Table of Contents
मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में आज रवि शास्त्री के नाम पर स्टैंड का अनावरण होगा। जानें शास्त्री ने क्यों कहा कि उनकी कामयाबी में मीडिया का बड़ा हाथ है।
भारतीय क्रिकेट के दिग्गज, पूर्व कप्तान और पूर्व कोच रवि शास्त्री के लिए आज, गुरुवार 9 अप्रैल का दिन बेहद भावुक और ऐतिहासिक है। मुंबई के प्रतिष्ठित वानखेड़े स्टेडियम के प्रेस बॉक्स के ठीक नीचे स्थित ‘लेवल 1’ स्टैंड का नाम अब आधिकारिक तौर पर ‘रवि शास्त्री स्टैंड’ रखा जाएगा।
इस सम्मान पर अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए शास्त्री ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के लिए लिखे अपने लेख में कई पुरानी यादें ताजा कीं। उन्होंने उस दौर को याद किया जब इसी मैदान पर उन्हें दर्शकों के गुस्से का सामना करना पड़ा था।
जब ‘हाय-हाय’ के नारों से आहत हुए थे पिता
रवि शास्त्री ने बताया कि एक समय ऐसा था जब वानखेड़े की भीड़ उन्हें जमकर ट्रोल करती थी। उन्होंने याद किया:
“सालों तक मेरा परिवार मेरा हर मैच देखने आता था। फिर एक दौर आया जब मुझे मैदान पर बू (Booe) किया जाने लगा। ‘रवि शास्त्री हाय-हाय’ के नारे लगते थे। मेरे पिता एक डॉक्टर थे, वह इन नारों से इतने आहत हुए कि उन्होंने कहा—’मैं अब कभी मैच देखने नहीं आऊंगा।’ और वह फिर कभी नहीं आए।”
शास्त्री ने आगे बताया कि समय के साथ वही नफरत सम्मान में बदल गई। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, “बाद में मैं कोच बना और फिर कमेंटेटर। वही ‘हाय-हाय’ अंततः ‘हाय-हाय’ (Hi-Hi) में बदल गया।”
प्रेस बॉक्स के पास स्टैंड होने का खास महत्व
शास्त्री के लिए इस स्टैंड की लोकेशन भी काफी मायने रखती है। उन्होंने कहा:
“यह बहुत दिलचस्प है कि मेरे नाम का स्टैंड प्रेस बॉक्स के बिल्कुल पास है। एक खिलाड़ी जो सामने वाले स्टैंड से मैच देखते हुए बड़ा हुआ, उसके लिए यह बड़ी बात है। मीडिया के बिना मैं आज जो हूँ, वह कभी नहीं होता।”
मां की खुशी और परिवार की मौजूदगी
रवि शास्त्री ने बताया कि स्टैंड के नामकरण की खबर सुनकर उनकी मां सबसे ज्यादा गौरवान्वित महसूस कर रही हैं। आज होने वाले इस कार्यक्रम में उनका पूरा परिवार, करीबी दोस्त और पुराने साथी खिलाड़ी मौजूद रहेंगे।
दिलीप सरदेसाई और एकनाथ सोल्कर के नाम पर भी ‘गेट’
गुरुवार को वानखेड़े स्टेडियम में केवल रवि शास्त्री ही नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के अन्य दिग्गजों को भी सम्मानित किया जाएगा। स्टेडियम के समर्पित द्वारों (Gates) का अनावरण दिलीप सरदेसाई, एकनाथ सोल्कर और डायना एडुल्जी के सम्मान में किया जाएगा।