NEET विवाद पर संसद में हंगामा। प्रियंका गांधी ने कहा- ‘छात्रों पर FIR दर्ज हो रही हैं तो नए बिल का क्या फायदा?’ मकर द्वार पर विपक्षी सांसदों का प्रदर्शन।
संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही NEET-UG 2026 परीक्षा धांधली, छात्रों के विरोध प्रदर्शन और पुलिसिया कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक टकराव चरम पर पहुंच गया है। लोक सभा में ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पेश किए जाने से ठीक पहले कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने नए कानून की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। वहीं दूसरी ओर, विपक्षी सांसदों ने जुलाई 2026 में आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में संसद भवन के मकर द्वार पर जोरदार प्रदर्शन किया और दोनों सदनों में स्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion) पेश कर तत्काल चर्चा की मांग की है।
प्रियंका गांधी का केंद्र पर तीखा हमला: ‘जब छात्रों पर FIR हो रही हैं, तो बिल का क्या औचित्य?’
संसद परिसर के बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने बिहार और पश्चिम बंगाल में छात्रों के खिलाफ जारी पुलिस कार्रवाई पर गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नीट और सीबीएसई परीक्षा गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।
प्रियंका गांधी ने कहा, “मुझे सुनने में आया है कि बिहार और बंगाल में प्रदर्शन करने वाले निर्दोष छात्रों के खिलाफ अभी भी एफआईआर (FIR) दर्ज की जा रही हैं। हालांकि यह रिपोर्ट अभी पूरी तरह से सत्यापित नहीं है, लेकिन अगर छात्रों को ही अपराधी बनाकर उन पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, तो फिर इस नए एंटी-पेपर लीक बिल को लाने का क्या औचित्य है?” उनका यह बयान स्पष्ट करता है कि विपक्ष सरकार द्वारा लाए जा रहे कानूनी बदलावों को केवल एक दिखावा मान रहा है, जबकि धरातल पर छात्रों को प्रताड़ित किया जा रहा है।
मकर द्वार पर विपक्ष का प्रदर्शन और संसद के दोनों सदनों में स्थगन प्रस्ताव
संसद सत्र की शुरुआत से पहले ही राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्मा गया। विपक्षी सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर एकत्र होकर प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में नारेबाज़ी की और एकजुटता दिखाई। विपक्षी दलों ने 20 जुलाई को आयोजित ‘संसद चलो’ आंदोलन के दौरान नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में प्रदर्शन कर रहे युवाओं और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को बेहद गंभीर मुद्दा बताया।
इसी कड़ी में, विपक्षी सांसदों ने लोक सभा में काम रोको/स्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion) और राज्य सभा में नियम 267 के तहत कामकाज निलंबित करने का नोटिस (Suspension of Business Notice) सौंपा है। विपक्ष की मांग है कि सरकार अपने नियमित विधायी कार्यों को रोककर सबसे पहले देश के लाखों छात्रों के भविष्य, पेपर लीक की जांच और पुलिस द्वारा छात्रों पर दर्ज किए गए मुकदमों पर तत्काल चर्चा कराए। मानसून सत्र के दौरान यह मुद्दा सरकार और विपक्ष के बीच सबसे बड़ा राजनीतिक गतिरोध बनकर उभरने की पूरी संभावना है।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और नंदन नीलेकणी टास्क फोर्स का गठन
यह पूरा राजनीतिक हंगामा ऐसे समय में हो रहा है जब नीट-यूजी 2026 परीक्षा में हुई व्यापक धांधलियों के बाद देशभर में छात्रों और युवा संगठनों का गुस्सा उफान पर था। इस व्यापक विरोध प्रदर्शन के दबाव में आकर तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के ठीक बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं में पारदर्शी और तकनीकी सुधार लाने के उद्देश्य से एक उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की। आईटी और तकनीक विशेषज्ञ नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में गठित इस टास्क फोर्स को NTA के पूरे ढांचे को नया रूप देने और परीक्षा प्रणाली को फूलप्रूफ बनाने के लिए सिफारिशें सौंपने की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि, विपक्ष का मानना है कि केवल टास्क फोर्स बनाने या नया बिल लाने से छात्रों का भरोसा वापस नहीं जीता जा सकता, जब तक कि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और छात्रों पर दर्ज मुकदमों को वापस नहीं लिया जाता।