दिल्ली के शाहदरा में लगी आग में 9 लोगों की मौत। आम आदमी पार्टी ने केंद्र की बीजेपी सरकार से पूछा- दिल्ली फायर ब्रिगेड को मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाए? क्या यही है चार इंजन की सरकार?
दिल्ली में मातम, आखिर कब जागेगी बीजेपी सरकार?
दिल्ली के शाहदरा में लगी भीषण आग ने एक बार फिर पूरी राजधानी को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में 9 लोगों की जान चली गई है। आम आदमी पार्टी ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए सीधे तौर पर केंद्र की बीजेपी सरकार और उनके प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। ‘आप’ का कहना है कि जब दिल्ली में कानून-व्यवस्था और फायर ब्रिगेड जैसे महत्वपूर्ण विभाग केंद्र के नियंत्रण में हैं, तो फिर बार-बार ऐसे हादसों में दिल्लीवाले अपनी जान क्यों गंवा रहे हैं? यह महज एक हादसा नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की विफलता है।
चार इंजन वाली सरकार और खोखले दावे
कब जागेगी बीजेपी सरकार?
दिल्ली के शाहदरा में आग लगने से करीब 9 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। चार इंजन वाली भाजपा सरकार बताए कि उसने दिल्ली फायर ब्रिगेड को मजबूत बनाने के लिए क्या कदम उठाए?
बेहतर उपकरणों की क्या व्यवस्था की? कितनी ट्रेनिंग दी? ऐसे हादसों में बार-बार लोगों की जान… https://t.co/Wu0eWapQcd
— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) May 3, 2026
आम आदमी पार्टी ने तंज कसते हुए पूछा कि खुद को “चार इंजन वाली सरकार” बताने वाली बीजेपी बताए कि उसने दिल्ली फायर सर्विस (DFS) को आधुनिक बनाने के लिए अब तक क्या किया है? दिल्ली के घने इलाकों में जब आग लगती है, तो दमकल विभाग के पास संकरी गलियों के लिए बेहतर उपकरण और आधुनिक तकनीक क्यों नहीं होती? क्या बीजेपी सरकार ने फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों की ट्रेनिंग और नए उपकरणों की खरीद पर कोई ध्यान दिया है? पिछले कुछ सालों में दिल्ली में अग्निकांड की घटनाओं में इजाफा हुआ है, लेकिन प्रशासन अभी भी पुराने ढर्रे पर चल रहा है।
पुराने हादसों से नहीं लिया कोई सबक
अभी कुछ ही दिन पहले दिल्ली में एक और बड़ा हादसा हुआ था जिसमें कई लोगों की जान गई थी। उस वक्त भी सरकार ने बड़े-बड़े वादे किए थे और जांच बिठाने की बात कही थी। लेकिन शाहदरा की घटना साबित करती है कि उन जांच रिपोर्टों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। सरकार ने पिछले हादसे के बाद न तो सुरक्षा ऑडिट कराया और न ही अवैध रूप से चल रही खतरनाक इकाइयों पर लगाम लगाई। आखिर कब तक दिल्ली की जनता बीजेपी की इस प्रशासनिक नाकामी की कीमत अपनी जान देकर चुकाती रहेगी?