राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में यूपी सरकार की SIT ने सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच सोमवार को इस पर सुनवाई करेगी।
अयोध्या के भव्य राम मंदिर में आए चढ़ावे (दान) की कथित चोरी के बहुचर्चित मामले में आज एक बेहद बड़ा और महत्वपूर्ण डेवलपमेंट हुआ है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मामले की जांच के लिए गठित की गई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अपनी विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) में दाखिल कर दी है। कानूनी और सुरक्षा संवेदनशीलता को देखते हुए यह रिपोर्ट पूरी तरह से सीलबंद लिफाफे में शीर्ष अदालत के समक्ष प्रस्तुत की गई है। इस बड़े घटनाक्रम के बाद अब सभी की निगाहें सोमवार को होने वाली सुनवाई पर टिक गई हैं, जहां चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की विशेष पीठ इस मामले पर आगे का रुख तय करेगी।
सुप्रीम कोर्ट में चार अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई
इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में चार अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिन पर सोमवार को एक साथ सुनवाई होनी है। इससे पहले, बीते 13 जुलाई को शीर्ष अदालत ने इन याचिकाओं पर त्वरित सुनवाई के लिए सहमति जताई थी। अदालत ने उस दौरान स्पष्ट किया था कि कुछ रिट याचिकाओं में यह बात सामने आई है कि मामले से जुड़ी प्राथमिकी (FIR) पहले ही दर्ज हो चुकी हैं और राज्य सरकार ने जांच के लिए एसआईटी का गठन भी कर दिया है। इसी के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की एसआईटी को निर्देश दिया था कि वह अब तक की जांच की स्टेटस रिपोर्ट अदालत के सामने पेश करे, जिसका पालन करते हुए आज एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।
याचिकाकर्ताओं की मांग: सीबीआई जांच और कैग (CAG) ऑडिट की अपील
मामले को लेकर अलग-अलग याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिकाओं में कई बड़ी और गंभीर मांगें अदालत के सामने रखी हैं:
- नरेंद्र कुमार गोस्वामी की याचिका: याचिकाकर्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने पूरे मामले की निष्पक्षता के लिए इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने राम मंदिर का प्रबंधन देख रहे ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के सभी वित्तीय लेनदेन का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से ऑडिट कराने की भी अपील की है।
- अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव की याचिका: इन दोनों याचिकाकर्ताओं ने ट्रस्ट के कामकाज और प्रशासनिक गतिविधियों में सामने आई कथित वित्तीय अनियमितताओं और अन्य अवैध कृत्यों का हवाला दिया है। उनका कहना है कि इस पूरे घोटाले की जांच सीबीआई की अगुवाई में गठित एक विशेष एसआईटी से कराई जानी चाहिए।
- सांसद सुधाकर सिंह की याचिका: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह की ओर से दायर तीसरी याचिका में मांग की गई है कि इस पूरे मामले की सीबीआई जांच सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी में हो। इसके साथ ही उन्होंने ट्रस्ट के खातों का व्यापक फोरेंसिक ऑडिट कराने का भी अनुरोध किया है।
- हिंदू धर्म परिषद की याचिका: परिषद की ओर से दायर चौथी याचिका में भी शीर्ष अदालत की देखरेख में इन गंभीर आरोपों की जांच सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है।
13 जून को हुआ था SIT का गठन; ट्रस्ट में बड़े इस्तीफे
राम मंदिर में दान की राशि में बड़े पैमाने पर हेराफेरी और चोरी के आरोपों के बाद मचे हड़कंप के बीच, 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने मंदिर ट्रस्ट के ही लिखित अनुरोध पर एक उच्चस्तरीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया था। इस विशेष टीम में तीन बेहद वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है, जिनमें लखनऊ मंडल के कमिश्नर विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस. और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन शामिल हैं।
इस घोटाले के सामने आने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट की साख पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए थे। इसके परिणामस्वरूप, बीते 6 जुलाई को राम मंदिर ट्रस्ट की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई। इस बैठक में एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे को तत्काल प्रभाव से मंजूर कर लिया गया था। संगठन को सुचारू रूप से चलाने के लिए कृष्ण गोपाल को अंतरिम महासचिव की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
आठ आरोपी गिरफ्तार; बैंक ले जाने और काउंटिंग से जुड़ा था नेटवर्क
जांच एजेंसियों ने इस मामले में अब तक त्वरित कार्रवाई करते हुए आठ नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पकड़े गए आरोपियों में रमाकांत उर्फ टिन्नू यादव, सुभाष श्रीवास्तव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडे, मनीष यादव और रमाशंकर मिश्रा शामिल हैं।
जांच में यह बात सामने आई है कि ये सभी आरोपी मंदिर में आने वाले दान की रकम की गिनती (काउंटिंग) की प्रक्रिया से सीधे तौर पर जुड़े हुए थे। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से छह पेशेवर कैशियर हैं, जो रोजाना आने वाले कैश का मिलान करते थे। वहीं, टिन्नू यादव नामक मुख्य आरोपी का काम इस पूरी कैश काउंटिंग की सुपरवाइजिंग करना और एकत्रित धन को सुरक्षित रूप से बैंक तक पहुंचाना था। दूसरा प्रमुख आरोपी सुभाष श्रीवास्तव इन सभी छह कैशियरों की निगरानी करता था और राम मंदिर के चढ़ावे का पूरा हिसाब-किताब अपने पास रखता था। इतने बड़े नेटवर्क की संलिप्तता सामने आने के बाद अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट एसआईटी की सीलबंद रिपोर्ट को देखने के बाद क्या नया आदेश जारी करता है।