अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: बाबा रामदेव का संदेश और देश भर में योग का उत्साह

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: बाबा रामदेव का संदेश और देश भर में योग का उत्साह

 

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर बाबा रामदेव ने योग को जीवन का आधार बताया। जानें इस वर्ष की थीम ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ और देश भर में हो रहे कार्यक्रमों की जानकारी।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) के उपलक्ष्य में पूरे देश में उत्साह का माहौल है। योग गुरु बाबा रामदेव ने शनिवार को योग को स्वास्थ्य, अनुशासन और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने का एक सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि योग में समाज, राष्ट्र और पूरी दुनिया को एकजुट करने की अद्भुत क्षमता है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पूर्व अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि योग को केवल एक दिन का अभ्यास नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका माना जाना चाहिए।

योग: जीवन पद्धति और उपचार

बाबा रामदेव ने कहा, “योग रोगियों के लिए चिकित्सा है, योगियों के लिए साधना का मार्ग है और हर व्यक्ति के लिए जीवन जीने की एक पद्धति है। आइए, योग के माध्यम से समाज, राष्ट्र और पूरी दुनिया को एकजुट करें। योग ही एकमात्र उपाय है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियों का सामना करने के लिए योग सबसे प्रभावशाली माध्यम है।

अपने संबोधन में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने इन दोनों नेताओं को ‘कर्मयोगी’ की संज्ञा दी। बाबा रामदेव ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू जैसे नेता सच्चे कर्मयोगी हैं। यदि देश के सभी मुख्यमंत्री इसी भावना के साथ कार्य करें, तो भारत 2047 से पहले ही एक विकसित राष्ट्र बन सकता है।”

देशभर में व्यापक तैयारियां

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को देश भर में योग के प्रति जागरूकता फैलाने और लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) ने ‘रन फॉर योग’ और एक विशेष जुम्बा सत्र का आयोजन किया।

AIIA के निदेशक प्रोफेसर प्रदीप कुमार प्रजापति ने इस अवसर पर कहा कि योग को केवल एक दिन तक सीमित न रखकर इसे पूरे वर्ष अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने योग को एक प्रभावी ‘एंटी-एजिंग’ उपकरण बताते हुए कहा कि प्रतिदिन का संक्षिप्त योग अभ्यास भी व्यक्ति को कई स्वास्थ्य समस्याओं से दूर रखने और मानसिक शांति प्रदान करने में सहायक है।

उत्तर प्रदेश में योग का संदेश

लखनऊ में आयोजित एक योग शिविर में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भाग लिया। उन्होंने आम जनता से अपील की कि वे योग को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाएं। उन्होंने कहा कि योग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को सुधारता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और शांति के लिए भी अनिवार्य है। राज्य भर में विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा योग प्रदर्शनों के आयोजन किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में युवाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों ने हिस्सा लिया।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस प्रतिवर्ष 21 जून को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा दिसंबर 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्ताव के बाद इस दिन को वैश्विक मान्यता मिली थी। वर्ष 2026 में हम अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का 12वां संस्करण मना रहे हैं। इस वर्ष का मुख्य विषय (थीम) “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” (Yoga for Healthy Ageing) है।

यह थीम इस बात पर प्रकाश डालती है कि किस प्रकार योग हर आयु वर्ग के लोगों को शारीरिक रूप से सक्रिय, स्वतंत्र और मानसिक रूप से स्वस्थ रखने में मदद करता है। वर्तमान समय में, जब जीवनशैली जनित रोग बढ़ रहे हैं, योग का महत्व और अधिक बढ़ गया है। यह प्राचीन विद्या न केवल शरीर को लचीला बनाती है, बल्कि यह तनाव प्रबंधन और जीवन के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में भी मदद करती है।

आज जब पूरा विश्व स्वास्थ्य संकटों और मानसिक तनाव से जूझ रहा है, तब भारतीय संस्कृति की यह धरोहर ‘योग’ एक वैश्विक आशा के रूप में उभरी है। बाबा रामदेव का आह्वान कि “योग ही एकमात्र समाधान है,” आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक है। योग दिवस पर आयोजित होने वाले ये कार्यक्रम केवल प्रतीकात्मक नहीं हैं, बल्कि ये भारत के उस संकल्प को दर्शाते हैं, जिसमें ‘स्वस्थ भारत’ और ‘समर्थ भारत’ का सपना निहित है। योग का यह उत्सव हमें याद दिलाता है कि स्वास्थ्य ही असली धन है और अनुशासन ही उन्नति का मार्ग है।

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