अमेरिकी जॉब्स डेटा के बाद वैश्विक बाजारों में भारी बिकवाली। S&P 500 और नैस्डैक में बड़ी गिरावट। जानें ब्याज दरों और फेडरल रिजर्व का इस पर क्या असर हुआ।
शुक्रवार का दिन वैश्विक वित्तीय बाजारों के लिए बेहद निराशाजनक रहा। निवेशकों ने अंधाधुंध बिकवाली करते हुए न केवल अमेरिकी शेयरों, बल्कि बॉन्ड, बिटकॉइन और यहाँ तक कि सोने (gold) जैसे सुरक्षित माने जाने वाले निवेश विकल्पों को भी नहीं बख्शा। वॉल स्ट्रीट पर मची इस खलबली का असर पूरे विश्व के बाजारों पर दिखा। S&P 500 सूचकांक में 2.64% की भारी गिरावट दर्ज की गई, जो अक्टूबर के बाद से उसका सबसे खराब प्रदर्शन है और इसने नौ सप्ताह से चली आ रही बढ़त के सिलसिले को भी तोड़ दिया है। टेक्नोलॉजी क्षेत्र के शेयरों का दबदबा रखने वाला नैस्डैक कंपोजिट 4.18% गिर गया, जो अप्रैल 2025 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है। डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज में 695 अंकों की भारी गिरावट देखी गई। बाजार में डर का पैमाना कहे जाने वाले ‘VIX इंडेक्स’ में 40% का उछाल आना यह दर्शाता है कि निवेशकों के बीच अनिश्चितता का स्तर कितना ऊंचा हो गया है।
‘अच्छी खबर’ बनी ‘बुरी खबर’: बाजार का विरोधाभास
वित्तीय बाजारों में अक्सर एक गहरा विरोधाभास देखने को मिलता है, जहाँ ‘अच्छी आर्थिक खबर’ निवेशकों के लिए ‘बुरी खबर’ साबित हो जाती है। शुक्रवार को यही परिदृश्य देखने को मिला। अमेरिकी श्रम सांख्यिकी ब्यूरो (US Bureau of Labor Statistics) की रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया, जिसमें मई महीने में 1,72,000 नई नौकरियां जुड़ने की बात सामने आई। यह आंकड़ा बाजार के अनुमानों से कहीं अधिक था। आमतौर पर, मजबूत रोजगार आंकड़े एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था का प्रतीक माने जाते हैं, लेकिन मौजूदा आर्थिक वातावरण में इसने निवेशकों की नींद उड़ा दी है। उन्हें डर है कि अर्थव्यवस्था की यह मजबूती फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरों में कटौती करने की राह में रोड़ा बन सकती है।
ब्याज दरों पर बदलता समीकरण और फेडरल रिजर्व की भूमिका
निवेशक पिछले काफी समय से इस उम्मीद में थे कि फेडरल रिजर्व आने वाले महीनों में ब्याज दरों में कटौती शुरू करेगा। हालांकि, मजबूत लेबर मार्केट ने इस उम्मीद को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है। ईरान-इजरायल तनाव के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी पहले से ही मुद्रास्फीति (inflation) का दबाव बनाए हुए है। अब रोजगार के इन मजबूत आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व को और अधिक आक्रामक रुख अपनाने के लिए मजबूर कर दिया है। बाजार अब इस बात की आशंका जता रहा है कि फेडरल रिजर्व न केवल ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊँचा बनाए रखेगा, बल्कि इस साल के अंत तक दरों में एक और बढ़ोतरी (rate hike) पर भी विचार कर सकता है। सीएमई फेडवॉच (CME FedWatch) के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में दरें बढ़ने की संभावना अब बढ़कर 43% हो गई है, जो महज एक महीने पहले 26% थी।
बिटकॉइन से गोल्ड तक: हर तरफ बिकवाली
बाजार की गिरावट केवल शेयरों तक सीमित नहीं रही। जब अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक सुरक्षित पनाहगाहों की ओर रुख करते हैं, लेकिन इस बार स्थिति कुछ अलग थी। बिटकॉइन और गोल्ड में भी भारी गिरावट देखी गई। इसका कारण यह है कि जब निवेशकों को ‘लिक्विडिटी क्रंच’ (नकदी की कमी) का डर सताता है, तो वे अपने सबसे सफल निवेशों को भी बेचकर नकदी इकट्ठा करने की कोशिश करते हैं। अत्यधिक ब्याज दरों का वातावरण जोखिम भरी संपत्तियों (risk assets) के लिए कभी भी अच्छा नहीं होता, और यही कारण है कि क्रिप्टो और बुलियन मार्केट में भी बिकवाली का दबाव देखा गया।
निवेशकों के लिए चुनौती भरा दौर
वर्तमान में बाजार एक नाजुक दौर से गुजर रहा है। एक तरफ महंगाई का डर है, तो दूसरी तरफ आर्थिक मजबूती का दोहरा दबाव है। निवेशकों के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण है क्योंकि उन्हें अब फेडरल रिजर्व की हर बैठक और हर नए आर्थिक आंकड़े पर बारीक नजर रखनी होगी। आने वाले समय में, यदि ऊर्जा की कीमतें नियंत्रित नहीं होती हैं और रोजगार बाजार इसी तरह गर्म रहता है, तो फेडरल रिजर्व का रुख और अधिक कठोर हो सकता है, जो बाजारों को और अस्थिर बना सकता है।
सतर्कता ही एकमात्र उपाय
वैश्विक बाजार अभी उस दौर में है जहाँ भावनाओं (sentiments) का खेल सबसे बड़ा है। मजबूत रोजगार डेटा ने बाजार की उन उम्मीदों को आईना दिखा दिया है, जो कम ब्याज दरों के सहारे टिकी हुई थीं। हालांकि, लंबी अवधि के निवेशक इसे एक सुधार के रूप में देख सकते हैं, लेकिन अल्पकालिक व्यापारियों के लिए यह एक स्पष्ट संकेत है कि सावधानी बरतना ही बेहतर है। वॉल स्ट्रीट की यह गिरावट इस बात की चेतावनी है कि जब तक ब्याज दरों और मुद्रास्फीति के बीच का तालमेल नहीं बैठता, तब तक बाजारों में उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी रहेगा। निवेशकों को अब केवल आर्थिक आंकड़ों पर ही नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक घटनाओं पर भी पैनी नजर रखनी होगी।