भारत-जर्मनी संबंधों के 75 वर्ष: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बर्लिन में भारतीय प्रवासियों को किया संबोधित, द्विपक्षीय कूटनीति पर दिया जोर

Delighted to interact with the members of Indian community in Berlin. The Indian diaspora is the Living Bridge between India and Germany and it has evolved into a strong force in the recent years. During my interaction, I underlined India’s rapid economic growth and technological… pic.twitter.com/p7tCL61F6k— Rajnath Singh (@rajnathsingh) April 22, 2026

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जर्मनी यात्रा के दौरान बर्लिन में भारतीय प्रवासियों को संबोधित किया। उन्होंने भारत-जर्मनी के 75 साल के कूटनीतिक रिश्तों और आर्थिक साझेदारी पर जोर दिया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अपनी जर्मनी यात्रा के दौरान बर्लिन में भारतीय प्रवासियों से रूबरू हुए। इस दौरान उन्होंने भारत और जर्मनी के बीच बढ़ते रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों पर चर्चा की। कार्यक्रम की शुरुआत में जब दर्शक हंसे, तो राजनाथ सिंह ने बड़ी ही सादगी से जवाब देते हुए कहा, “मुझे आपकी हंसी का कारण समझ नहीं आ रहा, लेकिन आप सभी को यहाँ देखकर मेरे चेहरे पर मुस्कुराहट जरूर आ गई है।”

जर्मनी की वैश्विक साख पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में जर्मनी की एक अलग प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता है।

जर्मनी के विकास में भारतीय प्रवासियों का योगदान

रक्षा मंत्री ने जर्मनी की प्रगति में भारतीय समुदाय की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा, “जर्मनी के मूल निवासियों ने तो इस सफलता में योगदान दिया ही है, लेकिन भारतीय प्रवासियों की भूमिका को भी नकारा नहीं जा सकता। यह एक ऐसी सच्चाई है जिससे कोई इनकार नहीं कर सकता।” वर्तमान में जर्मनी में करीब 3.7 लाख भारतीय रह रहे हैं, जिन्हें सिंह ने दोनों देशों के बीच संबंधों का सबसे मजबूत स्तंभ बताया।

75 साल की कूटनीतिक यात्रा

राजनाथ सिंह ने बताया कि यह यात्रा भारत-जर्मनी द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने कहा:

  • ऐतिहासिक वर्ष: “यह वर्ष (2026) हमारे लिए विशेष है क्योंकि भारत और जर्मनी के औपचारिक राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे हो गए हैं।”
  • लोकतांत्रिक मूल्य: हमारे संबंध पूरी तरह से साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित हैं जो समय के साथ और मजबूत हुए हैं।
  • रक्षा सहयोग: सिंह ने स्पष्ट किया कि वे जर्मन रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस के निमंत्रण पर यहाँ आए हैं और यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

राजनीति से परे: कला और संस्कृति का जुड़ाव

रक्षा मंत्री ने रेखांकित किया कि दोनों देशों का जुड़ाव केवल रणनीतिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक भी है। उन्होंने बर्लिन की हम्बोल्ट यूनिवर्सिटी की अपनी यात्रा का जिक्र करते हुए कहा, “मुझे हम्बोल्ट विश्वविद्यालय में रवींद्रनाथ टैगोर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने का अवसर मिला। भारत और जर्मनी बड़े उत्साह के साथ अपनी कला और संस्कृति साझा करते हैं।”

आर्थिक और औद्योगिक साझेदारी

व्यापारिक संबंधों पर चर्चा करते हुए रक्षा मंत्री ने कुछ महत्वपूर्ण तथ्य साझा किए:

  • सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार: जर्मनी आज यूरोप में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है।
  • मेक इन इंडिया: भारत में 2,000 से अधिक जर्मन कंपनियां सक्रिय हैं, जो भारत के औद्योगिक विकास और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को गति दे रही हैं।
  • भारतीय निवेश: साथ ही, कई भारतीय कंपनियां भी जर्मनी में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।

निष्कर्ष
राजनाथ सिंह ने अंत में कहा कि भले ही कूटनीतिक और राजनीतिक संबंधों की डोर सरकारों के हाथ में होती है, लेकिन असल रिश्ते ‘पीपल-टू-पीपल’ (जनता के आपसी जुड़ाव) से तय होते हैं। उन्होंने भारतीय प्रवासियों को भारत का सच्चा एंबेसडर बताया।

Related posts

RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान: जातिवाद मिटाने के लिए अंतर्जातीय विवाह का करें समर्थन, राजनीति पर साधा निशाना

सोमनाथ मंदिर की 75वीं वर्षगांठ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बड़ा ऐलान, 1000 दिनों तक होगी विशेष पूजा

पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत और राजनीतिक घमासान: ममता-अखिलेश की मुलाकात पर दिलीप घोष का पलटवार

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Read More