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बीसीसीआई रोहित शर्मा और हार्दिक पांड्या की फिटनेस को लेकर चिंतित है। क्या दोनों खिलाड़ी 2027 वर्ल्ड कप के लिए पूरी तरह फिट हो पाएंगे? जानिए पूरी खबर।
भारतीय क्रिकेट टीम का ध्यान अब पूरी तरह से 2027 के वनडे वर्ल्ड कप की तैयारियों पर केंद्रित है, जिसकी मेजबानी दक्षिण अफ्रीका अगले साल अक्टूबर-नवंबर में करेगा। इस बड़े टूर्नामेंट की योजना को अंतिम रूप देने के दौरान बीसीसीआई और चयन समिति के सामने सबसे बड़ी चुनौती खिलाड़ियों की फिटनेस बनी हुई है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, टीम के दो मुख्य खिलाड़ी—कप्तान रोहित शर्मा और स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या—बोर्ड के लिए ‘फिटनेस चिंता’ का बड़ा कारण बन गए हैं। हालांकि दोनों को अफगानिस्तान के खिलाफ आगामी वनडे सीरीज के लिए चुना गया है, लेकिन उनके करियर की लंबी अवधि और फिटनेस के स्तर पर बोर्ड अब गंभीर विचार कर रहा है।
हार्दिक पांड्या: 10 ओवर की गेंदबाजी का सवाल
हार्दिक पांड्या भारत के लिए एक अनिवार्य खिलाड़ी हैं क्योंकि टीम प्रबंधन को एक ऐसे क्वालिटी ‘पेस-बॉलिंग ऑलराउंडर’ की तलाश है, जो वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में गेंदबाजी और बल्लेबाजी दोनों में योगदान दे सके। बीसीसीआई की मुख्य चिंता यह है कि क्या हार्दिक अपने कोटे के पूरे 10 ओवर लगातार डाल सकते हैं या नहीं। इससे पहले जनवरी 2026 में, बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) ने उन्हें 10 ओवर गेंदबाजी करने के लिए अनफिट पाया था, जिसके चलते उन्हें न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज से बाहर होना पड़ा था।
आईपीएल 2026 में भी हार्दिक को पीठ की समस्याओं (बैक स्पाज्म) के कारण मुंबई इंडियंस के लिए तीन मैचों से बाहर बैठना पड़ा था। बीसीसीआई के एक सूत्र ने स्पष्ट किया है कि चयनकर्ता केवल हार्दिक के गेंदबाजी वर्कलोड को लेकर चिंतित हैं। यदि वह वनडे प्रारूप में 10 ओवर की अपनी जिम्मेदारी नहीं उठा पाते, तो टीम का संतुलन बिगड़ना तय है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पांड्या अपनी फिटनेस को कैसे साबित करते हैं और क्या वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी गेंदबाजी की लय वापस पाने में सक्षम होंगे।
रोहित शर्मा: क्या 50 ओवर की फील्डिंग है संभव?
रोहित शर्मा की फिटनेस को लेकर चिंताएं एक अलग स्तर पर हैं। बीसीसीआई को रोहित की बल्लेबाजी की क्षमता पर कोई संदेह नहीं है, लेकिन चिंता उनकी ‘फील्डिंग सहनशक्ति’ (Fielding Endurance) को लेकर है। वनडे इंटरनेशनल में 50 ओवर तक लगातार मैदान पर बने रहना एक शारीरिक परीक्षा है। आईपीएल में मुंबई इंडियंस ने अक्सर उन्हें ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ के रूप में इस्तेमाल किया है, जिससे उन्हें फील्डिंग के भार से कुछ राहत मिली है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय वनडे क्रिकेट में ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ जैसा कोई विकल्प मौजूद नहीं है।
रोहित को आईपीएल 2026 के दौरान हैमस्ट्रिंग की चोट का सामना करना पड़ा था, जिसके कारण वे लगभग तीन सप्ताह तक क्रिकेट से दूर रहे। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि उस दौरान उन्होंने बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) में अपनी फिटनेस रिपोर्ट भी नहीं दी थी। हालांकि वे वजन कम करने और फिट दिखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बीसीसीआई का मानना है कि उच्च-प्रदर्शन वाले खेलों (High-Performance Sport) का भार सहने के लिए उनके शरीर को और अधिक मजबूती की जरूरत है। 40 वर्ष की आयु के करीब पहुंच रहे रोहित के लिए अब रिकवरी का समय भी बढ़ गया है।
भविष्य की रणनीति और कड़े फैसले
बीसीसीआई और चयन समिति के लिए यह स्थिति एक दोराहे जैसी है। टीम प्रबंधन को 2027 वर्ल्ड कप के लिए एक ऐसी टीम चाहिए जो हर स्थिति में फिट और मजबूत हो। सूत्र के मुताबिक, अब बोर्ड के लिए रोहित और हार्दिक की फिटनेस को गंभीरता से लेना अनिवार्य हो गया है। अगर ये खिलाड़ी बोर्ड द्वारा निर्धारित फिटनेस मानकों पर खरे नहीं उतरते, तो चयनकर्ताओं को बड़े और कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में फिटनेस का कोई शॉर्टकट नहीं होता, और 50 ओवर के प्रारूप के लिए यह और भी अधिक महत्वपूर्ण है।
फिटनेस बनाम अनुभव
अनुभव का अपना महत्व है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में फिटनेस के साथ समझौता करना बड़ी हार का कारण बन सकता है। भारतीय क्रिकेट अब एक ऐसे बदलाव के दौर से गुजर रहा है जहाँ केवल कौशल (Skills) ही नहीं, बल्कि शारीरिक फिटनेस भी टीम में जगह बनाने की पहली शर्त है। हार्दिक की गेंदबाजी क्षमता और रोहित की फील्डिंग क्षमता पर उठते सवाल यह स्पष्ट करते हैं कि आगामी सीरीज उनकी फिटनेस का अंतिम ‘अग्निपरीक्षा’ हो सकती है। प्रशंसकों को उम्मीद है कि ये दोनों दिग्गज न केवल फिट होंगे, बल्कि 2027 वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम का नेतृत्व भी करेंगे। अंततः, भारतीय क्रिकेट की सफलता की कुंजी उन्हीं खिलाड़ियों के पास है जो मैदान पर अपनी शारीरिक सीमाओं से ऊपर उठकर प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं। बीसीसीआई अब केवल मैदान पर रनों और विकेटों को ही नहीं, बल्कि शरीर की सहनशक्ति को भी सफलता का पैमाना मान रहा है।