सी.पी. राधाकृष्णन: राज्यसभा में AAP के 7 सांसदों का भाजपा में विलय मंजूर: सभापति ने दी हरी झंडी, अब केजरीवाल के पास बचे केवल 3 सांसद।

सी.पी. राधाकृष्णन: राज्यसभा में AAP के 7 सांसदों का भाजपा में विलय मंजूर: सभापति ने दी हरी झंडी, अब केजरीवाल के पास बचे केवल 3 सांसद।

राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने राघव चड्ढा सहित AAP के 7 सांसदों के भाजपा में विलय को स्वीकार कर लिया है। जानें संजय सिंह की अयोग्यता याचिका और राज्यसभा के नए समीकरण।

दिल्ली और पंजाब की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) को सोमवार को राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा संवैधानिक झटका लगा। राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने आम आदमी पार्टी के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय को आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया है। इस फैसले के बाद उच्च सदन (Rajya Sabha) में अरविंद केजरीवाल की पार्टी की सदस्य संख्या 10 से घटकर अब मात्र 3 रह गई है। वहीं, इस विलय के साथ ही राज्यसभा में भाजपा की ताकत बढ़कर 113 हो गई है, जिससे केंद्र सरकार के लिए सदन में विधायी कार्यों को गति देना आसान हो जाएगा।

7 सांसदों का भाजपा में विलय और आधिकारिक घोषणा

राज्यसभा सचिवालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सभापति ने उन सात सांसदों की याचिका को मंजूरी दे दी है जिन्होंने शुक्रवार को भाजपा के साथ विलय का अनुरोध किया था। इन सांसदों में राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता के नाम शामिल हैं। अब राज्यसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इन सात सदस्यों के नाम भाजपा की सूची में दिखाई दे रहे हैं। इन सांसदों ने शुक्रवार को इस्तीफा देते हुए आरोप लगाया था कि केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी अपने मूल सिद्धांतों, मूल्यों और नैतिकताओं से भटक गई है, जिसके कारण उन्होंने भाजपा का दामन थामने का निर्णय लिया।

अयोग्यता की मांग और ‘आप’ की कानूनी लड़ाई

सांसदों के पाला बदलने के बाद आम आदमी पार्टी ने इस कदम को असंवैधानिक बताते हुए मोर्चा खोल दिया है। रविवार को ‘आप’ सांसद संजय सिंह ने सभापति सी.पी. राधाकृष्णन के समक्ष एक याचिका दायर कर इन सातों सांसदों की सदस्यता रद्द करने (Termination) और उन्हें अयोग्य घोषित (Disqualification) करने की मांग की। संजय सिंह का तर्क है कि पार्टी छोड़ने वाले इन सांसदों ने मतदाताओं और पार्टी के भरोसे को तोड़ा है। हालांकि, सात सांसदों (जो कि कुल संख्या का दो-तिहाई से अधिक हैं) के एक साथ जाने के कारण इसे ‘दलबदल’ के बजाय ‘विलय’ (Merger) की श्रेणी में माना गया है, जिससे उनकी सदस्यता पर तत्काल खतरा टलता नजर आ रहा है।

राजनीतिक समीकरणों पर असर और भाजपा की बढ़ती ताकत

इस बड़े राजनीतिक फेरबदल ने विपक्षी गठबंधन ‘I.N.D.I.A.’ के भीतर भी खलबली मचा दी है। राज्यसभा में अब भाजपा 113 सदस्यों के साथ बहुमत के बेहद करीब पहुँच गई है। आप के लिए यह दोहरा झटका है, क्योंकि जिन सात नेताओं ने पार्टी छोड़ी है, वे न केवल सांसद थे बल्कि पंजाब और दिल्ली में पार्टी के मुख्य रणनीतिकार और बड़े चेहरे भी थे। संदीप पाठक और राघव चड्ढा जैसे संगठनात्मक ढांचा तैयार करने वाले नेताओं के जाने से आगामी चुनावों में केजरीवाल की टीम के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। फिलहाल, संजय सिंह के नेतृत्व में ‘आप’ इस फैसले को चुनौती देने और अयोग्यता की याचिका पर कानूनी राय लेने की तैयारी कर रही है।

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