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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्लोवाकिया यात्रा के दौरान ब्रातिस्लावा में वाराणसी पर आधारित प्रदर्शनी देखी। जानें भारत-स्लोवाकिया के बीच किन अहम विषयों पर हुई चर्चा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्लोवाकिया यात्रा भारत और स्लोवाकिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक नए युग का सूत्रपात है। इस यात्रा के दौरान न केवल कूटनीतिक और आर्थिक विषयों पर चर्चा हुई, बल्कि सांस्कृतिक सेतुओं को भी मजबूती मिली। स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पेटर पेलेग्रिनी और प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ हुई प्रधानमंत्री मोदी की बातचीत ने दोनों देशों के बीच भविष्य के सहयोग के कई रास्ते खोल दिए हैं। यह यात्रा वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख और मध्य यूरोप के देशों के साथ रणनीतिक भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
सांस्कृतिक समन्वय का प्रतीक: वाराणसी प्रदर्शनी
प्रधानमंत्री मोदी की स्लोवाकिया यात्रा का एक अत्यंत भावुक और सांस्कृतिक पहलू ब्रातिस्लावा के राष्ट्रपति महल में आयोजित ‘वाराणसी’ पर केंद्रित प्रदर्शनी थी। यह प्रदर्शनी भारत और स्लोवाकिया के बीच गहराते सांस्कृतिक संबंधों का जीवंत उदाहरण है। प्रधानमंत्री ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किया कि राष्ट्रपति पेलेग्रिनी के साथ उन्होंने उन कार्यों को देखा, जिन्हें स्लोवाकियाई कलाकारों ने वाराणसी की हालिया यात्रा के दौरान तैयार किया था। उन्होंने कहा कि कला और संस्कृति में लोगों को करीब लाने की अनूठी क्षमता होती है। यह कलात्मक संवाद दोनों देशों के नागरिकों के बीच भावनात्मक और मानवीय जुड़ाव को बढ़ाने का काम करेगा।
रणनीतिक और आर्थिक सहयोग की रूपरेखा
राष्ट्रपति पेलेग्रिनी के साथ अपनी मुलाकातों और चर्चाओं को प्रधानमंत्री मोदी ने अत्यंत सकारात्मक बताया। दोनों नेताओं के बीच ऊर्जा, जैव-ईंधन (biofuels), विनिर्माण, परिवहन, नवाचार और निवेश जैसे विविध विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में सहयोग की अपार संभावनाओं को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों के बीच आपसी संपर्क (people-to-people linkages) को और गहरा बनाने पर जोर दिया। यह आर्थिक और तकनीकी साझेदारी आने वाले समय में दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है। स्लोवाकिया के साथ बढ़ता तकनीकी और औद्योगिक सहयोग भारत की ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों के लिए भी सहायक सिद्ध होगा।
बहुपक्षवाद और वैश्विक सुधारों पर साझा रुख
प्रधानमंत्री मोदी और स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको ने बहुपक्षवाद के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। भारत और स्लोवाकिया के बीच सोमवार को जारी संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र (UN) और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में व्यापक सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया। उनका मानना है कि वैश्विक संस्थाओं को आज की समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करना चाहिए, ताकि वे अधिक प्रतिनिधि, समावेशी और प्रभावी बन सकें। दोनों नेताओं ने सुरक्षा परिषद के स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। यह रुख इस बात का परिचायक है कि भारत और स्लोवाकिया वैश्विक शांति और सुरक्षा के ढांचे में अधिक न्यायपूर्ण और संतुलित प्रतिनिधित्व के पक्षधर हैं।
सुरक्षा और भविष्य की साझेदारी
रक्षा, साइबर सुरक्षा, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और कनेक्टिविटी को भारत-स्लोवाकिया साझेदारी के प्रमुख स्तंभों के रूप में चिह्नित किया गया है। प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री फिको ने इन क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की है। बदलती दुनिया में सुरक्षा चुनौतियाँ अब केवल भौतिक सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे साइबर और डिजिटल स्पेस तक फैल गई हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग न केवल दोनों देशों के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करेगा, बल्कि एक अधिक सुरक्षित वैश्विक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में भी योगदान देगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्लोवाकिया यात्रा ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारत अपने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के दर्शन के अनुरूप विश्व भर में मित्र राष्ट्रों के साथ संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। कला, संस्कृति, तकनीक और कूटनीति के मिश्रण ने भारत-स्लोवाकिया संबंधों को एक नया आयाम दिया है। वाराणसी के प्रति स्लोवाकिया के कलाकारों का आकर्षण और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दोनों देशों के साझा दृष्टिकोण इस बात का प्रमाण हैं कि भौगोलिक दूरी के बावजूद, दोनों देश साझा मूल्यों और भविष्य की साझा आकांक्षाओं से जुड़े हुए हैं। यह यात्रा आने वाले वर्षों में भारत और स्लोवाकिया को एक विश्वसनीय और रणनीतिक सहयोगी के रूप में स्थापित करेगी।