संजय सिंह ने जस्टिस स्वर्ण कांता पर साधा निशाना, केजरीवाल के सत्याग्रह को बताया जायज।

संजय सिंह ने जस्टिस स्वर्ण कांता पर साधा निशाना, केजरीवाल के सत्याग्रह को बताया जायज।

संजय सिंह ने ‘X’ पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए बड़ा आरोप लगाया। जानें क्यों AAP सांसद ने केजरीवाल के कोर्ट बहिष्कार और ‘सत्याग्रह’ का समर्थन किया है।

संजय सिंह ने साधा निशाना और ‘X’ पर उठाए गंभीर सवाल

दिल्ली आबकारी नीति मामले में जारी कानूनी खींचतान के बीच आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने न्यायपालिका की निष्पक्षता को लेकर तीखा हमला बोला है। संजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक बयान साझा करते हुए जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की वैचारिक पृष्ठभूमि पर सवाल उठाए और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के ‘सत्याग्रह’ के फैसले को पूरी तरह जायज ठहराया। संजय सिंह का मानना है कि जब न्याय मिलने की परिस्थितियाँ धुंधली होने लगें, तो गांधीवादी मार्ग ही एकमात्र उचित रास्ता बचता है।

RSS कार्यक्रम और ‘प्रमोशन’ के बयान पर संजय सिंह का आरोप

संजय सिंह ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में एक कथित घटना का जिक्र करते हुए न्यायपालिका की तटस्थता को घेरा। उन्होंने लिखा कि यदि कोई जज आरएसएस (RSS) जैसे वैचारिक संगठन के कार्यक्रम में जाकर यह कहे कि “जब-जब आपके कार्यक्रम में आती हूँ, मेरा प्रमोशन हो जाता है”, तो ऐसी स्थिति में निष्पक्ष न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती। संजय सिंह का सीधा इशारा जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की ओर था। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसी वैचारिक जुड़ाव के कारण अरविंद केजरीवाल ने उनकी अदालत में न तो कोई बहस करने और न ही कोई दलील पेश करने का निर्णय लिया है।

केजरीवाल का ‘सत्याग्रह’ और हितों के टकराव की जंग

संजय सिंह ने जोर देकर कहा कि इस विवादास्पद परिस्थिति में केजरीवाल का गांधीवादी सत्याग्रह ही सबसे प्रभावशाली रास्ता है। उन्होंने ‘X’ पर लिखा कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से अब कोई कानूनी उम्मीद नहीं रखी जाएगी और उनकी विचारधारा जो चाहे वो निर्णय ले। संजय सिंह और अन्य ‘आप’ नेता लगातार यह दावा कर रहे हैं कि जज का ‘अधिवक्ता परिषद’ से जुड़ाव और उनके परिवार के सदस्यों का केंद्र सरकार के वकील पैनल में होना ‘हितों के टकराव’ (Conflict of Interest) का मामला है। संजय सिंह के इन बयानों ने दिल्ली की राजनीति में न्यायिक और राजनैतिक गतिरोध को और अधिक बढ़ा दिया है।

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