लद्दाख में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब, LG वी.के. सक्सेना ने जताई खुशी

लद्दाख में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब, LG वी.के. सक्सेना ने जताई खुशी

लेह के जीवत्सल में भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरहवा अवशेषों के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने इसे ‘मानवता का सागर’ बताया और पीएम मोदी का आभार जताया।

लद्दाख में उमड़ा जनसैलाब: भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन के लिए लगी लंबी कतारें

लद्दाख के उपराज्यपाल (LG) वी.के. सक्सेना ने लेह के जीवत्सल (Jivetsal) में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के सार्वजनिक दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ की सराहना की है। शुक्रवार, 1 मई से शुरू हुई इस ऐतिहासिक प्रदर्शनी के दूसरे दिन भी सुबह 6:30 बजे से ही लोगों का हुजूम देखा गया। एलजी सक्सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि जीवत्सल के खुले मैदानों से लेकर मुख्य पहुंच मार्ग तक श्रद्धालुओं की लंबी और शांत कतारें लगी हुई हैं। उन्होंने इस दृश्य को ‘मानवता का सागर’ बताते हुए कहा कि लद्दाख की कड़कड़ाती ठंडी हवाओं के बावजूद शहर का वातावरण आध्यात्मिक उत्साह से भरा हुआ है।

प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के प्रति आभार: ‘जीवन में एक बार मिलने वाला अवसर’

उपराज्यपाल ने इस गौरवशाली अवसर के लिए केंद्र सरकार का विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने लिखा, “मैं माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और माननीय गृह मंत्री अमित शाह का आभारी हूँ कि उन्होंने लद्दाख के लोगों को भारत और विश्व की इस कालजयी विरासत के दर्शन करने का जीवन में एक बार मिलने वाला दुर्लभ अवसर प्रदान किया।” शहर में बुजुर्गों से लेकर स्कूली बच्चों तक, सभी श्रद्धालु अपनी बारी का इंतजार करते हुए शांतिपूर्वक मंत्रोच्चार कर रहे हैं। गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी लद्दाख के दो दिवसीय दौरे पर हैं, जहाँ उन्होंने भगवान बुद्ध के इन पवित्र अवशेषों की पहली अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी में हिस्सा लिया।

पवित्र अवशेषों का यात्रा कार्यक्रम और वैश्विक महत्व

पिपरहवा (Piprahwa) से लाए गए ये पवित्र अवशेष लेह में 10 मई तक सार्वजनिक दर्शन के लिए जीवत्सल में रहेंगे। इसके बाद, 11 और 12 मई को ज़ांस्कर (Zanskar) में और फिर 13 से 14 मई तक लेह के ‘धर्म केंद्र’ में प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। अंततः 15 मई को इन अवशेषों को वापस दिल्ली ले जाया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि इन अवशेषों का वैश्विक महत्व हाल के वर्षों में और बढ़ गया है, विशेष रूप से जुलाई 2025 में एक सदी से अधिक समय के बाद विदेश से भारत वापस लाए गए पुरावशेषों के कारण। इस भव्य

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