सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे की चेतावनी: वित्तीय क्षेत्र को साइबर हमलों से निपटने के लिए मजबूत साइबर लचीलापन जरूरी

सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे की चेतावनी: वित्तीय क्षेत्र को साइबर हमलों से निपटने के लिए मजबूत साइबर लचीलापन जरूरी

 

सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने वित्तीय क्षेत्र में साइबर सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया। जानिए साइबर हमलों से बचाव और साइबर लचीलेपन की जरूरत क्यों बढ़ी।

भारतीय वित्तीय क्षेत्र को तेजी से बदलते साइबर खतरे के बीच अपनी सुरक्षा रणनीति में बड़ा बदलाव करने की जरूरत है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने सोमवार को कहा कि वित्तीय संस्थानों को केवल समय-समय पर साइबर सुरक्षा नियमों का अनुपालन करने की व्यवस्था से आगे बढ़कर लगातार और जोखिम आधारित साइबर लचीलापन विकसित करना होगा। उनका कहना है कि साइबर हमले अब पहले की तुलना में अधिक जटिल, आपस में जुड़े हुए और तेजी से विकसित होने वाले हो गए हैं। ऐसे माहौल में केवल नियमों का पालन करना पर्याप्त नहीं है। वित्तीय संस्थानों को ऐसी व्यवस्था तैयार करनी होगी, जो संभावित साइबर हमलों की पहचान पहले कर सके और हमला होने की स्थिति में उसके प्रभाव को सीमित करते हुए कारोबार को जल्द से जल्द सामान्य स्थिति में ला सके। पांडे की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब वित्तीय क्षेत्र डिजिटल तकनीक पर तेजी से निर्भर हो रहा है और ऑनलाइन लेनदेन, डिजिटल निवेश, क्लाउड सेवाओं तथा आपस में जुड़े तकनीकी नेटवर्क का विस्तार लगातार हो रहा है।

साइबर हमले होंगे या नहीं, सवाल अब यह नहीं

मुंबई में 17 से 21 अगस्त 2026 तक आयोजित किए जा रहे सेबी के साइबर डिफेंस सम्मेलन में बोलते हुए तुहिन कांत पांडे ने साइबर सुरक्षा की बदलती जरूरतों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वित्तीय संस्थानों के सामने अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह नहीं है कि साइबर हमला होगा या नहीं, बल्कि यह है कि हमला होने के बाद संस्थान कितनी तेजी से उसे पहचान सकता है, नियंत्रित कर सकता है, उससे उबर सकता है और उससे सीख लेकर अपनी सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बना सकता है। यह सोच साइबर सुरक्षा के पारंपरिक मॉडल से अलग है। पहले संस्थान मुख्य रूप से सुरक्षा उपायों, नियमों और अनुपालन की जांच पर ध्यान केंद्रित करते थे। अब उन्हें लगातार निगरानी, वास्तविक समय में खतरे की पहचान और तेज प्रतिक्रिया क्षमता पर अधिक जोर देना होगा। साइबर लचीलापन का उद्देश्य केवल हमले को रोकना नहीं, बल्कि हमले के बावजूद महत्वपूर्ण वित्तीय सेवाओं को चालू रखना भी है।

लगातार बढ़ रहे हैं साइबर खतरे

डिजिटल वित्तीय व्यवस्था के विस्तार के साथ साइबर अपराधियों के लिए संभावित हमलों के रास्ते भी बढ़े हैं। बैंकिंग, शेयर बाजार, निवेश प्लेटफॉर्म, वित्तीय संस्थान और अन्य डिजिटल सेवाएं एक-दूसरे से तेजी से जुड़ रही हैं। किसी एक प्रणाली में सुरक्षा की कमजोरी का प्रभाव दूसरी प्रणालियों तक भी पहुंच सकता है। यही वजह है कि साइबर खतरों को केवल किसी एक कंपनी या संस्थान की समस्या के तौर पर नहीं देखा जा सकता। आपूर्ति श्रृंखला, तीसरे पक्ष की सेवाएं, तकनीकी साझेदार और डिजिटल बुनियादी ढांचा भी सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हो गए हैं। साइबर अपराधी लगातार नई तकनीकों और रणनीतियों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे वित्तीय संस्थानों के सामने खतरे की प्रकृति भी बदल रही है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था को स्थिर रखने के बजाय लगातार अपडेट और मजबूत करना आवश्यक है।

