राम मंदिर चंदा घोटाला: संजय राउत ने नागपुर के ‘राम रक्षा आंदोलन’ के लिए CM देवेंद्र फडणवीस को भेजा न्योता

राम मंदिर चंदा घोटाला: संजय राउत ने नागपुर के 'राम रक्षा आंदोलन' के लिए CM देवेंद्र फडणवीस को भेजा न्योता

 

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने अयोध्या राम मंदिर चंदे में कथित घोटाले के खिलाफ नागपुर में होने वाले ‘राम रक्षा आंदोलन’ में शामिल होने के लिए CM देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा है।

महाराष्ट्र की राजनीति में राम मंदिर और हिंदुत्व के मुद्दे पर एक बार फिर से राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक पत्र लिखकर एक अनोखा और राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील आमंत्रण दिया है। राउत ने फडणवीस को 18 जुलाई को नागपुर में उनकी पार्टी द्वारा आयोजित किए जा रहे ‘राम रक्षा आंदोलन’ में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। यह आंदोलन अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए मिले चंदे में कथित तौर पर हुए करोड़ों रुपये के गबन और वित्तीय धोखाधड़ी के खिलाफ आयोजित किया जा रहा है।

इस आंदोलन का नेतृत्व शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे स्वयं करने वाले हैं। यह आंदोलन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के गृह नगर नागपुर में शनिवार को होने जा रहा है, जिससे इस पूरे घटनाक्रम की राजनीतिक अहमियत और भी बढ़ गई है।

संजय राउत का पत्र और मुख्यमंत्री पर राजनीतिक कटाक्ष

संजय राउत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लिखे अपने पत्र में उनके पुराने बयानों का हवाला देते हुए उन पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। राउत ने इस पत्र को अपने फेसबुक पेज पर भी साझा किया। उन्होंने पत्र में लिखा कि मुख्यमंत्री फडणवीस अक्सर सार्वजनिक मंचों से यह कहते रहे हैं कि उन्होंने अयोध्या में राम जन्मभूमि को “मुक्त” कराने के आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया था।

राउत ने लिखा, “आज उसी भव्य राम मंदिर में चोरी, डकैती और धोखाधड़ी जैसे गंभीर अपराध कथित तौर पर सामने आ रहे हैं। यह दावा किया जा रहा है कि मंदिर के नाम पर आए चंदे में से सैकड़ों करोड़ रुपये का गबन किया गया है।” उन्होंने आगे कहा कि जिस राम जन्मभूमि आंदोलन के लिए देश के करोड़ों लोगों ने अपनी आस्था और मेहनत की कमाई समर्पित कर दी, वहां इस तरह के घोटाले होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

आरएसएस (RSS) की चिंता का दिया हवाला

संजय राउत ने अपने पत्र के जरिए न केवल मुख्यमंत्री को घेरा, बल्कि इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से भी जोड़ा। राज्यसभा सदस्य राउत ने दावा किया कि खुद आरएसएस ने भी अयोध्या में चंदे की कथित चोरी की खबरों पर गहरा “दुख” और चिंता व्यक्त की है।

राउत ने पत्र में आंदोलन के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा, “राम मंदिर से जुड़ी इस कथित लूट के खिलाफ जनता में जागरूकता पैदा करने के लिए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने इस ‘राम रक्षा’ अभियान की शुरुआत की है। इस बात को समझें कि ‘राम रक्षा’ का वास्तविक अर्थ है ‘भगवान श्री राम की रक्षा’।” उन्होंने फडणवीस से अपील की कि यदि वे वास्तव में राम भक्त हैं और राम आंदोलन से जुड़े रहे हैं, तो उन्हें दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस आंदोलन का हिस्सा बनना चाहिए।

अयोध्या में चंदे का कथित गबन और अब तक की कार्रवाई

राम मंदिर के चंदे में कथित वित्तीय हेराफेरी का यह मामला पिछले महीने (जून) में प्रमुखता से सामने आया था। इन गंभीर आरोपों के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार तुरंत हरकत में आई और मामलों की गहराई से जांच करने के लिए 13 जून को एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।

एसआईटी ने तेजी से कार्रवाई करते हुए इस मामले की छानबीन की और 23 जून को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। रिपोर्ट के आधार पर, 25 जून को इस मामले में एक औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई। यूपी पुलिस और जांच एजेंसियों ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनसे पूछताछ की जा रही है।

नागपुर में होने वाले आंदोलन के सियासी मायने

शिवसेना (यूबीटी) द्वारा इस आंदोलन के लिए नागपुर को चुनना बेहद सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। नागपुर न केवल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का गृह नगर है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का मुख्यालय भी है। उद्धव ठाकरे और संजय राउत इस आंदोलन के जरिए भाजपा के कट्टर हिंदुत्व के एजेंडे को उसी की जमीन पर चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं। विपक्ष का यह कदम यह दिखाने का प्रयास है कि वे भाजपा सरकार के कार्यकाल में भगवान राम के नाम पर हो रहे कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस राजनीतिक न्योते का क्या जवाब देते हैं।

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