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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंगाल के ठाकुरनगर में मतुआ मंदिर में पूजा की और बनगांव रैली में CAA के तहत नागरिकता का वादा किया। जानें मतुआ समुदाय का राजनीतिक महत्व और मोदी का मास्टरस्ट्रोक।
ठाकुरबाड़ी दर्शन और मतुआ विरासत का सम्मान
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के प्रचार अभियान के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (26 अप्रैल) को उत्तर 24 परगना जिले के ठाकुरनगर स्थित मतुआ महासंघ के मुख्य मंदिर, ठाकुरबाड़ी में विशेष पूजा-अर्चना की। यह मंदिर 19वीं सदी के समाज सुधारक हरिचंद ठाकुर और गुरुचंद ठाकुर की विरासत का केंद्र है, जिन्होंने शिक्षा और सामाजिक सुधारों के जरिए ‘नमोशूद्र’ समुदाय के उत्थान की नींव रखी थी। इस अवसर पर पीएम मोदी ने अपनी 2021 की बांग्लादेश यात्रा के दौरान ओराकांडी जाने की यादों को साझा करते हुए कहा कि मतुआ समुदाय की आस्था और परंपराओं से जुड़ना उनके लिए हमेशा से एक अद्भुत अनुभव रहा है।
CAA के तहत नागरिकता का ठोस भरोसा
बनगांव की विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने मतुआ समुदाय की लंबे समय से चली आ रही नागरिकता की मांग पर बड़ा आश्वासन दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से घोषणा की कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत मतुआ नमोशूद्र समुदाय के पात्र सदस्यों को भारत की स्थायी नागरिकता प्रदान की जाएगी। प्रधानमंत्री ने विपक्ष, विशेष रूप से टीएमसी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे इस मुद्दे पर भ्रम और झूठ फैला रहे हैं। उन्होंने वादा किया कि शरणार्थियों को वे सभी कानूनी दस्तावेज और अधिकार दिए जाएंगे जो देश के अन्य नागरिकों के पास हैं, ताकि उनका भविष्य पूरी तरह सुरक्षित हो सके।
बंगाल चुनावों में मतुआ समुदाय का रणनीतिक महत्व
पश्चिम बंगाल की राजनीति में मतुआ समुदाय एक अत्यंत निर्णायक वोट बैंक है, जो राज्य की कम से कम 34 विधानसभा सीटों पर सीधा प्रभाव डालता है। भारत-बांग्लादेश सीमा से सटी लगभग दो दर्जन सीटों पर इस समुदाय का समर्थन भाजपा की जीत के लिए अनिवार्य माना जाता है, जैसा कि 2021 के चुनावों में भी देखा गया था। वर्तमान में मतदाता सूची से नामों के हटने (SIR प्रक्रिया) को लेकर समुदाय के बीच उपजी चिंताओं को दूर करने के लिए पीएम मोदी का यह दौरा और CAA पर दिया गया स्पष्ट संदेश चुनावी दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।