राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज अपना 68वां जन्मदिन मना रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण की सराहना की। पढ़ें उनके जीवन और उपलब्धियों का संक्षिप्त विवरण।
भारत की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू आज, 20 जून 2026 को अपना 68वां जन्मदिन मना रही हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें अपनी हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण की सराहना की है। राष्ट्रपति मुर्मू का जीवन, जो कि साहस, सादगी और सार्वजनिक सेवा के प्रति अटूट निष्ठा का प्रतीक है, पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।
प्रधानमंत्री की हार्दिक बधाई
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट के माध्यम से राष्ट्रपति को बधाई संदेश भेजा। उन्होंने लिखा, “भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई। साहस, सादगी, विनम्रता और सार्वजनिक सेवा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता वाली उनकी यात्रा देश भर के लोगों को प्रेरित करती है।”
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में, राष्ट्रपति मुर्मू ने असाधारण रूप से राष्ट्र की सेवा की है और वह विशेष रूप से वंचित और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के कल्याण के प्रति अत्यंत संवेदनशील रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के विकास के प्रति राष्ट्रपति का अटूट समर्पण अत्यधिक प्रेरक है। प्रधानमंत्री ने ईश्वर से उनके सुदीर्घ और स्वस्थ जीवन की कामना की है।
ओड़िशा में भेंट का कार्यक्रम
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में यह भी उल्लेख किया कि वह आज बाद में ओड़िशा में आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रपति मुर्मू से मुलाकात करेंगे। राष्ट्रपति के जन्मदिन के दिन उनका गृह राज्य ओड़िशा में रहना और वहां प्रधानमंत्री की उपस्थिति इस अवसर को विशेष बनाती है।
एक असाधारण जीवन यात्रा
श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का जीवन संघर्ष और दृढ़ संकल्प की एक जीवंत कहानी है। 20 जून 1958 को ओड़िशा के मयूरभंज जिले के एक सुदूर गांव उपारबेदा में एक संथाली आदिवासी परिवार में जन्मीं श्रीमती मुर्मू ने विषम परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा को अपना हथियार बनाया। वह अपने गांव से स्नातक की डिग्री प्राप्त करने वाली पहली महिला बनीं।
उनका सार्वजनिक जीवन जमीनी स्तर से शुरू हुआ। उन्होंने ओड़िशा सरकार में एक जूनियर असिस्टेंट के रूप में कार्य किया और बाद में शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2000 में, उन्होंने रायरंगपुर निर्वाचन क्षेत्र से विधायक के रूप में अपना राजनीतिक करियर शुरू किया और बाद में ओड़िशा सरकार में मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
ऐतिहासिक उपलब्धि
वर्ष 2015 में उन्हें झारखंड की राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने आदिवासी समुदायों के अधिकारों के लिए कार्य करते हुए संवैधानिक मूल्यों को मजबूती से बनाए रखा। 25 जुलाई 2022 को, श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने भारत के 15वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। वह भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति और स्वतंत्र भारत में जन्मीं देश की पहली राष्ट्रपति हैं। उनका राष्ट्रपति पद तक का सफर भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों की गहराई और समावेशिता को प्रदर्शित करता है।
प्रेरणा का स्रोत
राष्ट्रपति मुर्मू का व्यक्तित्व केवल उनके पद तक सीमित नहीं है, बल्कि वह लाखों लोगों के लिए आशा की किरण हैं। शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और जनजातीय कल्याण के लिए उनका निरंतर संघर्ष और कार्य उन्हें एक जन-प्रिय नेता के रूप में स्थापित करता है। उनके जन्मदिन पर, पूरा देश उन्हें नमन कर रहा है और उनके उत्तम स्वास्थ्य एवं राष्ट्र की सेवा में उनके दीर्घायु होने की प्रार्थना कर रहा है। उनकी यह यात्रा यह साबित करती है कि यदि इरादे नेक हों और कठिन परिश्रम की भावना हो, तो कोई भी ऊंचाई हासिल की जा सकती है। देश आज एक ऐसी राष्ट्रपति का जन्मदिन मना रहा है, जिन्होंने अपने आचरण से पद की गरिमा को नई ऊंचाइयां प्रदान की हैं।