राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं की एसआईआर के खिलाफ दाखिल याचिका में सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने 14 तकनीकी कमियां बताई हैं। खामियां दूर होने के बाद ही सुनवाई के लिए याचिका सूचीबद्ध होगी।
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर मंगलवार को सुनवाई नहीं हो सकेगी। याचिका की जांच के दौरान सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने इसमें 14 तकनीकी कमियां बताई हैं। इन खामियों को दूर किए जाने के बाद ही याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकेगा। जानकारी के मुताबिक, याचिका में प्रतिवादियों के नाम से जुड़ी गड़बड़ियों से लेकर आवश्यक दस्तावेजों और वकालतनामों की कमी तक कई आपत्तियां दर्ज की गई हैं। राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत विपक्ष के 11 नेताओं ने इस याचिका के जरिए एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं और चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताओं की आशंका है। हालांकि, फिलहाल याचिका में बताई गई तकनीकी कमियों को दूर करना जरूरी है। इसके बाद ही अदालत में मामले की सुनवाई का रास्ता साफ हो सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने बताईं 14 तकनीकी कमियां
राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की ओर से दाखिल याचिका की जांच के दौरान सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने कुल 14 कमियां दर्ज की हैं। इन आपत्तियों में प्रतिवादियों के नाम में गड़बड़ी, निजी पक्षकारों को प्रतिवादी बनाने के संबंध में आवश्यक स्पष्टीकरण का अभाव और पुराने फैसले की प्रति संलग्न नहीं किया जाना शामिल है। इसके अलावा, याचिका के साथ दाखिल दस्तावेजों और जरूरी औपचारिकताओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इन तकनीकी कमियों को दूर किए बिना याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया जा सकता। अदालत में किसी मामले की सुनवाई से पहले रजिस्ट्री दस्तावेजों की जांच करती है और यह सुनिश्चित करती है कि याचिका निर्धारित नियमों तथा प्रक्रियाओं के अनुरूप हो। यदि दस्तावेजों में कोई कमी पाई जाती है, तो संबंधित पक्ष को उसे ठीक करने का अवसर दिया जाता है। इस मामले में भी याचिका दाखिल करने वाले पक्ष को बताई गई खामियों को दूर करना होगा।
नौ नेताओं के वकालतनामे नहीं, खरगे के पहचान पत्र की प्रति भी धुंधली
याचिका में सामने आई प्रमुख कमियों में नौ याचिकाकर्ताओं की ओर से वकालतनामा दाखिल नहीं किया जाना भी शामिल है। जानकारी के अनुसार, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे को छोड़कर बाकी नौ नेताओं के वकालतनामे याचिका के साथ उपलब्ध नहीं थे। वकालतनामा वह कानूनी दस्तावेज होता है, जिसके जरिए कोई पक्षकार अपने वकील को अदालत में अपनी ओर से पैरवी करने का अधिकार देता है। इसके अतिरिक्त, मल्लिकार्जुन खरगे के पहचान पत्र की प्रति भी धुंधली बताई गई है। रजिस्ट्री ने कोर्ट फीस से संबंधित कमी भी दर्ज की है। बताया गया है कि निर्धारित राशि की तुलना में 220 रुपये की कोर्ट फीस कम जमा की गई। दस्तावेजों की प्रिंटिंग में कमी और प्रतिवादियों के विवरण से जुड़ी त्रुटियां भी आपत्तियों में शामिल हैं। इन सभी कमियों को दूर करने के बाद ही याचिका की प्रक्रिया आगे बढ़ पाएगी।
राहुल गांधी समेत 11 नेताओं ने दाखिल की याचिका
यह याचिका सोमवार को कांग्रेस की कानूनी टीम की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई थी। इसमें राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के अलावा विपक्ष के विभिन्न दलों के नौ अन्य नेता याचिकाकर्ता हैं। इनमें तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी प्रसाद यादव, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत, माकपा के एम.ए. बेबी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सुप्रिया सुले और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ई.टी. मोहम्मद बशीर शामिल हैं। इस तरह याचिका में कुल 11 नेताओं के नाम हैं। उल्लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी की ओर से इस याचिका में कोई नेता याचिकाकर्ता के रूप में शामिल नहीं है। याचिका में निर्वाचन आयोग, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू को प्रतिवादी बनाया गया है।
एसआईआर और कथित वोट चोरी को लेकर विपक्ष के आरोप
विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी और अन्य नेताओं का आरोप है कि एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने से चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। विपक्ष ने इस मुद्दे को कथित वोट चोरी से जोड़ते हुए निर्वाचन आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। इसी सिलसिले में सोमवार को राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के कई नेताओं ने दिल्ली में मार्च निकाला था। इस दौरान बड़ी संख्या में समर्थक और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई, जिसमें एसआईआर की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग किए जाने की बात कही गई है। ये विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप और याचिका में की गई मांगें हैं; इन पर अदालत का अंतिम निर्णय आना बाकी है।
मंगलवार को नहीं होगी सुनवाई, कमियां दूर होने के बाद आगे बढ़ेगा मामला
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को याचिका से संबंधित प्रक्रिया पूरी करने के लिए रजिस्ट्री को निर्देश दिए थे, ताकि मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सके। हालांकि, जांच के दौरान 14 तकनीकी कमियां सामने आने के कारण मंगलवार को सुनवाई की संभावना फिलहाल टल गई है। याचिका की मेंशनिंग भी मंगलवार को नहीं की जाएगी। अब याचिकाकर्ताओं की कानूनी टीम को रजिस्ट्री की ओर से बताई गई आपत्तियों को दूर करना होगा। इसके बाद याचिका को सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सभी कमियां कब तक दूर होंगी और सुनवाई के लिए अगली तारीख कब निर्धारित की जाएगी। इस मामले पर आगे की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि याचिकाकर्ता आवश्यक दस्तावेज और औपचारिकताएं कब तक पूरी करते हैं। एसआईआर और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं से जुड़े इस मामले में अब सबकी नजरें याचिका की खामियां दूर होने और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू होने पर टिकी हैं।