राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी पर AAP ने SIT जांच को बताया ढकोसला। अरविंद केजरीवाल ने पूछा- “बिना FIR के किस कानून के तहत बनी SIT? मामले की जांच CBI या ED से क्यों नहीं?”
श्री राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के आरोपों को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मंदिर प्रबंधन और सरकार द्वारा गठित ‘स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम’ (SIT) पर गंभीर सवाल उठाए हैं। केजरीवाल ने इसे पूरे मामले को दबाने की एक साजिश करार दिया है।
“बिना FIR के SIT कैसी जांच करेगी?”
अरविंद केजरीवाल ने यूपी सरकार से तीखे शब्दों में पूछा है कि आखिर किस कानून और किस धारा के तहत इस SIT का गठन किया गया है? उन्होंने कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा, “कानून के जानकारों के अनुसार, किसी भी आपराधिक मामले में FIR दर्ज किए बिना SIT का गठन नहीं हो सकता। यदि चोरी हुई है, तो FIR क्यों नहीं दर्ज की गई? सरकार स्पष्ट करे कि वह किसे बचाने की कोशिश कर रही है?”
प्रभावशाली लोगों को बचाने का आरोप
श्री राम मंदिर में चढ़ावे के चोरी की जांच करने के लिए यू पी सरकार द्वारा बनायी गई SIT फ़र्ज़ी है। यू पी सरकार बताए कि किस क़ानून की किस धारा में ये SIT बनायी गई है? कानूनन बिना FIR के SIT नहीं बनती।
ये SIT केवल मामले को रफ़ा दफ़ा करने, ऊँचे लोगों को बचाने और आम लोगों की आँखों… pic.twitter.com/45VMjA0jjW
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) June 24, 2026
AAP ने स्पष्ट आरोप लगाया है कि SIT का गठन केवल मामले को ‘हश-अप’ (दबाने) और प्रभावशाली लोगों को सुरक्षा देने के लिए किया गया है। केजरीवाल ने कहा, “यह कदम केवल आम जनता की आंखों में धूल झोंकने जैसा है। करोड़ों हिंदुओं और सनातनियों की आस्था का प्रश्न है, फिर सरकार जांच में इतनी पारदर्शिता से क्यों डर रही है?”
CBI और ED जांच की मांग
पार्टी ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए इसे CBI (केंद्रीय जांच ब्यूरो) और ED (प्रवर्तन निदेशालय) के हवाले किया जाए। अरविंद केजरीवाल ने कहा, “अगर सरकार के पास छुपाने के लिए कुछ नहीं है, तो FIR दर्ज करने में क्या आपत्ति है? हर सनातनी जानना चाहता है कि आखिर राम मंदिर के चढ़ावे में हेराफेरी का जिम्मेदार कौन है?”
जनता की आस्था का अपमान
आम आदमी पार्टी का कहना है कि भगवान राम के प्रति करोड़ों लोगों की अटूट आस्था है। मंदिर में दान-पात्रों से हुई कथित चोरी और अनियमितताएं न केवल आर्थिक अपराध हैं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं का अपमान भी है। सरकार को तुरंत अपनी हठधर्मिता छोड़नी चाहिए और इस मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश देने चाहिए।