गिफ्ट निफ्टी के कमजोर संकेतों के बीच भारतीय बाजार में गिरावट की आशंका। निफ्टी के लिए महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों के साथ सोमवार का पूरा बाजार विश्लेषण।
सोमवार, 8 जून को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सुस्त होने की पूरी संभावना है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण ‘गिफ्ट निफ्टी’ (Gift Nifty) के संकेत हैं, जो शुक्रवार को भारी गिरावट के साथ 23,091 के स्तर पर बंद हुआ था। यह निफ्टी के पिछले बंद स्तर के मुकाबले लगभग 356 अंक या 1.52% की बड़ी गिरावट को दर्शाता है। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी इक्विटी बाजारों में मची बिकवाली और ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की चिंताओं ने निवेशकों के मनोबल को कमजोर कर दिया है। पिछले कारोबारी सत्र में, एनएसई निफ्टी 50 मामूली गिरावट के साथ 23,366.70 पर बंद हुआ था, जबकि सेंसेक्स ने भी 116.67 अंकों की गिरावट दर्ज की थी।
बाजार को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक
एनरिच मनी (Enrich Money) के सीईओ पोनमुडी आर. के अनुसार, भारतीय बाजार वर्तमान में चार बड़े कारकों के प्रति बेहद संवेदनशील है: मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति, कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का निवेश प्रवाह और वैश्विक बॉन्ड यील्ड। अमेरिका में हाल ही में आए मजबूत ‘जॉब्स डेटा’ ने 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड को 4.5% के पार पहुँचा दिया है। इससे निवेशकों में यह डर बढ़ गया है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती में देरी कर सकता है। इस ‘रिस्क-ऑफ’ मूड के चलते दुनिया भर के बाजारों, विशेषकर टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली का माहौल बना हुआ है। भारत के संदर्भ में, ब्रेंट क्रूड की कीमतें 93 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जो बाजार के लिए एक बड़ी चुनौती है।
संस्थागत निवेशकों का रुख और विदेशी पूंजी का बहिर्वाह
बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो 5 जून को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय बाजारों से 8,776.25 करोड़ रुपये की भारी निकासी की। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 9,133.57 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को सहारा देने का भरसक प्रयास किया। बावजूद इसके, एफआईआई की निरंतर बिकवाली बाजार के लिए एक बड़ा सिरदर्द बनी हुई है। जानकारों का मानना है कि जब तक विदेशी निवेशकों का यह बिकवाली का सिलसिला नहीं थमता, बाजार में मजबूती आना कठिन है।
तकनीकी विश्लेषण: महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर
रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (रिसर्च) अजीत मिश्रा के अनुसार, व्यापक सूचकांक का रुझान कमजोर बना हुआ है, हालांकि बड़े शेयरों के मिले-जुले प्रदर्शन ने गिरावट की रफ्तार को कुछ हद तक सीमित रखा है। तकनीकी रूप से, निफ्टी एक व्यापक दायरे (consolidation range) में फंसा हुआ है। अजीत मिश्रा का सुझाव है कि जब तक निफ्टी निर्णायक रूप से 23,700 के स्तर को पार नहीं कर लेता, तब तक ‘सेल-ऑन-राइज’ (बढ़त पर बिकवाली) की रणनीति अपनाना ही समझदारी होगी।
नीचे की ओर, यदि निफ्टी 23,150 के स्तर को तोड़ता है, तो यह 23,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर की ओर गिर सकता है। ऊपर की ओर, 23,500-23,550 का स्तर तत्काल बाधा (hurdle) के रूप में काम कर रहा है। यदि बाजार इस स्तर को पार करने में सफल रहता है, तभी तेजी का रुख (bullish momentum) वापस लौट सकता है, जिससे निफ्टी 23,750 से 24,000 के स्तर तक जा सकता है।
सोमवार के लिए निवेशकों की रणनीति
सोमवार के सत्र में 23,250-23,150 का सपोर्ट बैंड सबसे महत्वपूर्ण रहने वाला है। जानकारों की राय है कि शुरुआती गिरावट के बाद बाजार इस दायरे के आसपास स्थिरता (stabilization) की कोशिश कर सकता है। यदि बाजार 23,150 के ऊपर बना रहता है, तो निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन इस सपोर्ट जोन के नीचे जाने पर बिकवाली का दबाव काफी बढ़ सकता है। ट्रेडर्स को सलाह दी जाती है कि वे सतर्क रहें और स्टॉप-लॉस के साथ काम करें। भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में जारी उछाल बाजार में उतार-चढ़ाव को बनाए रखेंगे, इसलिए इस सप्ताह ‘सावधानी’ ही निवेशकों का सबसे बड़ा हथियार होगी।