जोखिम आधारित सुरक्षा पर जोर

तुहिन कांत पांडे के संदेश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा जोखिम आधारित साइबर सुरक्षा है। इसका मतलब यह है कि हर वित्तीय संस्था को अपने सबसे महत्वपूर्ण सिस्टम, डेटा और सेवाओं की पहचान करके उनके जोखिम के अनुसार सुरक्षा उपाय तैयार करने चाहिए। सभी प्रणालियों के लिए एक जैसा सुरक्षा मॉडल अपनाना हमेशा प्रभावी नहीं होता। जिन प्रणालियों पर निवेशकों, ग्राहकों या बाजार के संचालन की अधिक निर्भरता है, उन्हें अधिक मजबूत सुरक्षा और निगरानी की जरूरत होती है। संस्थानों को संभावित खतरों का लगातार आकलन करना चाहिए और अपनी सुरक्षा रणनीति को नए जोखिमों के अनुसार बदलते रहना चाहिए। इससे साइबर हमले की स्थिति में नुकसान को कम करने और महत्वपूर्ण सेवाओं को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

हमले की पहचान और तेज प्रतिक्रिया सबसे अहम

साइबर लचीलेपन में किसी हमले को जल्द पहचानना सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक है। यदि किसी साइबर घटना का पता देर से चलता है, तो हमलावर को सिस्टम में अधिक नुकसान पहुंचाने का समय मिल सकता है। इसलिए वित्तीय संस्थानों को लगातार निगरानी, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और तेजी से प्रतिक्रिया देने वाली व्यवस्था पर निवेश करना होगा। इसके साथ ही संस्थानों के पास स्पष्ट प्रतिक्रिया योजना भी होनी चाहिए, ताकि साइबर घटना होने पर यह तय करने में समय न लगे कि कौन-सी टीम क्या कदम उठाएगी। हमले को नियंत्रित करने के बाद प्रभावित सेवाओं को सुरक्षित तरीके से बहाल करना और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए आवश्यक सुधार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

साइबर घटना से सीखना भी जरूरी

साइबर लचीलापन का एक अहम हिस्सा किसी घटना के बाद उससे सीखना है। किसी हमले को केवल एक नुकसान या तकनीकी समस्या मानकर आगे बढ़ जाना पर्याप्त नहीं है। संस्थानों को यह समझना होगा कि हमला कैसे हुआ, सुरक्षा व्यवस्था में कौन-सी कमी थी और भविष्य में उस कमजोरी को कैसे दूर किया जा सकता है। नियमित परीक्षण, अभ्यास और सुरक्षा समीक्षा संस्थानों को वास्तविक हमले के लिए बेहतर तरीके से तैयार कर सकते हैं। कर्मचारियों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करना भी इस पूरी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि कई साइबर घटनाओं में मानवीय गलती जोखिम को बढ़ा सकती है।

पूरे वित्तीय तंत्र की सामूहिक जिम्मेदारी

वित्तीय क्षेत्र में साइबर सुरक्षा केवल किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। बाजार से जुड़े विभिन्न संस्थानों, तकनीकी सेवा प्रदाताओं और नियामकीय निकायों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। साइबर खतरों से जुड़ी जानकारी साझा करने, संभावित जोखिमों की पहचान करने और आपात स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया देने के लिए सामूहिक व्यवस्था विकसित करनी होगी। वित्तीय प्रणाली जितनी अधिक आपस में जुड़ती जाएगी, उतना ही जरूरी होगा कि सभी हिस्सों की सुरक्षा मजबूत हो। सेबी चेयरमैन का संदेश इसी व्यापक बदलाव की ओर संकेत करता है कि साइबर सुरक्षा को केवल अनुपालन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि वित्तीय स्थिरता और संस्थागत भरोसे का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाना चाहिए।

डिजिटल वित्त के दौर में साइबर लचीलापन बने प्राथमिकता

भारत का वित्तीय क्षेत्र तेजी से डिजिटल हो रहा है और इस बदलाव से ग्राहकों तथा बाजार प्रतिभागियों को सुविधा मिल रही है। लेकिन डिजिटल विस्तार के साथ साइबर जोखिम भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में वित्तीय संस्थानों को केवल हमले रोकने की कोशिश करने के बजाय हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना होगा। तुहिन कांत पांडे का जोर इसी बात पर है कि संस्थानों की क्षमता इस आधार पर आंकी जानी चाहिए कि वे किसी साइबर हमले का कितनी तेजी से पता लगाते हैं, उसे कितनी प्रभावी तरीके से नियंत्रित करते हैं, कितनी जल्दी सामान्य स्थिति में लौटते हैं और घटना से क्या सीखते हैं। आने वाले समय में लगातार निगरानी, जोखिम आधारित सुरक्षा, तेज प्रतिक्रिया और मजबूत रिकवरी व्यवस्था भारतीय वित्तीय क्षेत्र की साइबर सुरक्षा रणनीति के प्रमुख स्तंभ बन सकते हैं।

 

 

 

 

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