एसबीआई म्यूचुअल फंड का अदानी ग्रुप में बड़ा निवेश: अदानी एंटरप्राइजेज और एनर्जी में 5,747 करोड़ का दांव

एसबीआई म्यूचुअल फंड का अदानी ग्रुप में बड़ा निवेश: अदानी एंटरप्राइजेज और एनर्जी में 5,747 करोड़ का दांव

 

एसबीआई म्यूचुअल फंड ने अदानी एंटरप्राइजेज और अदानी एनर्जी सॉल्यूशंस में 5,747 करोड़ रुपये का निवेश किया। जानें क्या है इस डील के मायने और बाजार पर इसका असर।

हाल ही में भारतीय शेयर बाजार में एक बड़ी हलचल देखने को मिली, जब एसबीआई म्यूचुअल फंड (SBI Mutual Fund) ने अदानी ग्रुप की दो प्रमुख कंपनियों में भारी हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया। इस ब्लॉक डील के जरिए एसबीआई म्यूचुअल फंड ने अदानी एंटरप्राइजेज (Adani Enterprises) और अदानी एनर्जी सॉल्यूशंस (Adani Energy Solutions) में कुल 5,747.55 करोड़ रुपये का निवेश किया है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, एसबीआई म्यूचुअल फंड ने अदानी एंटरप्राइजेज के 1.64 करोड़ शेयर खरीदे, जो कंपनी में लगभग 1.3 प्रतिशत की हिस्सेदारी के बराबर है। वहीं, अदानी एनर्जी सॉल्यूशंस में 63.65 लाख शेयर यानी 0.52 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी गई है। यह निवेश न केवल बाजार में अदानी समूह के प्रति संस्थागत निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है, बल्कि म्यूचुअल फंड उद्योग के बड़े खिलाड़ियों की निवेश रणनीति में आए बदलाव को भी रेखांकित करता है।

जीक्यूजी पार्टनर्स की एग्जिट और एसबीआई का प्रवेश

इस पूरे सौदे का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें विक्रेता कौन था। इन दोनों ट्रांजेक्शन में बेचने वाली संस्था अमेरिका स्थित निवेश फर्म ‘जीक्यूजी पार्टनर्स’ (GQG Partners) थी। जीक्यूजी पार्टनर्स ने अपने एफिलिएट फंड, ‘जीक्यूजी पार्टनर्स इमर्जिंग मार्केट्स इक्विटी फंड’ के माध्यम से उतनी ही मात्रा में शेयर बेचे जितनी एसबीआई म्यूचुअल फंड ने खरीदी। दिलचस्प बात यह है कि जीक्यूजी पार्टनर्स ने अदानी समूह की कंपनियों में काफी पहले से निवेश कर रखा है और समय-समय पर मुनाफे की बुकिंग करती रही है। जीक्यूजी का बाहर निकलना और एसबीआई म्यूचुअल फंड का उसी मात्रा में शेयर खरीदना यह संकेत देता है कि घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) अदानी समूह की कंपनियों के भविष्य के प्रति आशावादी हैं।

लगातार बढ़ रहा एसबीआई का एक्सपोजर

यह निवेश कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि एसबीआई म्यूचुअल फंड का अदानी समूह के प्रति बढ़ता झुकाव पिछले कुछ महीनों से स्पष्ट था। अभी इस ताजा सौदे को हुए एक महीना भी नहीं बीता था कि एसबीआई म्यूचुअल फंड ने मई के महीने में ही अदानी एंटरप्राइजेज में 0.45 प्रतिशत हिस्सेदारी लगभग 1,435 करोड़ रुपये में खरीदी थी। यह निरंतरता दर्शाती है कि फंड हाउस अदानी समूह के भविष्य के विकास, विशेषकर इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी सेक्टर के विस्तार को लेकर काफी आश्वस्त है। जब देश का सबसे बड़ा म्यूचुअल फंड हाउस किसी विशेष ग्रुप में बार-बार पैसा लगाता है, तो यह बाजार के अन्य छोटे निवेशकों और रिटेल पार्टिसिपेंट्स के लिए एक मजबूत संकेत होता है।

शेयर बाजार की प्रतिक्रिया और कंपनियों का प्रदर्शन

निवेश की खबर के बाद बाजार ने अदानी समूह के शेयरों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। शुक्रवार के सत्र के अंत में, अदानी एंटरप्राइजेज के शेयर NSE पर 2.36 प्रतिशत की बढ़त के साथ 3,043 रुपये प्रति शेयर पर बंद हुए। वहीं, अदानी एनर्जी सॉल्यूशंस ने भी निवेशकों को खुश किया और 3.87 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,578.80 रुपये के स्तर पर बंद हुआ। यह तेजी दर्शाती है कि निवेशकों का भरोसा समूह के प्रति फिर से लौट रहा है और एसबीआई जैसे बड़े नाम का जुड़ना शेयरों के भाव में स्थिरता और मजबूती लाने का काम कर रहा है।

संस्थागत निवेश और भविष्य के संकेत

बाजार के जानकारों और विश्लेषकों की नजर अब आने वाले महीनों पर टिकी है। सवाल यह है कि क्या एसबीआई म्यूचुअल फंड का यह बड़ा निवेश अन्य घरेलू और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs और DIIs) को अदानी ग्रुप की तरफ आकर्षित करेगा? आमतौर पर, जब कोई बड़ी घरेलू संस्था बड़े पैमाने पर निवेश करती है, तो यह एक ‘क्रेडिबिलिटी फैक्टर’ के रूप में काम करता है। यह निवेश अदानी समूह के लिए उस समय आया है जब समूह अपने ग्रीन एनर्जी और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

क्या यह लंबी अवधि का दांव है?

एसबीआई म्यूचुअल फंड का यह निवेश स्पष्ट रूप से लंबी अवधि के नजरिए से देखा जाना चाहिए। भारतीय म्यूचुअल फंड हाउस अब उन कंपनियों पर दांव लगा रहे हैं जो भारत की जीडीपी ग्रोथ और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में रीढ़ की हड्डी की तरह काम कर सकती हैं। अदानी एंटरप्राइजेज और एनर्जी सॉल्यूशंस का पोर्टफोलियो काफी विविधतापूर्ण है, जो इसे लंबी अवधि के निवेशकों के लिए आकर्षक बनाता है। हालांकि, बाजार में निवेश हमेशा जोखिमों के अधीन होता है, लेकिन एसबीआई की इस सक्रियता ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारतीय बाजार का नेतृत्व अब घरेलू संस्थागत निवेशक कर रहे हैं और वे अदानी समूह की कंपनियों के ‘वैल्यू क्रिएशन’ को लेकर काफी गंभीर हैं।

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