Protein Craze: जिम से निकलकर सुपरमार्केट तक पहुंचा प्रोटीन, स्नैक्स से मिठाइयों तक बढ़ा ट्रेंड

Protein Craze: जिम से निकलकर सुपरमार्केट तक पहुंचा प्रोटीन, स्नैक्स से मिठाइयों तक बढ़ा ट्रेंड

 

प्रोटीन अब सिर्फ जिम और बॉडीबिल्डिंग तक सीमित नहीं रहा। सुपरमार्केट में स्नैक्स, सीरियल, ड्रिंक्स और मिठाइयों समेत कई रोजमर्रा के खाद्य उत्पाद प्रोटीन के साथ बाजार में आ रहे हैं।

एक समय था जब प्रोटीन का नाम सुनते ही जिम, बॉडीबिल्डिंग, एथलीट्स और बड़े-बड़े व्हे प्रोटीन के डिब्बे याद आते थे। लेकिन अब प्रोटीन की दुनिया काफी बदल चुकी है। प्रोटीन अब केवल फिटनेस सेंटर या स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन स्टोर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम सुपरमार्केट की अलमारियों में भी तेजी से अपनी जगह बना रहा है। स्नैक्स, सीरियल, ब्रेड, ड्रिंक्स, दही, बार और यहां तक कि मीठे खाद्य पदार्थों को भी अब अतिरिक्त प्रोटीन के साथ बाजार में उतारा जा रहा है। कंपनियां अपने उत्पादों की पैकेजिंग पर हाई-प्रोटीन या प्रोटीन रिच जैसे दावों को प्रमुखता से प्रदर्शित कर रही हैं।

प्रोटीन बना खाद्य उत्पादों की बिक्री का बड़ा आकर्षण

आज के उपभोक्ता भोजन को केवल स्वाद और कीमत के आधार पर नहीं देखते। स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस भी खरीदारी के महत्वपूर्ण हिस्से बन गए हैं। इसी बदलती सोच का फायदा खाद्य कंपनियां उठा रही हैं। जिस उत्पाद में अतिरिक्त प्रोटीन होने का दावा किया जाता है, उसे कई बार स्वस्थ जीवनशैली और बेहतर पोषण से जोड़कर पेश किया जाता है। यही वजह है कि सुपरमार्केट में सामान्य उत्पादों के साथ-साथ प्रोटीन से जुड़े विकल्पों की संख्या भी बढ़ती दिखाई दे रही है।

पहले जहां प्रोटीन मुख्य रूप से पाउडर, सप्लीमेंट और स्पोर्ट्स ड्रिंक्स में नजर आता था, वहीं अब रोजमर्रा के भोजन में भी इसका इस्तेमाल बढ़ गया है। प्रोटीन बार और शेक के अलावा प्रोटीन वाले सीरियल, चिप्स, कुकीज, योगर्ट, आइसक्रीम और अन्य स्नैक उत्पाद उपभोक्ताओं को आकर्षित कर रहे हैं।

‘Protein-Maxxed’ बन रहे सुपरमार्केट

प्रोटीन के इस बढ़ते प्रभाव को लेकर द न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी हाल में खाद्य बाजार में आए बदलाव पर चर्चा की। रिपोर्ट में सुपरमार्केट के तेजी से “protein-maxxed” होने की बात सामने आई, यानी दुकानों में बड़ी संख्या में ऐसे खाद्य उत्पाद दिखाई दे रहे हैं जिनमें प्रोटीन को प्रमुख बिक्री बिंदु के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।

यह बदलाव केवल फिटनेस प्रेमियों तक सीमित नहीं है। सामान्य उपभोक्ता भी अब भोजन खरीदते समय प्रोटीन की मात्रा को लेकर अधिक जागरूक नजर आ रहे हैं। खासकर ऐसे लोग जो व्यस्त जीवनशैली के बीच सुविधाजनक लेकिन पोषण से भरपूर विकल्प तलाशते हैं, उनके लिए प्रोटीन युक्त पैकेज्ड फूड आकर्षक हो सकते हैं।

प्रोटीन की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे क्या कारण है?

प्रोटीन शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्वों में से एक है। यह मांसपेशियों के निर्माण और रखरखाव समेत शरीर की कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। फिटनेस और वजन प्रबंधन को लेकर बढ़ती जागरूकता ने भी प्रोटीन की मांग को बढ़ाने में भूमिका निभाई है।

सोशल मीडिया ने इस ट्रेंड को और गति दी है। फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स, पोषण विशेषज्ञों और हेल्थ-केंद्रित कंटेंट के कारण लोगों के बीच प्रोटीन को लेकर चर्चा बढ़ी है। इसके अलावा, कामकाजी लोगों और युवाओं के बीच ऐसे खाद्य विकल्पों की मांग बढ़ी है जिन्हें आसानी से साथ ले जाया जा सके और जिन्हें तैयार करने में ज्यादा समय न लगे।

हर प्रोटीन वाला उत्पाद जरूरी नहीं कि हेल्दी हो

हालांकि किसी खाद्य उत्पाद पर प्रोटीन लिखा होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह उत्पाद पूरी तरह स्वास्थ्यवर्धक है। कई पैकेज्ड फूड में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने के साथ-साथ चीनी, नमक, संतृप्त वसा या कैलोरी भी अधिक हो सकती है। इसलिए केवल पैकेट पर लिखे “High Protein” या “Protein Rich” दावे को देखकर किसी उत्पाद को चुनना उचित नहीं माना जा सकता।

उपभोक्ताओं के लिए जरूरी है कि वे न्यूट्रिशन लेबल को ध्यान से पढ़ें। कुल प्रोटीन के साथ-साथ चीनी, सोडियम, वसा, फाइबर और कुल कैलोरी की मात्रा पर भी नजर डालना महत्वपूर्ण है। कई बार प्राकृतिक खाद्य पदार्थ जैसे दालें, बीन्स, दूध, दही, अंडे, मछली, मांस, सोया और मेवे भी प्रोटीन के अच्छे स्रोत हो सकते हैं।

प्रोटीन ट्रेंड बदल रहा है खाने का बाजार

प्रोटीन का बढ़ता चलन खाद्य उद्योग में एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है। कंपनियां अब केवल स्वाद और सुविधा के आधार पर उत्पाद बेचने के बजाय पोषण को भी अपने मार्केटिंग संदेश का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रही हैं। इसका असर सुपरमार्केट की पूरी उत्पाद श्रृंखला पर दिखाई दे रहा है।

ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि प्रोटीन अब केवल जिम जाने वालों की जरूरत या स्पोर्ट्स सप्लीमेंट का हिस्सा नहीं रह गया है। यह आधुनिक खाद्य संस्कृति का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है। आने वाले समय में प्रोटीन आधारित उत्पादों की यह रेंज और विस्तृत हो सकती है। हालांकि, उपभोक्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह रहेगी कि वे केवल पैकेजिंग पर लिखे दावों के बजाय पूरे पोषण प्रोफाइल को देखकर अपने भोजन का चुनाव करें।

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