राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह: राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने आयुर्वेद को जीवन विज्ञान बताया, विद्यार्थियों को दी शुभकामनाएं

राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह: राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने आयुर्वेद को जीवन विज्ञान बताया, विद्यार्थियों को दी शुभकामनाएं

राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के नवम दीक्षांत समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं। आयुर्वेद को जीवन का विज्ञान बताते हुए उन्होंने समाज और राष्ट्र के स्वास्थ्य में योगदान का महत्व समझाया।

राजस्थान के राज्यपाल और विश्वविद्यालय कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के नवम दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत केवल उपाधि प्रदान करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों के नव जीवन की शुरुआत का महत्वपूर्ण क्षण है। राज्यपाल ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह वह समय होता है जब अर्जित ज्ञान को समाज और राष्ट्र के उत्थान में उपयोग करने की जिम्मेदारी तैयार होती है।

राज्यपाल ने आयुर्वेद की महत्ता समझाते हुए कहा कि ‘आयुर्वेद जीवन का विज्ञान’ है। यह पंचतत्व—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—और वात, पित्त, कफ के संतुलन पर आधारित समग्र स्वास्थ्य प्रणाली है। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद केवल रोगों का उपचार नहीं करता, बल्कि शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा के संतुलन के माध्यम से सम्पूर्ण स्वास्थ्य प्रदान करता है।

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राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि वर्तमान समय में मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं से जूझती दुनिया में आयुर्वेद मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे सेवा भाव को अपने जीवन का मूलमंत्र बनाएं और ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ के सिद्धांत को अपनाते हुए समाज के स्वास्थ्य संवर्धन में योगदान दें।

उन्होंने विश्वविद्यालय के शिक्षण, अनुसंधान और सेवा कार्यों की भी सराहना की। राज्यपाल ने प्रमाण आधारित अनुसंधान, नवाचार और वैश्विक स्तर पर आयुष पद्धतियों के प्रसार पर जोर दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा संचालित महाविद्यालयों, अनुसंधान कार्यों, ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा शिविरों, स्वर्ण प्राशन कार्यक्रम और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ किए गए समझौतों की प्रशंसा की। साथ ही “धन्वन्तरि वनौषधि उद्यान” के विकास को भी महत्वपूर्ण पहल बताया।

इस अवसर पर राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की ड्रग टेस्टिंग लेबोरेट्री का लोकार्पण किया। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने अपने उद्बोधन में कहा कि दीक्षांत समारोह भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा के पुनर्जागरण का उत्सव है और आज विश्व भारत के ज्ञान, विज्ञान और जीवन दर्शन की ओर आशा भरी दृष्टि से देख रहा है।

उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन और शाश्वत ज्ञान परंपरा का हिस्सा है और वैश्विक स्तर पर इसका व्यापक स्वीकार्यता प्राप्त हो रही है। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया कि राजस्थान आयुष हब के रूप में उभर रहा है और जोधपुर इस दिशा में अपनी विशेष पहचान बना रहा है।

समारोह में कुल 16 विद्यार्थियों को पीएचडी, 133 को आयुर्वेद तथा 12 को होम्योपैथी में एमडी/एमएस और 1,230 विद्यार्थियों को स्नातक उपाधियां प्रदान की गई। साथ ही कुल 6 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने अंत में कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के लिए न केवल उपाधि प्राप्ति का अवसर है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र के स्वास्थ्य क्षेत्र में योगदान करने की प्रेरणा भी देता है।

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