लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 लोक सभा में पेश। पेपर लीक मामलों में 2 महीने में जांच, स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट और 3 महीने में ट्रायल पूरा करने का प्रावधान।
देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार सामने आ रही धांधली, धोखाधड़ी और पेपर लीक जैसी गंभीर समस्याओं पर पूरी तरह से अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार एक ऐतिहासिक एवं कठोर विधायी कदम उठाने जा रही है। ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ आज लोक सभा में पेश किया जाएगा। केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री (DoPT) डॉ. जितेंद्र सिंह इस महत्वपूर्ण विधेयक को सदन के पटल पर रखेंगे। बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में तय किए गए निर्णय के अनुसार, इस कानून पर संसद में लगभग चार घंटे की विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।
एनडीए (NDA) के युवा सांसद संभालेंगे कमान
संसद में इस विधेयक के समर्थन और युवाओं के दृष्टिकोण को मजबूती से रखने के लिए सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन ने अपने युवा और प्रखर वक्ताओं की एक बड़ी टीम को मैदान में उतारा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से बांसुरी स्वराज और तेजस्वी सूर्या चर्चा की अगुवाई करेंगे। इसके अलावा, सहयोगी दलों से जनता दल यूनाइटेड (JDU) के आलोक कुमार सुमन, तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के लावु श्री कृष्ण देवरायालु, शिवसेना के श्रीकांत शिंदे, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के सुनील तटकरे, अपना दल (एस) की अनुप्रिया पटेल और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अरुण भारती भी बहस में हिस्सा लेंगे। महिला एवं युवा सांसदों में शर्मिला सरकार और मिताली बाग भी गठबंधन का पक्ष रखेंगी।
लोक परीक्षा कानून 2024 में 7 मुख्य संशोधन: त्वरित न्याय और कड़े प्रावधान
वर्ष 2024 के मूल अधिनियम को और अधिक प्रभावकारी बनाने के लिए केंद्र सरकार ने इसमें सात प्रमुख संशोधनों का प्रस्ताव तैयार किया है। इन संशोधनों का मुख्य उद्देश्य समयबद्ध जांच, त्वरित सुनवाई (Fast-Track Trial), भारी जुर्माना और कड़े दंड के जरिए पेपर लीक सिंडिकेट में खौफ पैदा करना है:
- स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन: राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह अधिकार दिया जाएगा कि वे किसी भी सत्र न्यायालय (Court of Session) को इस कानून के तहत अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट के रूप में नामित कर सकें।
- तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी: फास्ट-ट्रैक अदालतों में मुकदमों की सुनवाई प्रतिदिन (Day-to-Day) के आधार पर होगी। आरोप पत्र (Chargesheet) दाखिल होने की तारीख से ठीक तीन महीने (90 दिन) के भीतर ट्रायल पूरा कर फैसला सुनाना अनिवार्य होगा।
- दो महीने में जांच पूरी करने की सीमा: किसी भी पेपर लीक मामले की जांच को प्रशासनिक ढिलाई का शिकार होने से बचाने के लिए जांच प्रक्रिया को दो महीने (60 दिन) के भीतर पूरा करने का अनिवार्य समय तय किया गया है।
- विशेष कार्य बल (STF) का गठन: बड़े पैमाने पर या अंतर-राज्यीय स्तर पर होने वाली परीक्षा धोखाधड़ी से निपटने के लिए केंद्र सरकार को एक समर्पित स्पेशल टास्क फोर्स (STF) गठित करने का अधिकार दिया गया है।
- विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति: राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को इस कानून के तहत मुकदमों की मजबूती से पैरवी करने के लिए विशेष सरकारी वकीलों (Special Public Prosecutors) को नियुक्त करने का अधिकार होगा।
- कठोर कारावास और भारी जुर्माना: संगठित पेपर लीक में शामिल व्यक्तियों, कोचिंग सेंटरों, टेक वेंडरों और प्रिंटिंग प्रेस के लिए जेल की अवधि और वित्तीय जुर्माने को कई गुना बढ़ा दिया गया है।
- उच्च न्यायालय में अपील तंत्र: किसी भी फैसले या आदेश के खिलाफ अपील की सुनवाई केवल उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच करेगी और अपील स्वीकार होने के तीन महीने के भीतर उसका निपटारा करना होगा।
नीट विवाद और विपक्ष का भारी दबाव: विधेयक का पृष्ठभूमि संदर्भ
यह नया संशोधन विधेयक ऐसे समय में लाया जा रहा है जब नीट-यूजी 2026 परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में छात्रों का भारी विरोध प्रदर्शन जारी है। 20 जुलाई से शुरू हुए संसद के मानसून सत्र में विपक्ष के जोरदार हंगामे और काम रोको प्रस्तावों के कारण अब तक सदन की कार्यवाही बुरी तरह प्रभावित रही है। छात्रों और विपक्षी दलों के भारी दबाव के बीच हाल ही में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी कर देश को सख्त कानून और पारदर्शिता का भरोसा दिलाया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश: भविष्य की फूलप्रूफ परीक्षा प्रणाली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर देश के युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए लगातार निर्णायक कदम उठा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन लोगों ने युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किया है, वे आज जेलों में बंद हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, “हमने फास्ट-ट्रैक कोर्ट की स्थापना की है और संसद में हम एक सख्त प्रावधानों वाला नया कानून बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन हमें भविष्य के बारे में सोचना होगा। हमारी शिक्षा प्रणाली ऐसी बने जो पूरी तरह से विश्वसनीय, पारदर्शी हो और जिसमें आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग हो।” यह विधेयक राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसियों में जनता के विश्वास को पुनस्र्थापित करने की दिशा में सरकार की एक बड़ी परीक्षा साबित होगा।