राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में भारतीय लागत लेखाकार संस्थान के राष्ट्रीय छात्र दीक्षांत समारोह में भाग लिया। उन्होंने लेखांकन, जवाबदेही और पर्यावरण संरक्षण में संस्थान की भूमिका पर जोर दिया।
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज नई दिल्ली में भारतीय लागत लेखाकार संस्थान (ICMAI) के राष्ट्रीय छात्र दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने लेखांकन और जवाबदेही के महत्व पर जोर दिया।
लेखांकन और जवाबदेही का महत्व
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि भारतीय इतिहास में लेखांकन और जवाबदेही का गहरा संबंध रहा है, जिसके कारण लेखाकारों को समाज में उच्च सम्मान प्राप्त है। उन्होंने कहा कि हम जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं और इसलिए लेखांकन को विशेष महत्व दिया जाता है।
भारतीय लागत लेखाकार संस्थान की भूमिका और योगदान
राष्ट्रपति ने बताया कि भारतीय लागत लेखाकार संस्थान की स्थापना वर्ष 1944 में हुई थी, जिसका उद्देश्य लागत और प्रबंधन लेखाकारों का विनियमन और विकास करना था। स्वतंत्रता के बाद यह संस्थान न केवल आर्थिक परिवर्तन का साक्षी रहा है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व की सबसे मजबूत अर्थव्यवस्थाओं में विकसित करने में अहम भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि भारत के आर्थिक और कॉर्पोरेट विशेषज्ञ लागत और प्रबंधन लेखाकारों के योगदान को सराहते हैं। भारतीय लागत लेखाकार संस्थान ने नीति निर्माताओं, केंद्र और राज्य सरकारों, तथा विभिन्न संगठनों को लागत-कुशल रणनीतियाँ और प्रणालियाँ विकसित करने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया है।
जलवायु परिवर्तन और स्थिरता के प्रति संस्थान की भूमिका
राष्ट्रपति ने विश्व में बढ़ रहे जलवायु परिवर्तन की चुनौती को स्वीकार करते हुए कहा कि अब कॉर्पोरेट संस्थाओं को केवल लाभ पर ध्यान देने के बजाय पर्यावरण की लागत का भी विचार करना होगा। उन्होंने कहा कि भारतीय लागत लेखाकार संस्थान अपने कौशल से इस दिशा में बड़ा बदलाव ला सकता है और स्थिरता को बढ़ावा दे सकता है।
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