पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने हरियाणा के साथ SYL विवाद का समाधान आपसी सहमति से निकालने पर जोर दिया, राज्य के जल अधिकार सुरक्षित रहेंगे।
SYL विवाद: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ बैठक में सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर विवाद को आपसी सहमति से हल करने पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब सरकार जल विवाद में अपने राज्य के हितों की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित है।
मुख्यमंत्री मान ने कहा कि पंजाब के पास किसी अन्य राज्य को देने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है, लेकिन हरियाणा के साथ सहयोग और सौहार्दपूर्ण समाधान की दिशा में कदम उठाने को तैयार है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा भावनात्मक है और यदि इसे लागू किया गया तो राज्य को कानून-व्यवस्था और सामाजिक दृष्टि से गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
पंजाब के जल अधिकारों की स्थिति
सीएम मान ने बताया कि तीन नदियों के कुल 34.34 मिलियन एकड़ फीट पानी में से पंजाब को केवल 14.22 MAF, यानी लगभग 40 प्रतिशत पानी ही मिला है। शेष 60 प्रतिशत पानी हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान को जाता है, जबकि इन राज्यों में से कोई भी नदियाँ पंजाब से होकर नहीं बहतीं। उन्होंने पंजाब में भूमिगत जल संसाधनों पर अत्यधिक दबाव और 115 में से 153 ब्लॉकों में पानी के दोहन की गंभीर स्थिति पर चिंता जताई।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब हमेशा अपने हिस्से के पानी से परे अन्य राज्यों की आवश्यकताओं की पूर्ति करता रहा है, लेकिन बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं का नुकसान मुख्य रूप से पंजाब को झेलना पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब के हितों का पूरा ध्यान रखते हुए ही कोई भी निर्णय लिया जाना चाहिए।
साझा समाधान की पहल
भगवंत सिंह मान ने कहा कि हाल के इतिहास में यह पहली बार है जब दोनों राज्यों की सरकारें इस विवाद के समाधान के लिए गंभीर विचार-विमर्श कर रही हैं। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह जीत-हार का मामला नहीं, बल्कि दोनों राज्यों और उनके लोगों के हितों और भावनाओं का सवाल है।
सीएम मान ने संयुक्त वर्किंग ग्रुप बनाने का सुझाव दिया, जिसमें दोनों राज्यों के अधिकारी इस मुद्दे पर नियमित बैठकें आयोजित करेंगे। उनका मानना है कि इस प्रक्रिया से सौहार्दपूर्ण समाधान निकलेगा और दोनों राज्यों में विकास, समृद्धि और प्रगति का नया दौर शुरू होगा।
इस अवसर पर पंजाब के जल संसाधन मंत्री बरिंदर गोयल, मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. रवि भगत और जल संसाधन सचिव कृष्ण कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।