहे और निफ्टी मिडस्मॉल फाइनेंशियल सर्विसेज सूचकांक 0.71 प्रतिशत नीचे था। इसी तरह मिडस्मॉल आईटी और दूरसंचार क्षेत्र में भी 0.79 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। सेक्टरों में एक साथ बिकवाली से बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति मजबूत होती दिखाई दी। निवेशक फिलहाल वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और आने वाले आर्थिक संकेतकों पर नजर बनाए हुए हैं।
कमजोर वैश्विक संकेतों ने बढ़ाई चिंता
घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ने के पीछे कमजोर वैश्विक संकेत भी एक महत्वपूर्ण कारण रहे। एशियाई बाजारों से भारतीय शेयर बाजार को कोई मजबूत सकारात्मक संकेत नहीं मिला। जापान का निक्केई 225 करीब 0.4 प्रतिशत ऊपर रहा, जबकि ऑस्ट्रेलिया का प्रमुख सूचकांक लगभग 0.3 प्रतिशत कमजोर हुआ। जापान को छोड़कर एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शेयरों का व्यापक सूचकांक लगभग सपाट रहा। दक्षिण कोरिया के बाजार सार्वजनिक अवकाश के कारण बंद रहे। दूसरी ओर अमेरिकी शेयर बाजार के वायदा संकेतक मामूली बढ़त दिखा रहे थे। एसएंडपी 500 वायदा करीब 0.1 प्रतिशत और नैस्डैक वायदा लगभग 0.2 प्रतिशत ऊपर था। यूरो स्टॉक्स 50 वायदा में भी करीब 0.2 प्रतिशत की बढ़त थी। इसके बावजूद वैश्विक बाजारों से ऐसा मजबूत संकेत नहीं मिला, जो भारतीय बाजार में जारी बिकवाली को रोक सके।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमत बनी बड़ी चिंता
निवेशकों की चिंता बढ़ाने वाला दूसरा प्रमुख कारण कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती है। ब्रेंट क्रूड करीब 89 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता रहा और दिन में लगभग 0.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने तेल बाजार को प्रभावित किया है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने की स्थिति में कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए ऊंची कच्चे तेल की कीमत चिंता का विषय होती है, क्योंकि इससे आयात बिल बढ़ सकता है और अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है। महंगा कच्चा तेल कंपनियों की लागत को भी प्रभावित कर सकता है, जिसका असर आगे चलकर मुनाफे और बाजार की धारणा पर दिखाई दे सकता है।
अमेरिका-ईरान तनाव पर निवेशकों की नजर
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ईरान की ओर से अमेरिका को हार स्वीकार करने की अपील और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तीखी प्रतिक्रिया ने भू-राजनीतिक चिंताओं को बढ़ाया है। ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिकी नागरिकों को लंबे समय तक ऊंची ईंधन कीमतों के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी। ऐसे घटनाक्रमों का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। निवेशक यह आकलन करने की कोशिश कर रहे हैं कि तनाव आगे किस दिशा में जाता है और इसका तेल की आपूर्ति तथा कीमतों पर कितना असर पड़ सकता है। यही अनिश्चितता शेयर बाजार में सतर्कता बढ़ा रही है।
चुनिंदा ऑटो और धातु शेयरों ने दिया सहारा
जहां बाजार के कई प्रमुख सेक्टरों में गिरावट देखने को मिली, वहीं कुछ ऑटो और धातु शेयरों में खरीदारी ने बाजार को कुछ सहारा दिया। इन क्षेत्रों के चुनिंदा शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। हालांकि, इन शेयरों की मजबूती व्यापक बाजार में जारी बिकवाली की भरपाई करने के लिए पर्याप्त नहीं रही। बाजार में गिरावट के दौरान निवेशक आम तौर पर मजबूत कंपनियों और अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में अपनी स्थिति बनाए रखने की कोशिश करते हैं। यही वजह है कि कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी के बावजूद प्रमुख सूचकांकों पर दबाव कायम रहा।
निवेशकों के लिए सतर्क रहने का दौर
सोमवार के कारोबार से संकेत मिलता है कि घरेलू शेयर बाजार फिलहाल कई बाहरी जोखिमों के प्रभाव में है। एक तरफ वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत हैं, तो दूसरी ओर कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव निवेशकों की चिंता बढ़ा रहे हैं। सेंसेक्स का 500 अंकों से अधिक टूटना और निफ्टी का 24,250 के नीचे आना बाजार में बिकवाली की तीव्रता को दर्शाता है। आने वाले कारोबार में निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों, कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर बनी रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में सुधार आता है तो बाजार को राहत मिल सकती है, लेकिन तनाव बढ़ने की स्थिति में उतार-चढ़ाव आगे भी जारी रहने की आशंका बनी रहेगी।